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'CJP से मेरा कोई रिश्ता नहीं', ध्रुव राठी का बड़ा बयान, वोट चोरी पर क्या बोले?
ध्रुव राठी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से किसी भी संबंध से इनकार किया है। जानिए ज्ञानेश कुमार, SIR, वोट चोरी के आरोपों और दिल्ली प्रदर्शन पर उनका बड़ा बयान।
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच यूट्यूबर ध्रुव राठी ने संगठन से किसी भी तरह का जुड़ाव होने से इनकार किया है। news18 से बात करते हुए राठी ने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक संगठन के प्रतिनिधि या पदाधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत हैसियत से प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लोकतंत्र के लिए गंभीर मुद्दा बताते हुए आंदोलन का समर्थन किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले वीडियो के लिए चर्चित ध्रुव राठी के CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरभ दास से दोस्ताना संबंध बताए जाते हैं। इससे पहले NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान भी राठी दीपके के साथ वीडियो कॉल पर बातचीत करते नजर आए थे। अब चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
उन्होंने पुलिस की शर्तों पर छूटने की खबरों को भी अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस से रिहा होने के लिए उन्होंने कोई बॉन्ड साइन नहीं किया और नहीं कोई शर्त उनके सामने रखी गई। पुलिस ने उन्हें रात बिना शर्त छोड़ा था।
बेंगलुरु से दिल्ली तक प्रदर्शन में सक्रिय दिखे ध्रुव राठी
8 अक्टूबर को बेंगलुरु में आयोजित प्रदर्शन से पहले ध्रुव राठी आंदोलन से जुड़े और मंच से भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने SIR के जरिए मतदाता सूची में कथित हेरफेर और 'वोट चोरी' के आरोपों का मुद्दा उठाया। इसके बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित CJP प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जताई।
प्रदर्शन से पहले राठी दिल्ली पहुंचे और इंडिया गेट से वीडियो जारी कर लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। CJP इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थी। संगठन का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, वोट चोरी के आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हिरासत के बाद ध्रुव राठी ने लगाए पुलिस पर आरोप
10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने संगठन के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की। इसी दौरान ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया गया। राठी के मुताबिक, उन्हें गुरुग्राम स्थित उनके आवास से पुलिस अपने साथ ले गई और इस दौरान उनके साथ कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया।
रिहाई के बाद राठी ने दावा किया कि पुलिस उन्हें उनके बेडरूम से घसीटकर ले गई और इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं। उन्होंने अपनी कार्रवाई को गिरफ्तारी के बजाय अपहरण करार देते हुए पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। पुलिस की कार्रवाई और राठी के आरोपों को लेकर विवाद के बीच उनका बयान चर्चा में आ गया।
'मैं व्यक्तिगत हैसियत से प्रदर्शन में आया हूं'
CJP से अपने संबंधों पर सफाई देते हुए ध्रुव राठी ने कहा कि वह संगठन में कोई पद नहीं रखते और न ही उसकी ओर से प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उन्होंने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि वह देश के उन लोगों की तरह प्रदर्शन में शामिल हुए, जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर चिंतित हैं।
राठी ने कहा, 'मैं यहां व्यक्तिगत तौर पर आया हूं। ऐसा नहीं है कि मैं CJP से जुड़ा हूं या कोई पदाधिकारी हूं। मैं व्यक्तिगत क्षमता से आया हूं, जैसे देश में लाखों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।'
उनके इस बयान को आंदोलन में अपनी स्वतंत्र भूमिका स्पष्ट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, CJP नेताओं के साथ उनकी सार्वजनिक मौजूदगी और पहले से बताए जा रहे दोस्ताना संबंधों के कारण इस मुद्दे पर चर्चा जारी है।
'चुनाव आयोग का निष्पक्ष होना जरूरी'
ध्रुव राठी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत बताते हुए कहा कि वह विशेष रूप से इसी मुद्दे पर प्रदर्शन में हिस्सा लेने भारत आए थे। उनके मुताबिक, वोट चोरी के आरोप बेहद गंभीर हैं और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
राठी ने लोकतंत्र और तानाशाही के बीच अंतर को समझाते हुए कहा कि किसी देश की व्यवस्था को केवल 100 प्रतिशत लोकतंत्र या 100 प्रतिशत तानाशाही के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद से भारत की स्थिति तानाशाही की दिशा में बढ़ती गई है।
उनके बयान ने एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। वहीं, CJP से औपचारिक संबंध होने से इनकार करने के बावजूद ध्रुव राठी का आंदोलन में शामिल होना इस पूरे विवाद का अहम पहलू बना हुआ है।


