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‘मर्डर के दोषी को बेल, राष्ट्रवादी को जेल’, ध्रुव राठी के इस बयान से मचा बवाल!
Dhruv Rathee Statement: ध्रुव राठी ने CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत और हत्या के मामले में नंदलाल राय को मिली जमानत पर सवाल उठाए। जानिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और पूरे विवाद की वजह।
Dhruv Rathee Statement
Dhruv Rathee Statement: एक तरफ जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने वाले नेताओं के जेल में रहने पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पा चुके व्यक्ति को जमानत मिलने का मुद्दा चर्चा में है। इसी विरोधाभास को लेकर यूट्यूबर ध्रुव राठी (Dhruv Rathee) ने सोशल मीडिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कॉक्रोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के नेताओं सौरव दास (Saurav Das) और आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) की हिरासत का जिक्र करते हुए लिखा, ‘मर्डर के दोषी को जमानत, राष्ट्रवादी जेल में।’ उनके बयान के बाद न्यायिक प्रक्रिया, विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था (Law and Order) को लेकर बहस तेज हो गई है।
जंतर-मंतर पर हिरासत में लिए गए थे CJP के नेता
कॉक्रोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर कथित तौर पर सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रवेश करने और शांति भंग करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। शुरुआत में दोनों को पांच दिन के लिए हिरासत में रखा गया था। इसके बाद उनकी न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) बढ़ा दी गई। दोनों नेताओं ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में चुनौती दी है।
इस मामले को लेकर ध्रुव राठी ने एक्स (X) पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि दोनों नेता अब भी जेल में हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की वजह शांति भंग करने का आरोप बताया जा रहा है। राठी ने सवाल उठाया कि जब एक मामले में हत्या के दोषी को जमानत मिल सकती है, तो इन नेताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही है।
ध्रुव राठी ने जमानत के फैसले को लेकर क्या कहा?
ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के एक फैसले का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को राहत मिली है, जबकि CJP के दोनों नेता हिरासत में हैं। उन्होंने इसे मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला मामला बताया और आरोप लगाया कि पूरे सिस्टम में आम लोगों के साथ न्याय को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राठी ने एक्स पर वीडियो के साथ लिखा, ‘मर्डर के दोषी को जमानत, राष्ट्रवादी जेल में।’ उनका बयान न्यायिक फैसलों और हिरासत में रखे गए लोगों के मामलों के बीच तुलना पर आधारित है। हालांकि, दोनों मामलों की कानूनी परिस्थितियां अलग हैं और जमानत या दोषसिद्धि पर रोक का फैसला संबंधित मामले के तथ्यों और अदालत की दलीलों के आधार पर होता है।
किस हत्या के मामले में मिली जमानत?
Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 अक्टूबर 2026 को नंदलाल राय उर्फ बबलू राय को राहत दी थी। वाराणसी की सेशन कोर्ट ने 2017 के प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड में 2025 में नंदलाल राय को उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा सुनाई थी।
इसके बाद नंदलाल राय ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दोषसिद्धि (Conviction) और सजा पर रोक लगाने की मांग की। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दलील दी कि वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election 2027) में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर या संभव होने पर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं।
जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने अपील लंबित रहने तक उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई तथा जमानत मंजूर की। अदालत ने कहा कि आम व्यक्ति के आजीविका के अधिकार को किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम नहीं आंका जा सकता।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अपील के दौरान दोषसिद्धि और सजा पर रोक तथा जमानत मिलने का अर्थ बरी होना नहीं है। मामले में अंतिम फैसला अपील की सुनवाई के बाद होगा।
अंकिता भंडारी केस का भी ध्रुव राठी ने किया जिक्र
ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में जिन वीआईपी लोगों को लेकर सवाल उठते रहे हैं, उनमें बीजेपी नेता दुष्यंत गौतम (Dushyant Gautam) का नाम भी लिया जाता रहा है। राठी ने दावा किया कि दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने से अंकिता भंडारी को न्याय मिलने की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है।
ये आरोप और राजनीतिक टिप्पणियां ध्रुव राठी की ओर से की गई हैं। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को स्थापित तथ्य मानने से पहले संबंधित जांच, आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक निष्कर्षों को देखना जरूरी है।
हिरासत और जमानत को लेकर क्यों छिड़ी बहस?
CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत और नंदलाल राय को मिली राहत को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ध्रुव राठी ने दोनों घटनाओं को साथ रखकर न्याय व्यवस्था (Justice System) और राजनीतिक अधिकारों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कानूनी तौर पर किसी मामले में जमानत या सजा पर रोक का फैसला आरोपों की प्रकृति, उपलब्ध तथ्यों, अपील और संबंधित कानूनों के आधार पर किया जाता है।
ऐसे में इस विवाद के केंद्र में दो अलग-अलग न्यायिक प्रक्रियाएं हैं-एक ओर जंतर-मंतर मामले में CJP नेताओं की हिरासत को चुनौती दी गई है, तो दूसरी ओर हत्या के मामले में दोषसिद्ध व्यक्ति की अपील पर हाईकोर्ट ने राहत दी है। दोनों मामलों की आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।


