Digital Green Highway: 1 जनवरी 2027 से हाईवे होगा हाईटेक, हादसों का मिलेगा अलर्ट

Digital Green Highway: देशभर के नए फोरलेन हाईवे और एक्सप्रेस-वे एआई सर्विलांस, डिजिटल सेंसर और ईवी चार्जिंग से लैस होंगे, वाहन चालकों को रियल-टाइम अलर्ट मिलेगा।

Newstrack Network
Published on: 25 Aug 2026 10:51 PM IST
From January 1, 2027, highways will be hi-tech, disasters will be alerted
X

1 जनवरी 2027 से हाईवे होगा हाईटेक, हादसों का मिलेगा अलर्ट (Photo- Social Media)

Digital Green Highway: नई दिल्ली। देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और एक्सप्रेस-वे पर सफर को सुरक्षित, सुगम और स्मार्ट बनाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक व्यापक और महत्वाकांक्षी नीति तैयार की है। भारत में 1 जनवरी 2027 से 'डिजिटल ग्रीन हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर' के नए दौर का आगाज होने जा रहा है। इसके तहत देश का समूचा रोड नेटवर्क एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म और एकीकृत क्लाउड डेटा बैंक से जोड़ा जाएगा। इससे वाहन चालकों को सफर के दौरान अपनी कार के डैशबोर्ड स्क्रीन या जीपीएस ऐप्स पर मौसम, गति सीमा, आगे के ट्रैफिक और संभावित हादसों का रियल-टाइम 'एडवांस अलर्ट' मिलता रहेगा।

मंत्रालय की नई नीति के अनुसार, 1 जनवरी 2027 के बाद बनने वाले किसी भी नए फोर-लेन नेशनल हाईवे या एक्सप्रेस-वे को प्रोविजनल कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (PCOD) और टोल टैक्स वसूलने का अधिकार तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक कि वह पूरी तरह से एआई-सक्षम सर्विलांस ग्रिड और ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस न हो।

कोहरे, धुंध और अंधेरे में भी नजर रखेंगे थर्मल ANPR कैमरे

पुराने हाईवे जहां असंगठित नेटवर्क, सामान्य कैमरों और मैन्युअल पेट्रोलिंग पर निर्भर रहते थे, वहीं नए डिजिटल ग्रीन हाईवे अत्याधुनिक सेंसर ग्रिड और नाइट-विजन तकनीक से संचालित होंगे:

थर्मल और नाइट-विजन सर्विलांस: अत्यधिक कोहरे, घनी धुंध या रात के घने अंधेरे में भी काम करने वाले एआई-सक्षम थर्मल एएनपीआर (ANPR - ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे पूरे हाईवे पर तैनात किए जाएंगे।

हादसा होते ही तुरंत अलर्ट: यदि हाईवे पर आगे कोई दुर्घटना, भूस्खलन या रुकावट आती है, तो एआई सिस्टम तुरंत पीछे से आ रहे वाहनों की स्क्रीन और मोबाइल ऐप्स पर इमरजेंसी अलर्ट भेज देगा, जिससे पीछे से होने वाली सिलसिलेवार टक्करों (Pile-ups) को रोका जा सकेगा।

केंद्रीकृत क्लाउड डेटा बैंक: चालकों को मौसम के बदलाव, अधिकतम गति सीमा, नजदीकी खाली ईवी चार्जिंग स्लॉट और जाम की स्थिति का सटीक पूर्वानुमान रियल-टाइम में मिलता रहेगा।

हर 40-50 किमी पर 100 kW क्षमता के अल्ट्रा-फास्ट EV चार्जर्स

इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देने और लंबी दूरी के सफर में चार्जिंग की चिंता खत्म करने के लिए बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव किया जा रहा है:

नए एक्सप्रेस-वे और फोर-लेन हाईवे पर हर 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर कम से कम 100 किलोवॉट (kW) क्षमता वाले अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग प्वाइंट स्थापित करना अनिवार्य होगा।

सड़क विकास कंपनियों (डेवलपर्स) को कुल निर्माण लागत का 3 से 5 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से डिजिटल सर्विलांस, सेंसर ग्रिड और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर खर्च करना होगा।

पायलट प्रोजेक्ट: चार प्रमुख एक्सप्रेस-वे से होगी शुरुआत

इस हाई-टेक योजना को शुरुआती चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तहत देश के चार प्रमुख कॉरिडोर पर लागू किया जा रहा है:

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे

गंगा एक्सप्रेस-वे

द्वारका एक्सप्रेस-वे

चारधाम ऑल-वेदर रोड नेटवर्क

भविष्य में बनने वाले सभी नए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स पर यह नीति 100 प्रतिशत लागू होगी, जबकि वर्तमान में संचालित पुराने टोल हाईवे पर 'रेट्रोफिटिंग मॉडल' (तकनीकी अपग्रेडेशन) के जरिए इन अत्याधुनिक एआई कैमरों और डिजिटल सेंसरों को चरणबद्ध तरीके से जोड़ा जाएगा।

Newstrack Network
ABOUT THE AUTHOR

Newstrack Network

Newstrack Desknewstracknetwork@gmail.com

Newstrack is one of the most Trusted and Popular news portal of India. Remain updated and aware, only on Newstrack

Next Story