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अपने ही निकले गद्दार! DRDO गेस्ट हाउस का मैनेजर निकला पाकिस्तानी जासूस, ISI को लीक कर रहा था डेटा
DRDO Guest House Manager Pakistani Spy: जैसलमेर में DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर महेंद्र प्रसाद को ISI के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
DRDO Guest House Manager
DRDO Guest House Manager Pakistani Spy: राजस्थान पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के जैसलमेर स्थित गेस्ट हाउस के मैनेजर महेंद्र प्रसाद को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वे सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान को भारत की गोपनीय और रणनीतिक जानकारी भेज रहे थे, जिससे देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
कैसे हुआ खुलासा?
राजस्थान की CID इंटेलिजेंस ने स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर राज्य में संभावित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर विशेष निगरानी शुरू की थी। इस दौरान पता चला कि महेंद्र प्रसाद पाकिस्तान के खुफिया अधिकारियों से संपर्क में है। वे DRDO वैज्ञानिकों और भारतीय सेना के अफसरों की गतिविधियों और मूवमेंट की जानकारी भेज रहे थे, जो चंदन फील्ड फायरिंग रेंज में मिसाइल और अन्य हथियारों के परीक्षण के लिए आते हैं।
गिरफ्तारी और जांच
इस खुलासे के बाद मंगलवार, 12 अगस्त को राजस्थान की CID इंटेलिजेंस ने महेंद्र प्रसाद को जैसलमेर से गिरफ्तार कर लिया। महेंद्र प्रसाद उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के पल्यूं गांव के रहने वाले हैं। वो DRDO गेस्ट हाउस में संविदा मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें केंद्रीय पूछताछ केंद्र जयपुर ले जाया गया, जहां कई खुफिया एजेंसियों ने उनसे संयुक्त पूछताछ की। पुलिस ने उनका मोबाइल फोन भी जांच के लिए भेजा दिया है।
कौन-कौन कर रहा है जांच?
इस मामले में फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कितनी गोपनीय जानकारी लीक हुई है। और इसमें कौन-कौन शामिल हो सकता है। साथ ही एजेंसियां यह भी पता कर रही है कि क्या जानकारी का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी रणनीतिक योजना में किया गया है।
क्या हुई कानूनी कार्रवाई?
पुलिस ने महेंद्र प्रसाद के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आज, बुधवार को महेंद्र को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा ताकि आगे की गहन पूछताछ हो सके। इस मामले के सामने आने के बाद देश की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं एक बार फिर उजागर हो गई है। DRDO जैसी संवेदनशील संस्था से जुड़ा कर्मचारी अगर जासूसी में शामिल पाया जाता है, तो यह न सिर्फ खुफिया तंत्र के लिए चुनौती है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा जांच और निगरानी कितनी प्रभावी है।


