कहीं रावण के सिर पर राहुल-अखिलेश के चेहरे, कहीं जलेगी शूर्पणखा!… दशहरे पर ये कैसी सियासत?

Dussehra 2026: दशहरे पर लखनऊ में रावण के सिर पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव के चेहरे वाले पोस्टर चर्चा में हैं। इंदौर में शूर्पणखा दहन, दिल्ली में कॉकरोच का पुतला और 221 फीट के रावण समेत जानिए अनोखे आयोजनों की पूरी कहानी।

Shalni Kumari
Published on: 20 Oct 2026 2:51 PM IST
Rahul Gandhi Ravana Poster
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 Unique Dussehra Celebrations

Dussehra 2026: दशहरे (Dussehra) पर हर साल रावण दहन (Ravana Dahan) के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन इस बार कई शहरों में इस परंपरा को अलग-अलग अंदाज में पेश किया जा रहा है। कहीं रावण के दस सिरों पर राजनीतिक नेताओं और चर्चित हस्तियों के चेहरे लगाकर विवाद खड़ा किया गया, तो कहीं रावण के बजाय उसकी बहन शूर्पणखा का पुतला जलाने की तैयारी हुई। इंदौर में नीले ड्रम हत्याकांड से जुड़ी मुस्कान समेत चर्चित महिला अपराध मामलों को प्रतीकात्मक रूप से दिखाने के लिए शूर्पणखा दहन का आयोजन रखा गया है। वहीं, दिल्ली में रावण के साथ 30 फीट के कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना चर्चा में रही। इन आयोजनों ने दशहरे के पारंपरिक स्वरूप के साथ राजनीतिक विरोध, अपराध और सामाजिक संदेशों को भी जोड़ दिया है।

यूपी में रावण के दस सिरों पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव के चेहरे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दशहरे से पहले लगाए गए विवादित पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। ‘सनातन भारत के विरोधी रावण’ शीर्षक वाले इन पोस्टरों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी समेत कई लोगों के चेहरे रावण के दस सिरों के साथ दिखाए गए। पोस्टरों में अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क, अमेरिकी सांसद इल्हान उमर, जॉर्ज सोरोस, बांग्लादेश के मोहम्मद यूनुस और अधिवक्ता प्रशांत भूषण की तस्वीरें भी शामिल थीं। ये पोस्टर सनातन रक्षा संगठन की ओर से लगाए जाने की बात सामने आई।

पोस्टरों में इन हस्तियों को रावण के प्रतीक के साथ जोड़ने के पीछे आयोजकों की ओर से राजनीतिक और वैचारिक आरोपों का संदेश दिया गया। हालांकि, पोस्टर पर लगाए गए आरोप संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ साबित हुए तथ्य नहीं माने जा सकते। पोस्टर सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया और इन्हें हटवाया। 20 अक्टूबर को राहुल गांधी को रावण के रूप में दिखाने वाले पोस्टर को लेकर कांग्रेस की ओर से शिकायत किए जाने की भी खबर आई। इस घटनाक्रम ने दशहरे के प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल और विरोधियों को निशाना बनाने के तरीके पर बहस छेड़ दी।

इंदौर में रावण नहीं, शूर्पणखा का होगा दहन; नीले ड्रम वाली मुस्कान का भी जिक्र

मध्य प्रदेश के इंदौर में इस बार दशहरे पर पारंपरिक रावण दहन के साथ एक अलग आयोजन रखा गया है। संस्था ‘पौरुष’ ने 20 अक्टूबर को शूर्पणखा का पुतला जलाने का ऐलान किया है। आयोजन में पांच चर्चित महिला अपराध मामलों को प्रतीकात्मक रूप से दिखाने की बात कही गई है। इनमें मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड से जुड़ी मुस्कान का नाम भी शामिल है। इस मामले में शव को नीले ड्रम में छिपाने की घटना ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। आयोजकों ने दूसरे गंभीर अपराध मामलों से जुड़ी महिलाओं को भी शूर्पणखा के प्रतीक से जोड़ने की बात कही है।

आयोजक अशोक दशोरा के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिए गंभीर अपराधों में सजा और उसके अमल को लेकर सवाल उठाना उद्देश्य है। आयोजन में एक ऐसे मामले का भी संदर्भ दिया गया है, जिसमें कथित तौर पर सांप से कटवाकर हत्या कराने का आरोप महिला पर लगा था। संस्था इसे अपराध और न्याय व्यवस्था से जुड़ी बहस के तौर पर पेश कर रही है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका और दोष का निर्धारण संबंधित मामले की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए। शूर्पणखा दहन की यह पहल इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि दशहरे पर आमतौर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।

दिल्ली में रावण के साथ 30 फीट के कॉकरोच का पुतला

दिल्ली में दशहरे के आयोजन को एक अलग सामाजिक संदेश से जोड़ने की तैयारी की गई। पितमपुरा की श्री केशव रामलीला समिति ने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना बनाई। आयोजकों के मुताबिक, कॉकरोच को गंदगी और अस्वच्छता का प्रतीक मानकर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि समाज और आसपास के वातावरण को साफ रखना भी जरूरी है। इस पहल को स्वच्छता के संदेश से जोड़ा गया।

तकनीक के सहारे रावण के पुतलों को दिया गया नया रूप

कई शहरों में रावण दहन के आयोजन को आकर्षक बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। राजस्थान के कोटा में 360 डिग्री तक गर्दन घुमाने वाले रावण के पुतले की चर्चा रही, जबकि अलवर में रिमोट से दहन की व्यवस्था और हाव-भाव दिखाने वाले पुतले की तैयारी की गई। जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में भी बड़े पुतलों और रोशनी के विशेष इंतजामों के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई। इन आयोजनों में परंपरा को आधुनिक तकनीक के जरिए दर्शकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने की कोशिश की गई।

पंचकूला में 221 फीट का रावण, लाखों रुपये की लागत

हरियाणा के पंचकूला में 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले को भी दशहरे के प्रमुख आकर्षणों में शामिल किया गया। शालीमार ग्राउंड में तैयार किए गए इस विशाल पुतले पर आयोजकों के मुताबिक करीब 34 से 35 लाख रुपये खर्च हुए। इतने बड़े आयोजन के लिए दर्शकों की सुरक्षा, बैरिकेडिंग और आतिशबाजी से जुड़े इंतजामों पर भी ध्यान दिया गया। इस तरह कुछ जगहों पर भव्यता और तकनीक ने दशहरे के आयोजन को खास बनाया, जबकि दूसरी जगहों पर राजनीतिक और सामाजिक संदेश प्रमुख रहे।

दशहरे के बदलते स्वरूप में परंपरा के साथ विरोध भी

इस बार के आयोजनों में रावण दहन सिर्फ पौराणिक कथा के एक प्रसंग तक सीमित नहीं दिखा। लखनऊ में राजनीतिक हस्तियों के चेहरों वाले पोस्टर, इंदौर में शूर्पणखा दहन और दिल्ली में कॉकरोच का पुतला-इन सभी उदाहरणों में आयोजकों ने पारंपरिक प्रतीकों को समकालीन मुद्दों से जोड़ने की कोशिश की। हालांकि, इन पहलों को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है। दशहरे का मूल संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है, लेकिन इस बार के आयोजन यह भी दिखाते हैं कि धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध, सामाजिक मुद्दों और सार्वजनिक बहस के लिए किस तरह किया जा रहा है।

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