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DUSU चुनाव में Gen-Z ने दिया बड़ा सियासी संकेत? समझिए बड़े नेताओं की बधाई में छिपा इशारा
DUSU Results Gen-Z Mood: DUSU Election Results 2026 में ABVP ने चार में से तीन प्रमुख पद जीते, जबकि निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर बड़ी जीत दर्ज की। अमित शाह और नितिन नवीन की बधाई के बीच Gen-Z के वोटिंग पैटर्न और NOTA के आंकड़ों ने छात्र राजनीति को लेकर कई संकेत दिए।
DUSU Results Gen-Z Mood: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 के आए नतीजों ने राजधानी से लेकर देश की राष्ट्रीय राजनीति तक में एक नया संदेश दिया है। जंतर-मंतर पर हुए बड़े छात्र प्रदर्शनों, नीट (NEET) पेपर लीक और सत्य निकेतन जैसी हालिया घटनाओं के बाद इस चुनाव को केवल कैंपस की राजनीति नहीं, बल्कि देश के युवा यानी 'Gen-Z' के असली मूड का लिटमस टेस्ट माना जा रहा था। इन नतीजों ने जहां एक तरफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रति युवाओं का भरोसा फिर से कायम किया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और पूरे विपक्ष की छात्र राजनीति को तगड़ा झटका दिया है। नतीजे सामने आते ही गृहमंत्री अमित शाह से लेकर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन तक ने विजेताओं को बधाई दी।
ABVP का तीन पदों पर दबदबा
डूसू चुनाव के आए परिणामों में ABVP ने चार में से तीन मुख्य पदों पर शानदार जीत दर्ज की है। ABVP के यश डबास दिल्ली विश्वविद्यालय के नए अध्यक्ष चुने गए हैं, जबकि रिया छावड़ी को सचिव और लक्ष्यराज सिंह को संयुक्त सचिव पद पर कामयाबी मिली है। हालांकि, सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला, जहां निर्दलीय प्रत्याशी दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से ऐतिहासिक जीत हासिल की। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का इस बार का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा और उसके खाते में एक भी पद नहीं आया। इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि बाहर से बनाए गए किसी भी राजनीतिक नेरेटिव से प्रभावित होने के बजाय Gen-Z अपने विवेक के आधार पर वोट देता है।
अमित शाह और नितिन नवीन ने दी बधाई
ABVP की इस बड़ी जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने नवनिर्वाचित छात्र नेताओं को शुभकामनाएं दीं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं है, बल्कि यहां देश के हर कोने से आने वाले विद्यार्थियों का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है। शाह ने कहा कि ABVP की यह जीत उन राष्ट्रविरोधी ताकतों के लिए स्पष्ट संदेश है जो युवा शक्ति को अपने एजेंडे की प्रयोगशाला बनाना चाहते थे। आज का युवा राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़ा है। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी इस शानदार कामयाबी को Gen-Z के नए मूड की जीत बताया।
विपक्ष की राजनीति को करारा झटका
यह चुनाव परिणाम कांग्रेस और उसके छात्र संगठन NSUI के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हुए हैं। राहुल गांधी द्वारा युवाओं के मुद्दे उठाने के बावजूद NSUI युवाओं के गुस्से को अपने पक्ष में मोड़ने में नाकाम रही। संगठन के भीतर की गुटबाजी और टिकट वितरण की खामी पार्टी के पतन की वजह बनी। अंतिम समय में NSUI के पूर्व सदस्य दीपांशु शौकीन का टिकट काटना संगठन की भारी भूल साबित हुई। दीपांशु ने निर्दलीय मैदान में उतरकर उपाध्यक्ष पद पर जिस तरह से 30 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, उसने साबित कर दिया कि युवा उम्मीदवार की काबिलियत और उसके काम को देखकर वोट दे रहे हैं, न कि पार्टी के सिंबल को देखकर।
नोटा (NOTA) की चोट ने दिए बड़े संकेत
इस चुनाव का एक और सबसे चौंकाने वाला पहलू 'नोटा' को मिले हजारों वोट रहे। जहां युवाओं ने ABVP पर भरोसा दिखाया, वहीं मुख्यधारा की राजनीति से नाराजगी जताते हुए हजारों छात्रों ने नोटा का बटन दबाया। अध्यक्ष पद पर 4,310, उपाध्यक्ष पर 4,359, सचिव पर 7,884 और सह-सचिव पद पर 7,389 छात्रों ने नोटा चुना। चारों पदों को मिलाकर कुल 23,942 बटन नोटा के पक्ष में दबे। यह आंकड़ा साफ संदेश देता है कि कैंपस का एक बहुत बड़ा वर्ग दोनों प्रमुख छात्र संगठनों की पारंपरिक राजनीति और वादों से पूरी तरह असंतुष्ट है।
रील्स और मीम्स से आगे बढ़कर Gen-Z ने दिखाया अपना विवेक
DUSU चुनाव 2026 ने यह भी साबित कर दिया कि Gen-Z को सिर्फ रील्स, मीम्स या एआई आधारित अभियानों से बहकाया नहीं जा सकता। युवाओं ने चुनावी दौर में बहुत परिपक्वता दिखाई। नवनिर्वाचित अध्यक्ष यश डबास ने जीत के बाद कहा कि देश का युवा विकास और राष्ट्र निर्माण के साथ है। इन परिणामों ने स्पष्ट कर दिया है कि आज का युवा वोटर अब खोखले नारों के बजाय जमीनी प्रभाव और सही उम्मीदवार को चुनना पसंद करता है।


