सुप्रीम कोर्ट में ECI का हलफनामा: SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से, अब राहुल गांधी क्या करेंगे?

SIR विवाद पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि सभी तीन आदेश सर्वसम्मति से पारित हुए। फॉर्म-6 में ECI के बदलाव से इनकार के बाद अब देखना होगा कि राहुल गांधी का अगला कदम क्या होगा?

Alakha Singh
Published on: 26 Oct 2026 10:35 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में ECI का हलफनामा: SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से, अब राहुल गांधी क्या करेंगे?
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नई दिल्ली: वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक अहम हलफनामा दाखिल किया गया है। चुनाव आयोग ने दावा किया है कि SIR लागू करने से जुड़े सभी तीन आदेश आयोग के तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से पारित हुए थे। आयोग ने फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि न तो कानून बदला गया और न ही मतदाता पंजीकरण के निर्धारित फॉर्म में कोई संशोधन किया गया।

यह हलफनामा ऐसे समय में आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध तेज है। राहुल गांधी और कांग्रेस पहले ही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में अब बड़ा सवाल है कि क्या चुनाव आयोग के इस दावे के बाद विपक्ष अपने हमले की रणनीति बदलेगा या ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और तेज होगी?

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का दावा, तीनों सदस्य फैसलों पर सहमत

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा कि SIR से संबंधित 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। आयोग के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे को भी तीनों सदस्यों की मंजूरी प्राप्त है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और संबंधित नियमों के तहत शुरू की गई। उसने याचिकाकर्ताओं के उन आरोपों को गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि आयोग के महत्वपूर्ण फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए।

इस दावे के जरिए चुनाव आयोग ने उन आरोपों का सीधा जवाब देने की कोशिश की है, जिन्होंने पिछले कुछ महीनों में उसकी आंतरिक कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा किया है।

फॉर्म-6 में बदलाव के आरोप पर आयोग की सफाई

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोपों को भी खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR के दौरान इस्तेमाल किया गया घोषणा-पत्र वैधानिक फॉर्म-6 का हिस्सा नहीं, बल्कि उससे अलग दस्तावेज है।

आयोग के मुताबिक, इस घोषणा-पत्र का उद्देश्य आवेदकों की पात्रता का सत्यापन करना और उनके विवरण को पिछली गहन पुनरीक्षण प्रक्रियाओं के दौरान तैयार मतदाता सूचियों से जोड़ना है। बाद के चरणों में इसके प्रारूप में बदलाव इसलिए किया गया, ताकि आवेदक अपने या अपने रिश्तेदारों के पुराने मतदाता रिकॉर्ड का विवरण देकर प्रक्रिया को आसान बना सकें।

हलफनामे के अनुसार, जिन आवेदकों का विवरण पिछली मतदाता सूचियों से जुड़ जाएगा, वे घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-6 जमा कर सकेंगे। जिनके रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो पाएगा या जो पुराने विवरण उपलब्ध नहीं करा सकेंगे, उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार सहायक दस्तावेज देने होंगे।

आयोग ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो पाया है या जिनके विवरण में विसंगतियां हैं, उनकी सहायता के लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को घर जाकर दस्तावेज एकत्र करने की सुविधा दी गई है। इन दस्तावेजों को संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के विचार के लिए अपलोड किया जाएगा।

14 बार आपत्ति की रिपोर्ट से कैसे बढ़ा विवाद?

SIR को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया, जब द इंडियन एक्सप्रेस ने 25 सितंबर को अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े उन फैसलों और आदेशों से था, जिन्हें दोनों आयुक्तों ने अपनी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए जाने पर सवाल उठाया था।

इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया। विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठाई। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां आयोग ने अपने हलफनामे में सभी संबंधित आदेशों को सर्वसम्मति से पारित बताया है।

हालांकि, आयोग का दावा और दोनों चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट के बीच उठे सवालों का अंतिम जवाब न्यायिक जांच के बाद ही सामने आएगा।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुका है सख्त संकेत

इस मामले में 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह चुनाव आयोग के फैसलों की जांच करेगा और जो निर्णय कानून के अनुरूप नहीं पाए जाएंगे, उन्हें रद्द किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किए थे।

आयोग ने अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम चुनाव आयोग मामले के फैसले का भी हवाला दिया। आयोग के मुताबिक, इस फैसले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान दस्तावेजों से संबंधित व्यवस्था निर्धारित करने के उसके अधिकार को मान्यता दी गई थी।

आयोग ने अदालत से याचिकाकर्ताओं के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज करने की मांग की है। साथ ही कहा कि SIR पूरा होने के बाद भी पात्र नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की नियमित प्रक्रिया जारी रहेगी।

अब राहुल गांधी का अगला कदम क्या होगा?

चुनाव आयोग के हलफनामे ने राहुल गांधी और विपक्ष के सामने एक अहम राजनीतिक और कानूनी चुनौती खड़ी कर दी है। आयोग अब अपने फैसलों को सर्वसम्मति से पारित बता रहा है, जबकि विवाद की शुरुआत ही इस सवाल से हुई थी कि क्या SIR से जुड़े कुछ फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी और सहमति के बिना लिए गए थे।

अब राहुल गांधी और कांग्रेस के सामने तीन प्रमुख रास्ते हैं। पहला, सुप्रीम कोर्ट में आयोग के दावों और उपलब्ध रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच की मांग को आगे बढ़ाना। दूसरा, दोनों चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों और आयोग के सर्वसम्मति वाले दावे के बीच अंतर को राजनीतिक मुद्दा बनाना। तीसरा, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को विपक्षी दलों के साझा अभियान से जोड़ना।

हालांकि, राहुल गांधी का अगला कदम क्या होगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। चुनाव आयोग के हलफनामे से यह भी तय नहीं होता कि सुप्रीम कोर्ट उसकी दलीलों को स्वीकार करेगा या नहीं।

अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हैं। असली सवाल केवल यह नहीं है कि SIR के आदेश सर्वसम्मति से पारित हुए थे या नहीं, बल्कि यह भी है कि पूरी प्रक्रिया कानून और मतदाताओं के अधिकारों के अनुरूप रही या नहीं। अदालत की जांच और उसके निष्कर्ष ही तय करेंगे कि चुनाव आयोग को राहत मिलती है या उसके फैसलों पर कानूनी सवाल और गहरे होते हैं।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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