भारत को हिलाने के लिए आया ₹141000000! विदेशी फंडिंग पर ED की पैनी नजर, जर्मनी से कनाडा तक नेटवर्क

ED करीब 14.1 करोड़ रुपये की संदिग्ध विदेशी फंडिंग की जांच कर रही है, जिसका नेटवर्क कई देशों से जुड़ा बताया जा रहा है।

Sachin Singh
Published on: 7 Nov 2026 4:33 PM IST (Updated on: 7 Nov 2026 4:37 PM IST)
भारत को हिलाने के लिए आया ₹141000000! विदेशी फंडिंग पर ED की पैनी नजर, जर्मनी से कनाडा तक नेटवर्क
X

ED Investigation Foreign Funding: भारत में विदेशी फंडिंग के जरिए घरेलू मामलों में दखल देने की कथित कोशिशों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की है। एजेंसी की नजर दो विदेशी कंपनियों और करीब 1.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 14.1 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन पर है। जांच एजेंसियों को शक है कि इस रकम को कई देशों के जरिए अलग-अलग रास्तों से भारत में कुछ संगठनों और लोगों तक पहुंचाया गया। फिलहाल ED यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा कहां से आया, किन कंपनियों के खातों से गुजरा और आखिर में इसका इस्तेमाल किसने किया।

जांच में सेंट किट्स एंड नेविस, लिथुआनिया, ब्रिटेन और कनाडा में रजिस्टर्ड कंपनियों के साथ जर्मनी के एक ट्रस्ट का नाम सामने आया है। एजेंसी को आशंका है कि पैसों के असली स्रोत और उनके लेन-देन की जानकारी छिपाने के लिए कई स्तरों पर ट्रांसफर किए गए। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।

जर्मनी के ट्रस्ट से शुरू हुआ 10 लाख डॉलर का ट्रांजैक्शन

ED की जांच के मुताबिक, सेंट किट्स एंड नेविस में रजिस्टर्ड TCC Digital Markets Ltd के जरिए 10 लाख डॉलर की फंडिंग का पता चला है। एजेंसी ने इस रकम के शुरुआती स्रोत के तौर पर जर्मनी के Dr Matthias Karl Vogt Trust की पहचान की है।

जांचकर्ताओं को शक है कि जर्मनी के इस ट्रस्ट ने पहले लिथुआनिया की कंपनी XBase Digital UAB को पैसा भेजा। ED इस बात की जांच कर रही है कि क्या जर्मनी से रकम को लिथुआनिया के रास्ते भेजने का मकसद वहां के कानूनों से बचना और पैसों की आवाजाही को छिपाना था।

दुबई और लिथुआनिया के रास्ते ब्रिटेन पहुंचा पैसा

जांच एजेंसी को संदेह है कि रकम को दुबई और लिथुआनिया के रास्ते आगे बढ़ाने के लिए हवाला नेटवर्क और डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद सेंट किट्स एंड नेविस की कंपनी ने ब्रिटेन में रजिस्टर्ड एक कंपनी को दो अलग-अलग किस्तों में ग्रांट के रूप में पैसा भेजा।

ED को कनाडा की कंपनी ZBase Digital Inc से जुड़ा एक और ट्रांजैक्शन भी मिला है। जांच के मुताबिक, फरवरी 2026 में इस कंपनी ने ब्रिटेन की उसी कंपनी के खाते में 5 लाख डॉलर ट्रांसफर किए थे।

इस तरह दोनों लेन-देन की कुल रकम 15 लाख डॉलर यानी करीब 14.1 करोड़ रुपये बताई जा रही है। भारतीय एजेंसियां इन ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी Airwallex से भी जांच के दायरे में लेकर सत्यापित कर रही हैं।

विदेशी फंडिंग के नियमों पर सरकार की सख्ती

यह जांच ऐसे समय में हो रही है, जब केंद्र सरकार विदेशी फंड लेने वाले संगठनों पर निगरानी और नियमों का पालन करने को लेकर सख्ती बढ़ा रही है। इसी साल सरकार ने Foreign Contribution (Regulation) Rules, 2011 में बदलाव किए थे। इन संशोधनों के बाद NGO और विदेशी योगदान लेने वाले दूसरे संगठनों के लिए नियमों का पालन करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

नए प्रावधानों के तहत विदेशी फंड लेने वाले संगठनों को यह साफ जानकारी देनी होगी कि वे किस काम के लिए पैसा लेना चाहते हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताना होगा कि रकम का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जाएगा और वे किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में काम करने की योजना बना रहे हैं।

नियमों में विदेशी फंडिंग से जुड़े उल्लंघनों पर लगने वाले जुर्माने में भी बदलाव किया गया है। इसका मकसद विदेशी योगदान के स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर ज्यादा पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

फिलहाल ED की जांच का मुख्य फोकस 14.1 करोड़ रुपये के कथित फंडिंग नेटवर्क, अलग-अलग देशों में हुए ट्रांसफर और भारत में रकम पाने वाले अंतिम लोगों या संगठनों की पहचान करना है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

Sachin Singh
ABOUT THE AUTHOR

Sachin Singh

Conetent Writer Mail ID - sachinsingh.alert@gmail.comsachinsingh.alert@gmail.com

Sachin Singh is a media professional with 4 years of experience in the field of journalism and digital media. After completing his education at Jamia Millia Islamia Central University, he has worked with reputed media organizations such as Editor ji, ABP News and Doordarshan. Currently, Sachin Singh is working as a Content Writer with News Track, where he contributes to fast-paced digital news coverage and content creation. His areas of interest include politics, national and international affairs, and food. With experience across different formats of journalism, he focuses on producing informative, accurate, and engaging content for digital audiences.

Next Story