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CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में पांच विषय अनिवार्य, कौशल विकास से मिलेगी राहत; जानें नए नियम
New Delhi: CBSE ने 2026-27 सत्र से नौवीं और 2027-28 से दसवीं के लिए नई व्यवस्था लागू की है। बोर्ड परीक्षा में पांच विषय अनिवार्य होंगे, जबकि कौशल विकास का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा।
फोटो-सोशल मीडिया
New Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों की पढ़ाई तथा बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नौवीं कक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थियों को अगले सत्र 2027-28 में दसवीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पांच अनिवार्य विषयों पर ध्यान देना होगा। इनमें दो भाषाएं, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। हालांकि विद्यार्थियों को विद्यालय में अन्य पाठ्यचर्या विषयों की पढ़ाई भी करनी होगी, लेकिन उन सभी में बोर्ड परीक्षा देना अनिवार्य नहीं होगा। बोर्ड ने व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत कौशल विकास तथा 22 निर्धारित कौशल विषयों में से एक चुनने का विकल्प भी दिया है। कौशल विकास का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर किया जाएगा, जबकि किसी निर्धारित कौशल विषय का चुनाव करने वाले विद्यार्थियों को दसवीं में उसकी बोर्ड परीक्षा देनी होगी। सीबीएसई ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को सभी संबद्ध विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रमुखों को भेजे परिपत्र में यह व्यवस्था स्पष्ट की है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य नए पाठ्यक्रम को लागू करने की प्रक्रिया में उत्पन्न भ्रम दूर करना और विद्यार्थियों पर अनावश्यक परीक्षा संबंधी दबाव कम करना है।
नए नियम से किसे मिलेगा लाभ, किस पर लागू नहीं होगा बदलाव?
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि नई अध्ययन योजना उन विद्यार्थियों पर लागू होगी जो इस समय, अर्थात शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नौवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। ये विद्यार्थी अप्रैल 2027 के आसपास दसवीं में प्रवेश करेंगे और वर्ष 2028 में उनकी बोर्ड परीक्षाएं होंगी। इसलिए नए नियम का वास्तविक प्रभाव 2028 की दसवीं बोर्ड परीक्षा में दिखाई देगा।
इसके विपरीत जो विद्यार्थी अभी दसवीं कक्षा में हैं और वर्ष 2027 में बोर्ड परीक्षा देने वाले हैं, उनके लिए पहले से निर्धारित अध्ययन और परीक्षा व्यवस्था जारी रहेगी। उनके विषयों तथा मूल्यांकन प्रणाली में इस नए परिपत्र के आधार पर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई अभिभावक नई घोषणा को 2027 में होने वाली बोर्ड परीक्षा से जोड़कर देख सकते हैं। सीबीएसई का परिपत्र स्पष्ट रूप से वर्तमान नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों और उनके अगले शैक्षणिक सत्र से संबंधित है।
पांच विषयों की बोर्ड परीक्षा, लेकिन पढ़ने होंगे नौ पाठ्यचर्या विषय
नई व्यवस्था के तहत दसवीं में दो भाषाएं, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान मुख्य बोर्ड परीक्षा विषय होंगे। विद्यार्थियों को इन पांच विषयों में निर्धारित परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि विद्यालय में केवल पांच विषय ही पढ़ाए जाएंगे। सीबीएसई की अध्ययन योजना में तीन भाषाएं, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण तथा व्यावसायिक शिक्षा मिलाकर नौ अनिवार्य पाठ्यचर्या क्षेत्र शामिल हैं।
इनमें पहली दो भाषाएं, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान मुख्य बोर्ड परीक्षा विषय होंगे। तीसरी भाषा, कला शिक्षा और शारीरिक शिक्षा जैसे पाठ्यचर्या क्षेत्रों का मूल्यांकन निर्धारित व्यवस्था के अनुसार विद्यालय स्तर पर होगा। व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत बोर्ड परीक्षा होगी या स्कूल आधारित मूल्यांकन, यह विद्यार्थी द्वारा चुने गए विकल्प पर निर्भर करेगा।
इस प्रकार विषयों की पढ़ाई समाप्त नहीं की गई है, बल्कि उनके मूल्यांकन की पद्धति अलग-अलग रखी गई है। बोर्ड के अनुसार इससे विद्यार्थियों को परीक्षा के अंक प्राप्त करने के दबाव से हटकर अन्य शैक्षिक गतिविधियों में भी भाग लेने का अवसर मिलेगा।
कौशल विकास चुनने पर स्कूल में ही मूल्यांकन, अलग बोर्ड परीक्षा नहीं
नए नियम में सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था व्यावसायिक शिक्षा से संबंधित है। बोर्ड ने इसे अनिवार्य पाठ्यचर्या क्षेत्र के रूप में बनाए रखा है।
विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा की अनिवार्यता पूरी करने के लिए दो रास्ते दिए गए हैं। पहला विकल्प 'कौशल विकास' विषय है। यदि कोई विद्यार्थी इसे चुनता है, तो उसका मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर होगा। उसे इस विषय में अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।
दूसरा विकल्प सीबीएसई के निर्धारित 22 कौशल विषयों में से किसी एक का चुनाव करना है। ऐसा करने वाले विद्यार्थी को दसवीं में संबंधित विषय की बोर्ड परीक्षा देनी होगी और उसके परिणाम का उल्लेख बोर्ड की अंकतालिका में होगा।
यहां एक महत्वपूर्ण बात है। कौशल विकास चुनने का अर्थ व्यावसायिक शिक्षा से छूट मिलना नहीं है। विद्यार्थी को संबंधित पाठ्यचर्या और विद्यालय आधारित मूल्यांकन में भाग लेना होगा। राहत केवल यह है कि उसके लिए अतिरिक्त बाहरी बोर्ड परीक्षा आवश्यक नहीं होगी।
आईटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बैंकिंग और डाटा साइंस समेत 22 कौशल विषय
सीबीएसई की सूची में ऐसे विषय शामिल हैं जिनका संबंध तकनीक, रोजगार, वित्तीय सेवाओं, उत्पादन और सेवा क्षेत्र से है। विद्यार्थी अपनी रुचि तथा विद्यालय में उपलब्ध विकल्पों के अनुसार इनमें से किसी एक का चुनाव कर सकेंगे।
बोर्ड द्वारा निर्धारित 22 कौशल विषय हैं—रिटेल, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, ऑटोमोटिव, वित्तीय बाजारों का परिचय, पर्यटन का परिचय, ब्यूटी एंड वेलनेस, कृषि, खाद्य उत्पादन, फ्रंट ऑफिस ऑपरेशंस, बैंकिंग एवं बीमा, विपणन एवं बिक्री, स्वास्थ्य देखभाल, परिधान, मल्टीमीडिया, मल्टी स्किल फाउंडेशन कोर्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शारीरिक गतिविधि प्रशिक्षक, डाटा साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर, फार्मास्यूटिकल और जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े विज्ञान के आधारभूत कौशल तथा डिजाइन थिंकिंग एवं इनोवेशन।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को व्यावसायिक क्षेत्रों से परिचित कराना और उन्हें केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखना है। हालांकि सभी विद्यालयों में प्रत्येक कौशल विषय उपलब्ध हो, यह आवश्यक नहीं है। विषय चुनने से पहले विद्यार्थियों को अपने विद्यालय से उपलब्ध पाठ्यक्रम, शिक्षण व्यवस्था और परीक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त करनी होगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता की पढ़ाई बंद नहीं, केवल अनिवार्य मॉड्यूल हटाया गया
सीबीएसई के फैसले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा तीन पाठ्यचर्या घटकों को फिलहाल हटाए जाने से संबंधित है। इनमें 'इंडिविजुअल्स इन सोसायटी', 'कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' के मॉड्यूल तथा 'एनवायरनमेंटल एजुकेशन' शामिल हैं।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए 'इंडिविजुअल्स इन सोसायटी' और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग तथा एआई के मॉड्यूल पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे। इसी समूह के विद्यार्थी जब अगले वर्ष दसवीं में पहुंचेंगे, तब पर्यावरण शिक्षा का संबंधित नया विषय भी उनके पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जाएगा।
सीबीएसई के अनुसार इन विषयों को लागू करने की निर्धारित समयसीमा और वास्तविक शैक्षणिक सत्र में तालमेल बैठाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। नए पाठ्यक्रम के कारण विद्यार्थियों के सामने नौ से दस विषयों की पढ़ाई और उनके मूल्यांकन को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। बोर्ड का उद्देश्य इस भ्रम को दूर करना है।
यहां स्पष्ट करना आवश्यक है कि एआई की पढ़ाई पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है। बोर्ड ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को 22 कौशल विषयों की सूची में बनाए रखा है। इसी तरह पर्यावरण से संबंधित विषयवस्तु का अन्य पाठ्यक्रमों में अध्ययन समाप्त होने का भी कोई निर्देश नहीं है। हटाए गए घटक विशेष पाठ्यक्रमों और निर्धारित विद्यार्थी समूह से संबंधित हैं।
गणित और विज्ञान में उन्नत स्तर के विकल्प भी उपलब्ध
सीबीएसई की प्रकाशित अध्ययन योजना में गणित तथा विज्ञान के उन्नत स्तर से संबंधित वैकल्पिक विषयों का भी प्रावधान है। इनका चुनाव करने वाले विद्यार्थियों के लिए बोर्ड परीक्षा संबंधी अलग व्यवस्था निर्धारित है।
इसके अतिरिक्त बोर्ड की सूची से अन्य वैकल्पिक विषय चुनने की सुविधा भी बनी रहेगी। इनकी परीक्षा और मूल्यांकन संबंधित विषय की प्रकृति तथा निर्धारित योजना के अनुसार होगा।
इसलिए पांच अनिवार्य बोर्ड परीक्षा विषयों की घोषणा को अधिकतम पांच परीक्षाओं की सीमा नहीं समझना चाहिए। किसी विद्यार्थी ने यदि अतिरिक्त कौशल विषय या अन्य ऐसा वैकल्पिक विषय लिया है जिसके लिए बोर्ड परीक्षा निर्धारित है, तो उसे पांच के अतिरिक्त परीक्षा भी देनी पड़ सकती है।
सीबीएसई ने विद्यालयों से कहा है कि वे विषय चयन के समय विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को पूरी जानकारी दें, ताकि पाठ्यक्रम तथा परीक्षा व्यवस्था को लेकर बाद में कोई भ्रम न रहे।
विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों के लिए अलग व्यवस्था
सीबीएसई ने विशेष शैक्षिक जरूरत वाले विद्यार्थियों के लिए भी विषयों के चयन में लचीलापन रखा है। सामान्य व्यवस्था में जहां दो भाषाएं अनिवार्य बोर्ड परीक्षा विषय हैं, वहीं निर्धारित श्रेणी के विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को एक अनिवार्य भाषा के साथ चार अन्य अनुमत विषय चुनने की सुविधा दी गई है।
इन विषयों में निर्धारित शर्तों के अनुसार कौशल विषय भी शामिल हो सकता है। इसका उद्देश्य विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकताओं और क्षमताओं के अनुरूप विषय चयन का अवसर देना है।
हालांकि ऐसी सुविधा संबंधित विद्यार्थी की मान्य श्रेणी और बोर्ड के नियमों के अनुसार लागू होगी। इसलिए विद्यालयों को विशेष जरूरत वाले विद्यार्थियों के विषयों और मूल्यांकन की व्यवस्था तय करते समय सीबीएसई के विस्तृत निर्देशों का पालन करना होगा।
पांच मुख्य विषयों में उत्तीर्ण होना आवश्यक, अतिरिक्त कौशल विषय के अलग नियम
दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पांच मुख्य विषयों के लिए सीबीएसई के निर्धारित उत्तीर्णता मानदंड लागू होंगे। बोर्ड के नियमों के अनुसार सामान्यतः प्रत्येक अनिवार्य परीक्षा विषय में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
अतिरिक्त कौशल विषय के संबंध में बोर्ड की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था में कुछ विशेष प्रावधान रहे हैं। उदाहरण के लिए निर्धारित शर्तों के अंतर्गत गणित, विज्ञान अथवा सामाजिक विज्ञान में असफल होने की स्थिति में उत्तीर्ण अतिरिक्त कौशल विषय के आधार पर परिणाम की गणना का प्रावधान है।
लेकिन नए विद्यार्थी समूह के लिए अंतिम परिणाम तैयार करते समय संबंधित सत्र की विस्तृत परीक्षा योजना और विषय प्रतिस्थापन के नियम लागू होंगे। इसलिए केवल कौशल विषय लेने से पांचों मुख्य विषयों के अध्ययन या परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त नहीं होती।
अभिभावकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि विद्यालय स्तर का आंतरिक मूल्यांकन और बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा दो अलग प्रक्रियाएं हैं। दोनों में विद्यार्थियों को निर्धारित शैक्षिक आवश्यकताएं पूरी करनी होंगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पढ़ाई और व्यावसायिक शिक्षा को जोड़ने का प्रयास
सीबीएसई के इन बदलावों की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, 2023 के अंतर्गत विद्यालयी शिक्षा में हो रहे परिवर्तन हैं।
नई व्यवस्था में भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसी बुनियादी शिक्षा के साथ कला, शारीरिक गतिविधियों और व्यावसायिक कौशल को भी महत्व दिया गया है।
इसके पीछे यह विचार है कि विद्यार्थियों का मूल्यांकन केवल लिखित बोर्ड परीक्षाओं के आधार पर न हो। उनकी रुचियों, व्यावहारिक क्षमताओं और अन्य शैक्षिक गतिविधियों के विकास के लिए भी स्थान बनाया जाए।
हालांकि इस व्यवस्था के सफल कार्यान्वयन के लिए विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षकों, उचित पाठ्य सामग्री और मूल्यांकन की स्पष्ट प्रक्रिया की आवश्यकता होगी। विशेष रूप से कौशल विषयों के लिए सभी विद्यालयों की संसाधन क्षमता समान नहीं है।
इसलिए आगामी शैक्षणिक सत्र में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न विद्यालय विद्यार्थियों को कितने कौशल विषय उपलब्ध कराते हैं और आंतरिक मूल्यांकन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था अपनाते हैं।
दिसंबर से दसवीं की नई किताबें उपलब्ध कराने की तैयारी
सीबीएसई के अध्ययन संबंधी बदलावों के साथ राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी भी दसवीं की नई पाठ्यपुस्तकों को समय से पहले उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।
एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार दसवीं के दस विषयों के नए पाठ्यक्रम 15 नवंबर 2026 तक सीबीएसई को भेजने और वेबसाइट पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके बाद नई पाठ्यपुस्तकों को दिसंबर 2026 से उपलब्ध कराने की योजना है। यदि यह समयसीमा पूरी होती है तो विद्यार्थियों, शिक्षकों और विद्यालयों को अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र से लगभग तीन महीने पहले नई पुस्तकों का अध्ययन करने का अवसर मिल सकेगा।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि नए पाठ्यक्रम लागू होने पर पुस्तकों की देरी से उपलब्धता के कारण विद्यालयों और अभिभावकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अग्रिम उपलब्धता से शिक्षकों को पाठ्यक्रम की तैयारी, अध्यापन योजना और विद्यार्थियों के लिए अध्ययन सामग्री व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि 15 नवंबर तक पाठ्यक्रम भेजने और दिसंबर से पुस्तकें उपलब्ध कराने की समयसीमा फिलहाल घोषित तैयारी के रूप में सामने आई है। एनसीईआरटी की ओर से इन तारीखों को सुनिश्चित करने वाला स्वतंत्र आधिकारिक आदेश उपलब्ध नहीं मिला है। इसलिए पुस्तकों के वास्तविक प्रकाशन और बाजार में उपलब्धता की पुष्टि अलग से आवश्यक होगी।
विद्यालयों और अभिभावकों को अभी क्या समझना जरूरी है?
सीबीएसई के नए परिपत्र से यह स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों की दसवीं की पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन होंगे। लेकिन इन बदलावों का अर्थ सभी अतिरिक्त विषयों को समाप्त करना नहीं है।
विद्यार्थियों को पांच मुख्य बोर्ड परीक्षा विषयों के साथ तीसरी भाषा, कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा जैसे अन्य पाठ्यचर्या क्षेत्रों में भी निर्धारित अध्ययन करना होगा। अंतर केवल इनके मूल्यांकन के तरीके में है।
इसलिए विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार कौशल विषय चुनने के साथ यह भी देखना चाहिए कि उसमें बोर्ड परीक्षा देनी होगी या स्कूल स्तर पर मूल्यांकन होगा। विद्यालयों की जिम्मेदारी होगी कि वे परीक्षा के विषयों, अतिरिक्त विकल्पों और नई पुस्तकों से संबंधित जानकारी समय रहते उपलब्ध कराएं।
सीबीएसई ने 29 अक्टूबर के परिपत्र के माध्यम से यह संदेश दिया है कि नए पाठ्यक्रम की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें अनावश्यक परीक्षा दबाव कम हो, लेकिन विद्यार्थियों की शिक्षा केवल पांच विषयों तक सीमित न रह जाए।
नई व्यवस्था का सार यही है कि वर्ष 2028 की दसवीं बोर्ड परीक्षा में पांच मुख्य विषय अनिवार्य रहेंगे, जबकि कौशल शिक्षा और अन्य पाठ्यचर्या क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मूल्यांकन व्यवस्था होगी। इससे बोर्ड परीक्षाओं का दबाव कम करने के साथ विद्यार्थियों को विविध विषयों का अध्ययन जारी रखने का अवसर देने का प्रयास किया गया है।


