Eknath Shinde: NDA के 'पावर प्लेयर' बने एकनाथ शिंदे! 6 बागी सांसदों की एंट्री से दिल्ली में बढ़ी ताकत, BJP भी सन्न

Eknath Shinde Politics: उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT में बढ़ती बगावत से एकनाथ शिंदे की ताकत बढ़ती दिख रही है। छह सांसदों की एंट्री से NDA का गणित बदलेगा और महाराष्ट्र की सियासत में नया समीकरण बनेगा।

Harsh Srivastava
Published on: 18 Jun 2026 3:31 PM IST (Updated on: 18 Jun 2026 3:31 PM IST)
Eknath Shinde: NDA के पावर प्लेयर बने एकनाथ शिंदे! 6 बागी सांसदों की एंट्री से दिल्ली में बढ़ी ताकत, BJP भी सन्न
X

Eknath Shinde Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा भूचाल आ गया है और इस बार बगावत की बिसात मुंबई के बजाय देश की राजधानी दिल्ली में बिछी है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) का पूरी तरह बिखरना अब लगभग तय माना जा रहा है। इसका साफ इशारा तब मिला जब दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल की बैठक से पार्टी के 6 लोकसभा सांसद पूरी तरह नदारद रहे। इस नई बगावत ने मातोश्री के खेमे में हड़कंप मचा दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि इस पूरे ड्रामे का सबसे बड़ा फायदा सूबे के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को मिलने जा रहा है, जिन्होंने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से सबको चौंका दिया है।

देश की संसद में बढ़ेगी NDA की ताकत

इस सियासी उथल-पुथल का सीधा असर देश की संसद और केंद्र सरकार के समीकरणों पर पड़ने वाला है। लोकसभा में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA के पास फिलहाल 293 सांसदों का समर्थन है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के कुछ बागी सांसदों के समर्थन के बाद यह संख्या पहले ही 300 के पार पहुंचने की तैयारी में लगी हुई है। अब अगर उद्धव गुट के ये 6 सांसद पाला बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ आते हैं, तो इसका सीधा लाभ एनडीए को ही मिलेगा। ये सभी बागी सांसद शिंदे की पार्टी को अपना समर्थन देकर विपक्षी खेमे को कमजोर करने की पूरी योजना बना चुके हैं और बहुत जल्द इसका औपचारिक ऐलान भी कर सकते हैं।

डिप्टी सीएम से 'पावर प्लेयर' बनने की राह पर एकनाथ शिंदे

अगर हम पीछे देखें तो साल 2022 में जब एकनाथ शिंदे ने पहली बार विद्रोह किया था, तब बीजेपी की मदद से वे राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, साल 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद सूबे की सियासी तस्वीर बदली। उस चुनाव में बीजेपी को 132 सीटें मिलीं जबकि शिंदे की पार्टी को सिर्फ 57 सीटें मिलीं, जिसके चलते देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने और शिंदे को डिप्टी सीएम का पद संभालना पड़ा। वहीं लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी और उद्धव गुट को 9-9 सीटें मिली थीं और शिंदे सेना को सिर्फ 7 सीटें ही मिल पाई थीं। लेकिन अब इन छह नए सांसदों के आने से शिंदे की पार्टी के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी। इस तरह वे एनडीए के भीतर सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी, बीस सांसदों वाली नई एनसीपीआई और तेलुगु देशम पार्टी के बाद चौथे स्थान पर एक बेहद मजबूत ताकत बनकर उभरेंगे।

शिंदे का बड़ा मास्टरस्ट्रोक

इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि इस खेल में तुरंत और सीधा नुकसान तो उद्धव ठाकरे का ही होने वाला है, लेकिन इसका एक बहुत बड़ा दूरगामी असर भी दिखेगा। मुंबई यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ संजय पाटिल के अनुसार, संसद में सांसदों की संख्या बढ़ते ही महाराष्ट्र की बीजेपी लीडरशिप अब एकनाथ शिंदे को उस हल्के ढंग से नहीं देख पाएगी जैसे वे विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद देख रहे थे। पार्टी के नेताओं का भी कहना है कि जब लोगों ने मान लिया था कि शिंदे की राजनीति अब खत्म होने की कगार पर है, तब उन्होंने पासा पलटकर दिखा दिया कि वे हारी हुई बाजी को जीतना बखूबी जानते हैं। दिल्ली की इस बड़ी और रणनीतिक कामयाबी ने साबित कर दिया है कि शिंदे एनडीए के सबसे चतुर खिलाड़ियों में से एक हैं और उनके बिना सूबे की राजनीति अब अधूरी है।

Harsh Srivastava
ABOUT THE AUTHOR

Harsh Srivastava

Hi! I am Harsh Srivastava, currently working as a Content Writer and News Coordinator at Newstrack. I oversee content planning, coordination, and contribute with in-depth articles and news features, especially focusing on politics and crime. I started my journey in journalism in 2023 and have worked with leading publications such as Hindustan, Times of India, and India News, gaining experience across cities including Varanasi, Delhi and Lucknow. My work revolves around curating timely news, in- depth research, and delivering engaging content to keep readers informed and connected.

Next Story