12 अगस्त को पेश हो सकता है FCRA बिल, उससे पहले अमित शाह के सामने रखी गई ये बड़ी मांग

FCRA Amendment Bill 2026: एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर विवाद तेज हो गया है। 12 अगस्त को संसद में बिल लाए जाने की चर्चा के बीच चर्च प्रतिनिधिमंडल ने अमित शाह से मुलाकात कर बिल वापस लेने या संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने की मांग की है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 6 Aug 2026 10:42 PM IST
FCRA Amendment Bill 2026
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FCRA Amendment Bill 2026: विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill), 2026 को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच मिजोरम (Mizoram) के मुख्यमंत्री लालदुहोमा (Lalduhawma) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात के बाद कहा है कि यह विधेयक 12 अगस्त को संसद (Parliament) में पारित कराने के लिए लाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून इस तारीख से लागू नहीं होगा।

एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक को लेकर खासतौर पर ईसाई समुदाय (Christian Community) और गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के बीच चिंता बनी हुई है। इसी मुद्दे पर राज्यसभा सांसद पी. विल्सन (P. Wilson) के नेतृत्व में ईसाई धर्मगुरुओं (Christian Clergy) के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

चर्च प्रतिनिधियों ने रखी ये बड़ी मांग

गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। उन्होंने मांग की कि या तो इस विधेयक को वापस लिया जाए या फिर विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए।

प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इस विधेयक के कई प्रावधानों को लेकर ईसाई समुदाय और सामाजिक संस्थाओं में आशंकाएं बनी हुई हैं।

एक महीने में दूसरी बार हुई मुलाकात

यह पिछले एक महीने के भीतर दूसरा मौका है, जब कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है।

इससे पहले 10 जुलाई को भी सीबीसीआई (CBCI) ने गृह मंत्री को पत्र लिखकर एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक को वापस लेने और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद नया मसौदा तैयार करने की अपील की थी।

सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को ध्यान से सुना और उनकी चिंताओं को नोट किया। सरकार की ओर से भरोसा भी दिलाया गया कि इस कानून का ईसाई मिशनरियों (Christian Missionaries) और सामाजिक संगठनों (Social Groups) पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

मिजोरम के CM और चर्च नेताओं ने भी जताई चिंता

इससे पहले मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा (Lalduhawma), मिजोरम कोहरान ह्रुआइतु कमेटी (MKHC) के अध्यक्ष जॉन राल्डोसंगा (John Raldosanga) और काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम (CCM) के महासचिव लालहमांगईहा (Lalhmangaiha) ने भी अमित शाह को इस संबंध में एक मसौदा सौंपा था।

मुख्यमंत्री और चर्च प्रतिनिधियों ने मांग की कि इस कानून को पुरानी तारीख से लागू न किया जाए, बल्कि इसे आगे की तारीख से प्रभावी किया जाए।

लालदुहोमा ने कहा कि अगर कानून को पुरानी तारीख से लागू किया गया तो दशकों से संचालित स्कूल (Schools), अस्पताल (Hospitals), अनाथालय (Orphanages) और पुनर्वास केंद्र (Rehabilitation Centres) प्रभावित हो सकते हैं।

नए विधेयक में क्या है प्रावधान?

25 मार्च को लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill), 2026 में विदेशी फंड (Foreign Funding) से बनाई गई संपत्तियों पर निगरानी बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।

विधेयक के अनुसार यदि किसी संस्था का एफसीआरए (FCRA) लाइसेंस रद्द हो जाता है, संस्था स्वयं लाइसेंस सरेंडर कर देती है या उसका नवीनीकरण (Renewal) नहीं होता है, तो उसकी विदेशी फंडिंग और उससे बनाई गई संपत्तियां सरकार द्वारा नामित प्राधिकारी (Designated Authority) के अधीन चली जाएंगी।

इसी प्रावधान को लेकर विभिन्न ईसाई संगठनों और गैर सरकारी संस्थाओं ने अपनी चिंताएं जताई हैं और सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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