जोसेफ विजय सरकार पर लगा भ्रष्टाचार का पहला आरोप, ₹5.54 करोड़ के टेंडर पर BJP ने उठाए सवाल

Tamil Nadu CM Vijay के नए CMO को लेकर ₹5.54 करोड़ के टेंडर पर विवाद बढ़ गया है। BJP ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि TVK ने आरोपों को गलत बताया।

Alakha Singh
Published on: 19 Aug 2026 3:28 PM IST (Updated on: 19 Aug 2026 3:29 PM IST)
जोसेफ विजय सरकार पर लगा भ्रष्टाचार का पहला आरोप, ₹5.54 करोड़ के टेंडर पर BJP ने उठाए सवाल
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CM Vijay CMO Row: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार के 100 दिन पूरे होने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को नए भवन में शिफ्ट करने की योजना विवादों में घिर गई है। बीजेपी ने ₹5.54 करोड़ के टेंडर को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए काम शुरू होने और टेंडर जारी होने के समय के बीच कथित अंतर पर सवाल खड़े किए हैं। TVK ने इन आरोपों को खारिज किया है।

मुख्यमंत्री विजय ने फोर्ट सेंट जॉर्ज स्थित मौजूदा मुख्यमंत्री कार्यालय को उसी सचिवालय परिसर में मौजूद नामक्कल कविग्नर मालिगई की 10वीं मंजिल पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई है। सरकार का कहना है कि नए स्थान पर मुख्यमंत्री के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी और यह कदम प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

₹5.54 करोड़ के टेंडर पर क्यों मचा हंगामा?

तमिलनाडु लोक निर्माण विभाग (PWD) ने नामक्कल कविग्नर मालिगई की 10वीं मंजिल पर प्रस्तावित नए मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए कुल ₹5.54 करोड़ का टेंडर जारी किया है। तमिल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक काम को तीन हिस्सों में बांटा गया है—पहले ब्लॉक के लिए करीब ₹2.41 करोड़, दूसरे के लिए ₹2.01 करोड़ और तीसरे के लिए ₹1.12 करोड़। काम पूरा करने के लिए ठेकेदार को अनुबंध अंतिम होने के बाद तीन महीने की समयसीमा दी गई है।

यही टाइमलाइन अब राजनीतिक विवाद की वजह बन गई है।

बीजेपी के डिजिटल लाइब्रेरी एंड डॉक्यूमेंटेशन के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. असीर आचार्य ने आरोप लगाया कि नए CMO के लिए रेनोवेशन का काम टेंडर जारी होने से पहले ही शुरू हो गया था। उनका सवाल है कि अगर PWD के इंजीनियरों की निगरानी में पहले से काम चल रहा था तो बाद में ₹5.54 करोड़ का टेंडर क्यों जारी किया गया।

आचार्य ने इसे सरकार की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन के दावों से जोड़ते हुए विजय सरकार से जवाब मांगा।

BJP का सीधा सवाल: पहले काम या पहले टेंडर?

बीजेपी का मुख्य आरोप टेंडर प्रक्रिया के क्रम को लेकर है। पार्टी का कहना है कि अगर निर्माण या रेनोवेशन गतिविधियां पहले से चल रही थीं और टेंडर बाद में जारी हुआ, तो पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, इन आरोपों को अभी भ्रष्टाचार साबित होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विवाद फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों तक सीमित है।


TVK ने आरोपों को किया खारिज

मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK ने बीजेपी के आरोपों को गलत बताया है। TVK महासचिव और तमिलनाडु के PWD मंत्री आधव अर्जुन ने कहा है कि टेंडर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

अर्जुन ने यह भी स्पष्ट किया कि नए CMO का निर्माण मुख्यमंत्री की किसी निजी सुविधा या व्यक्तिगत विलासिता के लिए नहीं किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि नए कार्यालय में मुख्यमंत्री के साथ काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी।

तमिल मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने नए कार्यालय के लिए 10वीं मंजिल को चिन्हित किया है और यहां मुख्यमंत्री कक्ष, निजी सचिवों के कार्यालय तथा बैठक जैसी प्रशासनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

क्या यह विजय सरकार का पहला भ्रष्टाचार विवाद है?

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। मौजूदा ₹5.54 करोड़ CMO टेंडर विवाद को सीधे तौर पर “TVK सरकार का पहला भ्रष्टाचार आरोप” कहना पूरी तरह सटीक नहीं है।

मई 2026 में भी विजय सरकार एक सरकारी टेंडर को लेकर विपक्ष के निशाने पर आई थी। कांचीपुरम में 30,000 लीटर क्षमता वाले ओवरहेड वॉटर टैंक के लिए करीब ₹16.83 लाख का टेंडर जारी हुआ था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि बोली लगाने के लिए केवल करीब छह घंटे का समय दिया गया। विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने वह टेंडर रद्द कर दिया था।

इसलिए मौजूदा मामला TVK सरकार के पहले बड़े राजनीतिक भ्रष्टाचार आरोपों में से एक कहा जा सकता है, लेकिन इसे पहला विवाद कहना तथ्यात्मक रूप से ज्यादा सुरक्षित है।

विजय के लिए क्यों अहम है यह विवाद?

विजय सरकार की राजनीति का बड़ा आधार पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का दावा रहा है। मुख्यमंत्री ने सत्ता संभालने के शुरुआती दिनों में सरकारी वित्तीय स्थिति पर व्हाइट पेपर लाने और प्रशासन में पारदर्शिता पर जोर देने की बात कही थी।

ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय को शिफ्ट करने पर ₹5.54 करोड़ का टेंडर राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

विपक्ष अब सरकार से तीन सवालों का जवाब चाहता है: काम कब शुरू हुआ, टेंडर कब जारी हुआ और टेंडर से पहले काम किस प्रशासनिक मंजूरी के तहत किया गया?

दूसरी ओर, TVK का कहना है कि विपक्ष के आरोपों में तथ्य नहीं हैं और टेंडर प्रक्रिया नियमों के मुताबिक आगे बढ़ रही है।

फिलहाल इस मामले में किसी भ्रष्टाचार की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए असली सवाल अब यही है कि सरकार टेंडर की पूरी प्रक्रिया, काम शुरू होने की तारीख और प्रशासनिक मंजूरियों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करती है या नहीं।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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