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Form 6 पर घमासान! सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद EC की सफाई, राहुल गांधी के दावे को बताया गलत
Form 6 Row: सुप्रीम कोर्ट की Form 6 विवाद पर टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने सफाई दी है। EC ने राहुल गांधी के दावे को गलत बताया और कहा कि Form 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ, सिर्फ घोषणा-पत्र जोड़ा गया।
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Form 6 Row: विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) के दौरान फॉर्म 6 (Form 6) में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच विवाद अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की टिप्पणी के बाद एक बार फिर चर्चा में है। चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 में बदलाव किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि उसने मूल फॉर्म 6 में एक कॉमा या पूर्ण विराम तक नहीं बदला है। आयोग के मुताबिक, एसआईआर के दौरान फॉर्म 6 के साथ सिर्फ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र यानी डिक्लेरेशन (Declaration) जोड़ा गया था।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के एक ट्वीट का फैक्टचेक (Fact Check) करते हुए उनके फॉर्म 6 से जुड़े दावे को गलत बताया है। आयोग का कहना है कि राहुल गांधी की पोस्ट में दिया गया बयान गुमराह करने वाला है। वहीं, राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद दावा किया कि अब यह साबित हो चुका है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) ने गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया।
ऐसे में पूरा विवाद इस सवाल के इर्द-गिर्द है कि आखिर फॉर्म 6 में बदलाव हुआ था या उसके साथ केवल अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।
EC ने कहा, Form 6 में कोई बदलाव नहीं
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने साफ किया है कि एसआईआर के दौरान मूल फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया। आयोग के मुताबिक, फॉर्म 6 में एक कॉमा या पूर्ण विराम तक नहीं बदला गया है। इसके साथ सिर्फ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।
फॉर्म 6 वह आवेदन है, जिसके जरिए कोई योग्य व्यक्ति मतदाता सूची (Voter List) में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करता है। आयोग का कहना है कि एसआईआर के दौरान इस फॉर्म के साथ जो घोषणा-पत्र जोड़ा गया, वह बिहार में बनाए गए एसआईआर प्रोटोकॉल (SIR Protocol) का हिस्सा था।
आयोग के अनुसार, बिहार में एसआईआर के दौरान इस प्रोटोकॉल को तैयार किया गया था और बाद में इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। आयोग का कहना है कि सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रोटोकॉल को चुनाव आयोग को मिली संवैधानिक शक्तियों (Constitutional Powers) के दायरे में माना था।
24 जून 2025 के आदेश का हवाला
चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर के लिए 24 जून 2025 को जारी आदेश का भी हवाला दिया है। आयोग के मुताबिक, यह आदेश चुनाव आयोग की सर्वसम्मति से मंजूरी के बाद जारी किया गया था।
ईसीआई (ECI) का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस आदेश को सही ठहराया है। आयोग ने अपने 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट नंबर 120 के प्वाइंट 1(iii) का भी जिक्र किया है।
चुनाव आयोग के मुताबिक, इस प्रेस नोट में कहा गया था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ लगाया गया घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है।
यानी आयोग का पक्ष यह है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि बिहार एसआईआर आदेश के तहत उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र लगाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर (SIR) के दौरान अलग-अलग राज्यों में इस्तेमाल किए जा रहे फॉर्म 6 को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच ने फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी दिए जाने से इनकार किया।
बेंच ने कहा, “हमने फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। यह बात स्पष्ट होनी चाहिए, जब रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे, तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया है।” सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी ने गैरकानूनी काम किया है तो उसके नतीजे होंगे। यही टिप्पणी सामने आने के बाद फॉर्म 6 को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज हो गई।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद EC की सफाई
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के कुछ घंटों बाद चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के अधिकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है और आयोग ने भी फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया है।
अधिकारियों के मुताबिक, असल में फॉर्म 6 के साथ एक घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। यह घोषणा-पत्र बिहार एसआईआर के आदेश के तहत जोड़ा गया था और आयोग का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को सही ठहराया था।
आयोग ने फिर जोर देकर कहा कि फॉर्म 6 अपने मूल स्वरूप में ही रहा। उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया। सिर्फ उसके साथ अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फॉर्म 6 को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि अब यह बात बिना किसी शक के साबित हो चुकी है कि ज्ञानेश कुमार ने गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 में बदलाव किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह इस बात का एक और सबूत है कि ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी (BJP) की मदद करने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार और लोकतंत्र पर हुए इस कथित आपराधिक हमले में शामिल हर व्यक्ति को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।
हालांकि चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के इस दावे को फैक्टचेक करते हुए गलत बताया है। आयोग ने कहा कि उनकी पोस्ट में दिया गया बयान गुमराह करने वाला है।
BJP ने भी राहुल गांधी के दावे पर उठाए सवाल
फॉर्म 6 को लेकर बीजेपी नेता विनोद तावड़े (Vinod Tawde) ने भी राहुल गांधी के दावे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि राहुल गांधी को पहले तथ्य देख लेने चाहिए।
विनोद तावड़े ने कहा कि बिहार में एसआईआर का 24 जून 2025 का आदेश चुनाव आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इसे सही ठहराया है।
उन्होंने ईसीआई के 26 सितंबर 2026 के प्रेस नोट नंबर 120 के प्वाइंट 1(iii) का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक, इसमें साफ कहा गया है कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ लगाया गया घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है।
विनोद तावड़े ने कहा कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ, सिर्फ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र लगाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि जब इस पर सवाल उठे तो आयोग ने एसआईआर के बाहर के राज्यों में पुराना फॉर्म 6 बहाल कर दिया और इसे पारदर्शिता बताया।
उन्होंने राहुल गांधी के “अवैध” वाले दावे पर कहा कि किसी काम को अवैध ठहराने का फैसला अदालत करेगी, कांग्रेस नहीं।
आखिर किस बात पर है विवाद?
पूरे विवाद को समझें तो एक तरफ राहुल गांधी का दावा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में गैर-कानूनी और एकतरफा बदलाव किया। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि मूल फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया और उसके साथ सिर्फ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म 6 में किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी और रिकॉर्ड सामने आने पर यह देखना चाहेगा कि अगर कोई बदलाव हुआ है तो उसे किसने किया।
वहीं, चुनाव आयोग अपने पुराने आदेश और प्रेस नोट का हवाला देते हुए कह रहा है कि फॉर्म 6 में बदलाव नहीं हुआ था और अतिरिक्त घोषणा-पत्र बिहार एसआईआर के लिए बनाए गए प्रोटोकॉल का हिस्सा था। ऐसे में अब इस विवाद में फॉर्म 6 के मूल स्वरूप, अतिरिक्त घोषणा-पत्र और उसे जोड़ने की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड अहम हो सकते हैं।


