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गढ़वाल यूनिवर्सिटी चुनाव में ABVP की करारी हार, NSUI ने जीता सचिव पद; 2027 से पहले बड़ा संकेत
गढ़वाल यूनिवर्सिटी के पौड़ी BGR परिसर छात्रसंघ चुनाव में ABVP को बड़ा झटका लगा है। NSUI के मयंक बहुगुणा ने सचिव पद जीता, जबकि अध्यक्ष पद पर हिमांशु भंडारी विजयी रहे। कांग्रेस ने इसे 2027 से पहले बदलाव का संकेत बताया।
Garhwal University Student Union Election 2026: उत्तराखंड की छात्र राजनीति के सबसे अहम केंद्रों में शामिल हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (HNBGU) के पौड़ी स्थित BGR परिसर के छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को बड़ा झटका लगा है। अध्यक्ष पद पर जय हो ग्रुप के हिमांशु भंडारी ने ABVP के भुवन चमोली को 1500 से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया, जबकि सचिव पद पर कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के मयंक बहुगुणा ने जीत दर्ज की।
चुनाव नतीजों ने उत्तराखंड की छात्र राजनीति में सियासी हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस ने इसे सिर्फ छात्रसंघ चुनाव का परिणाम नहीं, बल्कि राज्य में बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत बताया है।
अध्यक्ष पद पर ABVP को करारी शिकस्त
पौड़ी परिसर में अध्यक्ष पद के चुनाव में जय हो ग्रुप के हिमांशु भंडारी ने ABVP प्रत्याशी भुवन चमोली को 1500 से अधिक वोटों के अंतर से मात दी। वहीं उपाध्यक्ष पद पर छात्रम संगठन के पुलकित अग्रवाल विजयी रहे।
सचिव पद पर NSUI के मयंक बहुगुणा ने जीत हासिल की। सह-सचिव पद पर अमन कुनियाल ने बाजी मारी, जबकि कोषाध्यक्ष पद पर रामस्वरूप का निर्विरोध निर्वाचन हुआ।
इस तरह चुनाव में ABVP को छात्रसंघ के प्रमुख पदों पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
कांग्रेस ने बताया बदलाव का संकेत
नतीजों के बाद कांग्रेस ने इसे राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ युवाओं के मूड से जोड़ना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर NSUI की जीत का जिक्र करते हुए दावा किया कि उत्तराखंड के छात्र और युवा भाजपा सरकार की नीतियों से असंतुष्ट हैं।
वेणुगोपाल ने इस जीत को आगामी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव से भी जोड़ा और दावा किया कि वहां भी NSUI मजबूत प्रदर्शन करेगी। उन्होंने 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए भाजपा को सत्ता से हटाने का दावा किया।
हालांकि, छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव के परिणाम से जोड़ना जल्दबाजी होगी। फिर भी यह चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए युवा वोटरों के बीच संगठनात्मक पकड़ को परखने का महत्वपूर्ण संकेत जरूर है।
धन सिंह रावत के प्रभाव क्षेत्र में ABVP को झटका
गढ़वाल विश्वविद्यालय के पौड़ी-श्रीनगर क्षेत्र को उत्तराखंड की छात्र राजनीति की नर्सरी माना जाता है। यह क्षेत्र राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के राजनीतिक प्रभाव वाले इलाके के तौर पर भी महत्वपूर्ण है।
धन सिंह रावत खुद छात्र राजनीति और ABVP की पृष्ठभूमि से निकलकर राज्य की राजनीति में बड़े मुकाम तक पहुंचे हैं। ऐसे में उनके प्रभाव क्षेत्र में ABVP का प्रमुख छात्रसंघ पदों पर पिछड़ना भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से असहज करने वाला नतीजा माना जा रहा है।
रोजगार और युवा मुद्दे बन सकते हैं बड़ा फैक्टर
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों से भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, रोजगार, पलायन और छात्र-युवा आंदोलनों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड समेत कई मुद्दों ने भी राज्य में युवाओं के बीच सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
ऐसे में विश्वविद्यालय परिसरों की राजनीति में इन मुद्दों का असर दिखाई देना कांग्रेस के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। वहीं भाजपा के लिए यह संकेत है कि छात्र राजनीति में उसकी पारंपरिक पकड़ को चुनौती मिल सकती है।
2027 से पहले कांग्रेस को मिला नया नैरेटिव
उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा लगातार दो विधानसभा चुनावों में सरकार बनाने के बाद सत्ता में है। ऐसे में कांग्रेस अभी से युवा मतदाताओं और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
गढ़वाल विश्वविद्यालय चुनाव के नतीजे कांग्रेस को इसी अभियान के लिए एक नया राजनीतिक नैरेटिव देते हैं। पार्टी इसे 'बदलाव की शुरुआत' के तौर पर पेश कर रही है।
हालांकि, विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं और छात्रसंघ चुनाव का समीकरण सीधे राज्य की चुनावी राजनीति पर लागू नहीं किया जा सकता। लेकिन गढ़वाल जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में ABVP को मिली यह हार भाजपा के लिए चेतावनी जरूर है कि 2027 से पहले युवा वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती उसके सामने बनी हुई है।


