Madhya Pradesh News: बालसाहित्य को नई दिशा देने की पहल, टीकमगढ़ में सजी ‘अम्मा की बगिया’

Madhya Pradesh News: टीकमगढ़ में आयोजित ‘अम्मा की बगिया’ बालसाहित्य गोष्ठी में डॉ. विकास दवे ने गीतिका वेदिका की पहल को बच्चों के लिए प्रेरणादायी बताया।

Newstrack Network
Published on: 23 May 2026 10:56 PM IST
Initiative to give new direction to childrens literature, Saji Amma ki Bagiya in Tikamgarh
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बालसाहित्य को नई दिशा देने की पहल, टीकमगढ़ में सजी ‘अम्मा की बगिया’ (Photo- Newstrack)

Madhya Pradesh News: आज के दौर में जहां अलग-अलग विषयों पर विमर्श हो रहे हैं, वहीं बालसाहित्य को लेकर भी गंभीर सोच की जरूरत महसूस की जा रही है। अक्सर बालसाहित्य को केवल पाठ्यपुस्तकों की कविता और कहानियों तक सीमित मान लिया जाता है, लेकिन बच्चों की जिज्ञासा और उनकी कल्पनाशक्ति इससे कहीं आगे की मांग करती है। बच्चों को सिर्फ किसी वस्तु या व्यक्ति के बारे में जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें इतिहास, पौराणिक प्रसंगों, राष्ट्रधर्म, शौर्य, रिश्तों, पर्यावरण, नीति, ज्ञान और मनोरंजन से जोड़ना भी जरूरी है, ताकि उनका चरित्र निर्माण हो सके।

इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए साहित्यकार और अभिनेत्री गीतिका वेदिका ने समर्पयामि फाउंडेशन टीकमगढ़ के तत्वावधान में मई के प्रथम सप्ताह में ‘बाल साहित्य गोष्ठी व विमर्श’ का आयोजन किया। इस आयोजन को बालगोपाल की अध्यक्षता में ‘अम्मा की बगिया’ नाम दिया गया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

डॉ. विकास दवे रहे मुख्य अतिथि

इस भव्य बाल-सांस्कृतिक आयोजन के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन की साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे रहे। कार्यक्रम में टीकमगढ़ के कई साहित्यकारों की उपस्थिति रही। इनमें आर पी तिवारी, गुलाब सिंह भाऊ, राजीव नामदेव राना, प्रमोद गुप्ता मृदुल, मुन्नालाल मिश्रा, सत्यनारायण तिवारी, एस आर सरल, स्वप्निल तिवारी, रविंद्र यादव, विशाल कड़ा, अनवर साहिल, एम एस श्रीवास्तव, लीना कुलथिया, रश्मि गोयल, मीनू गुप्ता, प्रीति सिंह परमार, अजीत श्रीवास्तव, पूरनचन्द्र गुप्ता, कौशल किशोर भट्ट, पंडित महेंद्र द्विवेदी, शीलचन्द्र जैन, विजय मेहता, राम गोपाल रैकवार और चांद मुहम्मद आखिर सहित बड़ी संख्या में बालक-बालिकाएं भी मौजूद रहीं।

उमा देवी पाराशर के जन्मदिवस पर हुआ आयोजन

यह आयोजन गीतिका वेदिका की माताजी उमा देवी पाराशर के जन्मदिवस पर रखा गया था। यह सिर्फ एक गोष्ठी नहीं बल्कि बालसाहित्य की कार्यशाला के रूप में आयोजित किया गया। उमा देवी पाराशर युवावस्था में सरस्वती शिशु मंदिर में बच्चों को संगीत के माध्यम से बालगीत सिखाया करती थीं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर गीतिका वेदिका ने साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई।


कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और ‘या कुंदेंदु तुषारहार धवला’ सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद डॉ. विकास दवे का तिलक लगाकर, शाल-श्रीफल और समर्पयामि का शुभंकर चिन्ह ज्योतिदीप भेंट कर स्वागत किया गया। गीतिका वेदिका और सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व विद्यार्थी योगेश्वर पाराशर ने उनका सम्मान किया। ‘अतिथि पुस्तकार्पण सत्र’ में साहित्यकारों ने अपनी स्वरचित पुस्तकें उन्हें भेंट कीं।

बालसाहित्य में नवाचार की जरूरत

अपने संबोधन में डॉ. विकास दवे ने कहा कि उमा देवी उनकी पूर्ववर्ती आचार्या रही हैं और वे उन्हें प्रणाम करने यहां आए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि उमा देवी के लिखे बाल साहित्य और स्फुट गीतों को संग्रहित किया जाना चाहिए।

डॉ. दवे ने कहा कि गीतिका वेदिका ने बालसाहित्य की गोष्ठी में लड्डूगोपाल से अध्यक्षता करवाकर एक नया प्रयोग किया है और इस तरह के नवाचार आज बालसाहित्य की जरूरत हैं। उन्होंने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि हायर सेकेंडरी पूरी करने के बाद वे सरस्वती शिशु मंदिर में आचार्य बने और बाद में प्रधानाचार्य भी रहे। आगे चलकर उन्होंने विद्याभारती की बालसाहित्य पत्रिका ‘देवपुत्र’ का संपादन किया।

उन्होंने बताया कि जब पत्र-पत्रिकाओं की लोकप्रियता लगातार कम हो रही थी, उस समय ‘देवपुत्र’ पत्रिका ने तीन लाख इकहत्तर हजार की प्रसार संख्या हासिल कर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था।

पराग और नंदन जैसी पत्रिकाओं के खत्म होने पर जताई चिंता

डॉ. दवे ने पराग और नंदन जैसी चर्चित बाल पत्रिकाओं के बंद होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में गीतिका वेदिका द्वारा बालसाहित्य को लेकर किया जा रहा आयोजन बेहद जरूरी और सराहनीय है। उन्होंने गीतिका वेदिका के मनोवैज्ञानिक और सरस बालसाहित्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें लगातार इस दायित्व का निर्वाह करते रहना चाहिए।

बच्चों को काल्पनिक नहीं, वास्तविक नायकों से जोड़ने की जरूरत

अपने जीवन में सात से आठ लाख बच्चों से सीधा संवाद कर चुके डॉ. दवे ने कहा कि कॉमिक्स और अन्य माध्यमों में जिन महापुरुषों को दिखाया जाता है, वे अधिकतर काल्पनिक होते हैं और आदर्श नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि वीर शिवाजी, वीर सावरकर और महाराणा प्रताप जैसे महानायक हमारे वास्तविक आदर्श हैं और बच्चों को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।

उन्होंने महाराणा प्रताप का उदाहरण देते हुए कहा कि हल्दीघाटी में वीरता दिखाने वाले इस महान योद्धा ने राष्ट्र के सम्मान की रक्षा की थी। वे अस्सी किलो का भाला उठाते थे और उनका कवच, रक्षा जंजीर तथा शिरस्त्राण भारी लोहे के बने होते थे। इतिहास में उनका नाम शौर्य, साहस, पराक्रम और त्याग के लिए अमर है। डॉ. दवे ने कहा कि बच्चों के आदर्श ऐसे महानायक होने चाहिए, न कि साबू और चाचा चौधरी जैसे काल्पनिक पात्र। उन्होंने कहा कि बच्चों को वामपंथ और पाश्चात्य प्रभाव से बचाकर ऐतिहासिक शौर्य गाथाओं से परिचित कराना चाहिए।

माता-पिता के सम्मान की सोच की सराहना

डॉ. दवे ने कहा कि वे इस कार्यक्रम में साहित्य अकादमी के निदेशक के रूप में नहीं, बल्कि गीतिका वेदिका के आमंत्रण पर आए हैं, जो बालसाहित्य के क्षेत्र में गंभीर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वे यहां अपनी पूर्ववर्ती आचार्या उमा देवी पाराशर को प्रणाम करने और शुभकामनाएं देने पहुंचे हैं। साथ ही उन्होंने गीतिका वेदिका के उस विचार की भी सराहना की, जिसमें माता-पिता के जन्मोत्सव और अन्य आयोजन उनके सामने मनाने की बात कही गई, ताकि उन्हें सुख और सम्मान का अनुभव हो।

पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

कार्यक्रम में स्वल्पाहार के दौरान घर में बने व्यंजन और गोरस सामग्री परोसी गई। भोजन दोना-पत्तल में परसा गया और थर्मोकोल जैसी दूषित सामग्री का पूरी तरह निषेध किया गया। इस पहल ने ‘अम्मा की बगिया’ की पर्यावरण मित्र सोच को भी सार्थक बना दिया।

नियमित रूप से होंगी ‘बालसभाएं’

आभार व्यक्त करते हुए संचालिका गीतिका वेदिका भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि बालसाहित्य के चिंतन पर गहरी दृष्टि रखने वाले डॉ. विकास दवे ने उनके घर आकर आयोजन को कल्पना से भी अधिक सुंदर बना दिया। उन्होंने उपस्थित सभी साहित्यकारों, बच्चों और सहयोगियों का आभार जताया और घोषणा की कि अब ‘अम्मा की बगिया’ में इस तरह की रचनात्मक गोष्ठियां नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, जिन्हें वे ‘बालसभा’ कहती हैं।

टीकमगढ़ नगर में समर्पयामि जैसी छोटी संस्था द्वारा बालसाहित्य को केंद्र में रखकर इस तरह का आयोजन किया जाना वास्तव में एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल मानी जा रही है।

Shashi kant gautam

Shashi kant gautam

Mail ID - skgautam1208@gmail.com

Experienced Hindi Journalist with 6 Years of Experience

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