एआई के शोर में ‘सिंपल टेक’ की वापसी, कैमरा-एमपी3 प्लेयर और तार वाले ईयरफोन फिर युवाओं की पसंद

Retro Tech Revival: एआई और स्मार्टफोन के दौर में युवा कॉम्पैक्ट कैमरा, एमपी3 प्लेयर, तार वाले ईयरफोन और साधारण फोन की ओर लौट रहे हैं। जानिए इसके पीछे डिजिटल डिटॉक्स और कम तकनीक की चाह क्यों बढ़ रही है।

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Published on: 22 Sept 2026 10:37 PM IST
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Retro Tech Revival: करीब डेढ़ दशक तक तकनीकी उद्योग ने उपभोक्ताओं को समझाया कि कैमरा, संगीत, नक्शा, घड़ी, रेडियो, टेलीविजन, किताब, भुगतान और कंप्यूटर-सब कुछ एक स्मार्टफोन में होना सुविधा की पराकाष्ठा है। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई इसी फोन को और शक्तिशाली बना रही है, लेकिन इसके समानांतर दुनिया में एक उलटी धारा भी उभर रही है। युवा और खासकर नई पीढ़ी का एक हिस्सा ऐसे उपकरणों की तरफ लौट रहा है जो जानबूझकर कम काम करते हैं-कॉम्पैक्ट डिजिटल कैमरा केवल तस्वीर लेता है, एमपी3 प्लेयर मुख्यतः संगीत सुनाता है, तार वाला ईयरफोन बिना चार्ज किए चलता है और साधारण फोन कॉल तथा संदेश तक सीमित रह सकता है। इसे केवल पुराने जमाने की याद यानी ‘नॉस्टैल्जिया’ मानना अधूरा होगा, क्योंकि इस वापसी का नेतृत्व ऐसे युवाओं का एक हिस्सा भी कर रहा है जिन्होंने आईपॉड, शुरुआती डिजिटल कैमरे और वॉकमैन का मूल दौर देखा ही नहीं। उनके लिए यह पुरानी तकनीक की वापसी कम और लगातार नोटिफिकेशन, एल्गोरिदम तथा स्क्रीन से घिरे जीवन के बीच एक काम के लिए एक उपकरण चुनने का नया अनुभव अधिक है।

इस प्रवृत्ति के सबसे ठोस प्रमाण कैमरा उद्योग से मिलते हैं। कैमरा एंड इमेजिंग प्रोडक्ट्स एसोसिएशन यानी CIPA के आंकड़ों के अनुसार 2025 में बिल्ट-इन लेंस वाले डिजिटल कैमरों की वैश्विक शिपमेंट 29.6 प्रतिशत बढ़ी। वर्षों से स्मार्टफोन के कारण लगातार सिकुड़ रही इस श्रेणी में अचानक इतनी वृद्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ समय पहले तक उद्योग में लगभग सर्वसम्मति थी कि अलग कॉम्पैक्ट कैमरा धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। ऐसा नहीं हुआ। स्मार्टफोन के कैमरे तकनीकी रूप से लगातार बेहतर हुए, लेकिन उसी दौरान अलग कैमरे की मांग फिर बढ़ने लगी। यह विरोधाभास बताता है कि उपभोक्ता केवल बेहतर तस्वीर नहीं खरीद रहा, वह तस्वीर लेने का अलग अनुभव भी खरीद रहा है।

कॉम्पैक्ट कैमरा खत्म होने वाला था, अब कंपनियां मांग पूरी नहीं कर पा रहीं

कॉम्पैक्ट कैमरों की वापसी को समझने के लिए पिछले डेढ़ दशक को देखना जरूरी है। स्मार्टफोन आने से पहले छुट्टियों, जन्मदिन, यात्रा और पारिवारिक समारोहों में छोटा डिजिटल कैमरा लगभग सामान्य वस्तु था। फोन कैमरों की गुणवत्ता बढ़ी तो इसका बाजार तेजी से खत्म हुआ। CIPA के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार 2010 के आसपास पूरी डिजिटल कैमरा श्रेणी की वैश्विक शिपमेंट 12 करोड़ से अधिक इकाइयों तक पहुंच गई थी। इसके बाद स्मार्टफोन ने विशेष रूप से छोटे फिक्स्ड-लेंस कैमरों को लगभग बाजार से बाहर कर दिया। लेकिन अब उसी श्रेणी में मांग की नई लहर दिखाई दे रही है।

इस वापसी के पीछे तस्वीर की तकनीकी गुणवत्ता अकेला कारण नहीं है। कई पुराने कॉम्पैक्ट कैमरों की सेंसर क्षमता और कम रोशनी का प्रदर्शन आज के महंगे स्मार्टफोन से कमजोर हो सकता है। इसके बावजूद 2000 और 2010 के दशक के Canon PowerShot, Sony Cyber-shot, Nikon Coolpix, Fujifilm FinePix और दूसरे पुराने कैमरों की सेकेंड हैंड मांग बढ़ी है। नई पीढ़ी को इन कैमरों की फ्लैश वाली, थोड़ी कठोर, कम संसाधित और उस दौर जैसी तस्वीरें आकर्षित कर रही हैं। सोशल मीडिया पर इसे अक्सर ‘डिजिकैम’ सौंदर्य कहा जाता है। आधुनिक फोन जहां तस्वीर लेते ही एचडीआर, रंग, त्वचा, प्रकाश और तीखेपन को संगणकीय तरीके से सुधार देता है, वहीं पुराना कैमरा अपेक्षाकृत अनगढ़ परिणाम देता है। आज के युवा उपभोक्ता के एक हिस्से के लिए यही अपूर्णता उसकी खासियत बन गई है।

मूल सूचना में कॉम्पैक्ट कैमरों की ‘मांग बनाम आपूर्ति 10:1’ बताई गई है। इस संख्या को पूरे वैश्विक कैमरा बाजार का आधिकारिक अनुपात मानना उचित नहीं होगा। अलग-अलग लोकप्रिय कैमरा मॉडलों के लिए खुदरा विक्रेताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने मांग उपलब्ध आपूर्ति से कई गुना अधिक होने की बात कही है, लेकिन 10:1 का कोई सार्वभौमिक CIPA वैश्विक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए 29.6 प्रतिशत की शिपमेंट वृद्धि ठोस उद्योग आंकड़ा है, जबकि दस गुना मांग जैसे दावे को किसी विशिष्ट मॉडल, विक्रेता या बाजार के संदर्भ के बिना वैश्विक तथ्य के रूप में नहीं रखा जाना चाहिए।

कैमरा बाजार का मूल्य 48.9% बढ़ने का दावा भी सावधानी से पढ़ें

मूल सामग्री में 2025 में कैमरा बाजार के मूल्य में 48.9 प्रतिशत वृद्धि का आंकड़ा दिया गया है। उपलब्ध उद्योग आंकड़ों में इस संख्या की परिभाषा महत्वपूर्ण है। CIPA कैमरा शिपमेंट को इकाइयों और येन मूल्य दोनों में दर्ज करता है, लेकिन अलग-अलग बाजार अनुसंधान संस्थाएं ‘डिजिटल कैमरा बाजार’, ‘कॉम्पैक्ट कैमरा’, ‘मिररलेस कैमरा’ और ‘इमेजिंग बाजार’ की अलग परिभाषाएं इस्तेमाल करती हैं। इसलिए 48.9 प्रतिशत को पूरे विश्व के सभी कैमरों के बाजार मूल्य में निर्विवाद वार्षिक वृद्धि कहना उचित नहीं है। सबसे स्पष्ट और तुलनीय आधिकारिक संकेत अभी यही है कि 2025 में बिल्ट-इन लेंस कैमरों की इकाई शिपमेंट लगभग 29.6 प्रतिशत बढ़ी। यह अपने आप में उस श्रेणी की वापसी का पर्याप्त मजबूत संकेत है जिसे कुछ वर्ष पहले लगभग मृत बाजार समझा जाने लगा था।

Gen Z के लिए 2005 भी ‘रेट्रो’ है

इस प्रवृत्ति का सबसे दिलचस्प पहलू खरीदारों की उम्र है। जिस तकनीक को चालीस-पचास वर्ष की उम्र वाले लोग पुरानी वस्तु समझते हैं, वही 18 से 25 वर्ष की उम्र के उपभोक्ता के लिए नई और अलग हो सकती है। वर्ष 2005 में लोकप्रिय हुआ डिजिटल कैमरा आज लगभग दो दशक पुरानी तकनीक है। 2005 या उसके बाद जन्मे युवा ने उस दौर में कैमरे का इस्तेमाल किया ही नहीं होगा। इसलिए उसके लिए कॉम्पैक्ट कैमरा बचपन की स्मृति नहीं बल्कि एक ऐसी वस्तु है जिसमें स्क्रीन छोटी है, ऐप नहीं हैं, सोशल मीडिया नहीं है और तस्वीर खींचने के बाद उसे तत्काल दुनिया को दिखाने का दबाव नहीं है।

यही कारण है कि इसे केवल नॉस्टैल्जिया कहना पर्याप्त नहीं है। समाजशास्त्र और उपभोक्ता व्यवहार के स्तर पर इसे ‘रेट्रो तकनीक’ के नए चक्र के रूप में देखा जा सकता है। फैशन की तरह तकनीक में भी एक पीढ़ी द्वारा छोड़ी गई वस्तु अगली पीढ़ी के लिए विशिष्टता का प्रतीक बन सकती है। विनाइल रिकॉर्ड इसका पुराना उदाहरण है। स्ट्रीमिंग सेवाओं के युग में विनाइल की बिक्री खत्म होने के बजाय फिर बढ़ी। तत्काल उपलब्ध करोड़ों गानों के मुकाबले एक रिकॉर्ड खरीदना, उसे निकालना, टर्नटेबल पर रखना और पूरा एल्बम सुनना तकनीकी रूप से कम सुविधाजनक है, लेकिन अनुभव अधिक केंद्रित है। यही तर्क अब कैमरा और संगीत उपकरणों पर दिखाई दे रहा है।

एमपी3 प्लेयर का आकर्षण-संगीत सुनिए, बाकी दुनिया बंद

एमपी3 प्लेयर की वापसी का पैमाना कॉम्पैक्ट कैमरों जितना स्पष्ट और बड़े आधिकारिक बिक्री आंकड़ों से सिद्ध नहीं है, लेकिन पुराने iPod और दूसरे समर्पित संगीत प्लेयरों के सेकेंड हैंड बाजार तथा सोशल मीडिया पर इनके प्रति रुचि बढ़ने के संकेत मौजूद हैं। Apple ने 2022 में अंतिम iPod touch का उत्पादन बंद कर दिया था और इसके साथ करीब दो दशक चली iPod श्रृंखला औपचारिक रूप से समाप्त हो गई। फिर भी पुराने iPod Classic, Nano और Mini को खरीदने, उनकी बैटरी और स्टोरेज बदलने तथा उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने वाला समुदाय बढ़ा है। इसका आकर्षण यह नहीं है कि एमपी3 प्लेयर Spotify या आधुनिक स्मार्टफोन से अधिक सक्षम है। आकर्षण ठीक उलटा है-वह कम सक्षम है।

स्मार्टफोन पर संगीत सुनते समय उसी उपकरण पर संदेश, ईमेल, सोशल मीडिया, समाचार, कॉल, विज्ञापन और ऐप नोटिफिकेशन आते रहते हैं। एमपी3 प्लेयर में संगीत शुरू करने के बाद करने को लगभग कुछ और नहीं होता। इसमें एल्गोरिदम आपको अगला वीडियो देखने, कोई पोस्ट खोलने या नया उत्पाद खरीदने के लिए लगातार नहीं खींचता। कई युवाओं के लिए यह सीमा कमजोरी के बजाय विशेषता बन रही है। संगीत संग्रह को स्वयं चुनना, गानों की फाइल रखना और एल्बम को शुरू से अंत तक सुनना स्ट्रीमिंग की अनंत पसंद के मुकाबले अधिक नियंत्रित अनुभव देता है।

तार वाले ईयरफोन में फैशन के साथ व्यावहारिक कारण भी

तार वाले ईयरफोन की वापसी भी इसी प्रवृत्ति का हिस्सा है, हालांकि इसके पीछे केवल ‘डिजिटल डिटॉक्स’ नहीं है। इनके कई सीधे व्यावहारिक फायदे हैं। इन्हें अलग से चार्ज नहीं करना पड़ता, बैटरी खराब होने का सवाल नहीं होता, ब्लूटूथ जोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती और समान कीमत में ध्वनि गुणवत्ता अच्छी मिल सकती है। गेमिंग और कुछ पेशेवर ऑडियो उपयोग में तार वाला संपर्क कम विलंब के कारण भी उपयोगी रहता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उपकरण का जीवन बैटरी की उम्र से तय नहीं होता।

वायरलेस ईयरबड्स के छोटे आकार और लगातार चार्ज-डिस्चार्ज होने वाली लिथियम-आयन बैटरी के कारण कुछ वर्षों बाद उनकी क्षमता घट सकती है। अधिकांश छोटे ईयरबड्स में बैटरी बदलना आसान नहीं होता। इसके मुकाबले साधारण तार वाले ईयरफोन में ऐसी बैटरी होती ही नहीं। पर्यावरणीय दृष्टि से भी लंबे समय तक इस्तेमाल होने वाला बैटरी-रहित उपकरण इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करने में मदद कर सकता है, हालांकि इसका वास्तविक पर्यावरणीय लाभ निर्माण गुणवत्ता, उपयोग अवधि और उपभोक्ता द्वारा उपकरण बदलने की आवृत्ति पर निर्भर करेगा।

स्मार्टफोन की सबसे बड़ी ताकत ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनी

स्मार्टफोन की सफलता का आधार था कि उसने दर्जनों अलग उपकरणों को समाप्त कर दिया। कैमरा, कैलकुलेटर, एमपी3 प्लेयर, रेडियो, जीपीएस, टॉर्च, डायरी, कैलेंडर, अलार्म घड़ी, रिकॉर्डर और कंप्यूटर की अनेक क्षमताएं एक ही उपकरण में आ गईं। आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से यह असाधारण उपलब्धि थी। लेकिन मानव व्यवहार के स्तर पर इसका दूसरा प्रभाव भी हुआ-लगभग हर काम का प्रवेश द्वार एक ही स्क्रीन बन गई।

आप समय देखने के लिए फोन खोलते हैं और संदेश पढ़ने लगते हैं। कैमरा खोलते हैं और कुछ मिनट बाद सोशल मीडिया पर पहुंच जाते हैं। संगीत बदलने जाते हैं और नोटिफिकेशन दिख जाता है। यही वह बिंदु है जहां ‘सिंपल टेक’ या एकल-उद्देश्य वाले उपकरण आकर्षक लगने लगते हैं। कॉम्पैक्ट कैमरे से तस्वीर लेने के बाद उसी स्क्रीन पर सोशल मीडिया नहीं खुल सकता। एमपी3 प्लेयर पर ईमेल नहीं आता। तार वाला ईयरफोन पेयरिंग नोटिफिकेशन नहीं भेजता। तकनीक की सीमित क्षमता यहां उपयोगकर्ता के ध्यान की रक्षा करने वाली सीमा बन जाती है।

एआई ने इस भावना को और तेज किया

कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस बदलाव की अकेली वजह नहीं है, लेकिन उसने तकनीकी अतिभार की बहस को तेज जरूर किया है। आधुनिक स्मार्टफोन में एआई अब तस्वीरों को संपादित करने, आवाज पहचानने, संदेश और ईमेल लिखने, सामग्री सुझाने, कॉल का सार बनाने, अनुवाद करने और उपयोगकर्ता की गतिविधियों के आधार पर अगली जरूरत का अनुमान लगाने तक पहुंच रही है। Google, Apple, Samsung और दूसरे निर्माता फोन को केवल उपकरण के बजाय व्यक्तिगत एआई सहायक में बदलने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

इसका एक विरोधाभासी प्रभाव है। तकनीक जितनी अधिक काम स्वयं करने लगती है, कुछ उपयोगकर्ताओं में उतनी ही अधिक यह इच्छा पैदा हो सकती है कि कम-से-कम कुछ गतिविधियां पूरी तरह उनके नियंत्रण में रहें। तस्वीर लेते समय फोन यह तय न करे कि आसमान कितना नीला और चेहरा कितना चमकीला दिखना चाहिए। संगीत सुनते समय एल्गोरिदम लगातार अगला गाना न चुने। हर खाली क्षण में कोई स्क्रीन नई सामग्री न परोसे। यह एआई-विरोध नहीं बल्कि तकनीकी जीवन में सीमा तय करने की कोशिश है।

‘डम्ब फोन’ की चर्चा भी इसी बड़ी प्रवृत्ति का हिस्सा

इसी संदर्भ में साधारण फीचर फोन अथवा सीमित स्मार्टफोन की चर्चा भी फिर बढ़ी है। इनके उपयोगकर्ताओं में वे लोग शामिल हैं जो स्मार्टफोन पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहते लेकिन सोशल मीडिया, ऐप और लगातार नोटिफिकेशन का इस्तेमाल सीमित करना चाहते हैं। कुछ लोग दूसरा फोन रखते हैं-मुख्य स्मार्टफोन काम के लिए और साधारण फोन सप्ताहांत, छुट्टी या निजी समय के लिए। हालांकि फीचर फोन की कुल वैश्विक बिक्री और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ के कारण खरीद में अंतर करना जरूरी है। भारत और दूसरे विकासशील बाजारों में फीचर फोन की बड़ी मांग कीमत, बैटरी और बुनियादी कनेक्टिविटी के कारण भी है। इसलिए हर फीचर फोन बिक्री को एआई या स्मार्टफोन के खिलाफ प्रतिक्रिया कहना गलत होगा।

क्या सचमुच लोग स्मार्टफोन छोड़ रहे हैं?

इस पूरे रुझान को बढ़ा-चढ़ाकर देखने से भी बचना चाहिए। कॉम्पैक्ट कैमरों की बिक्री बढ़ना, पुराने आईपॉड की मांग या तार वाले ईयरफोन का फैशन स्मार्टफोन के पतन का संकेत नहीं है। दुनिया में अरबों लोग स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और भुगतान, संचार, शिक्षा, मनोरंजन, यात्रा तथा काम के लिए उसकी केंद्रीय भूमिका बनी हुई है। नई प्रवृत्ति अधिकतर स्मार्टफोन को छोड़ने के बजाय उसके कुछ काम उससे वापस लेकर अलग उपकरणों को देने की है।

यानी उपभोक्ता कह रहा है कि फोन मेरे पास रहेगा, लेकिन हर अनुभव फोन के भीतर होना जरूरी नहीं। यात्रा में फोटो अलग कैमरे से ली जा सकती है, संगीत अलग प्लेयर से सुना जा सकता है और कभी-कभी फोन घर पर छोड़कर साधारण उपकरण के साथ बाहर निकला जा सकता है। यही अंतर इस प्रवृत्ति को तकनीक-विरोधी आंदोलन बनने से रोकता है।

तकनीक का अगला चरण शायद ‘ज्यादा’ नहीं, ‘सही मात्रा’ हो

पिछले दो दशकों में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग की लगभग पूरी दिशा अधिक क्षमता की ओर रही-ज्यादा मेमोरी, ज्यादा कैमरे, ज्यादा ऐप, ज्यादा स्क्रीन, ज्यादा कनेक्टिविटी और अब ज्यादा एआई। नई पीढ़ी में उभरती सीमित उपकरणों की पसंद पहली बार यह सवाल उठा रही है कि क्या हर उत्पाद को हर काम करने में सक्षम होना जरूरी है। संभव है कि भविष्य का एक हिस्सा ऐसे उपकरणों का हो जो आधुनिक तकनीक इस्तेमाल करें लेकिन जानबूझकर सीमित रहें।

यह बाजार स्मार्टफोन जितना विशाल हो जाए, इसके अभी प्रमाण नहीं हैं। एमपी3 प्लेयर या पुराने कैमरे फिर अपने 2000 के दशक वाले शिखर पर पहुंचेंगे, यह भी संभव नहीं दिखता। लेकिन कॉम्पैक्ट कैमरों की 2025 की 29.6 प्रतिशत शिपमेंट वृद्धि एक वास्तविक संकेत है कि ‘सुविधा’ की उपभोक्ता परिभाषा बदल रही है। पहले सुविधा का अर्थ था कि एक उपकरण सब कुछ करे। अब कुछ लोगों के लिए सुविधा का अर्थ यह भी है कि एक उपकरण केवल वही काम करे जिसके लिए उसे उठाया गया है।

एआई के युग का यह शायद सबसे दिलचस्प विरोधाभास है। एक तरफ तकनीकी कंपनियां ऐसा उपकरण बनाने की होड़ में हैं जो उपयोगकर्ता के पूछने से पहले उसकी जरूरत समझ ले, दूसरी तरफ उपभोक्ताओं का एक हिस्सा ऐसे कैमरे, म्यूजिक प्लेयर और ईयरफोन खोज रहा है जो उसके बारे में कुछ न जानें। पुराने गैजेट्स की यह वापसी अतीत में लौटने की इच्छा से अधिक अपने समय, ध्यान और चुनाव पर फिर नियंत्रण पाने की कोशिश है-जहां कैमरा सिर्फ तस्वीर खींचे, म्यूजिक प्लेयर सिर्फ गाना सुनाए और हर उपकरण उपयोगकर्ता का ध्यान मांगने के बजाय चुपचाप अपना एक काम करे।

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