Gig Workers Strike: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर फूटा गिग वर्कर्स का गुस्सा! आज देशभर में 5 घंटे की बड़ी हड़ताल का ऐलान

Gig Workers Strike: इस हड़ताल के अंतर्गत ऐप आधारित टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स से आज दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी सेवाएं बंद रखने की अपील की गई है।

Priya Singh Bisen
Published on: 16 May 2026 11:48 AM IST (Updated on: 16 May 2026 11:48 AM IST)
Gig Workers Strike
X

Gig Workers Strike

Gig Workers Strike: पूरे देश में तेजी से बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ आज शनिवार को गिग वर्कर्स ने 5 घंटे की अस्थायी राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल के अंतर्गत ऐप आधारित टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स से आज दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी सेवाएं बंद रखने की अपील की गई है। गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) के नेतृत्व में हो रहे इस विरोध प्रदर्शन का मकसद सरकार और ऐप कंपनियों तक अपनी आर्थिक समस्याओं को पहुंचाना है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी

हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके बाद कई महानगरों में ईंधन के दाम नए स्तर पर पहुंच गए हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल करीब 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत 110.8 रुपये प्रति लीटर और डीजल 98.9 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

गिग वर्कर्स का कहना है कि उनकी आय का बड़ा हिस्सा गाड़ियों के ईंधन पर खर्च हो जाता है। ऐसे में बढ़ती कीमतों ने उनकी कमाई को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ऐप आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि किराए और इंसेंटिव में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी की जाए, लेकिन कंपनियां ऐसा नहीं कर रही हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम आंदोलन की अपील

गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए पूरे देश के गिग वर्कर्स से हड़ताल में शामिल होने की अपील की। यूनियन ने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतों और कम भुगतान दरों के कारण हजारों ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

यूनियन के अनुसार, ऐप कंपनियां लगातार कमीशन काट रही हैं जबकि कर्मचारियों की वास्तविक आय तेजी से कम होती जा रही है। उनका आरोप है कि कंपनियां बढ़ती लागत के बावजूद किराए में पर्याप्त संशोधन नहीं कर रही हैं, जिससे ड्राइवरों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है।

"घर चलाना मुश्किल हो गया"

ऐप आधारित कैब ड्राइवर मोहम्मद ने कहा कि हर बार जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं तो उनका खर्च तत्काल बढ़ जाता है, लेकिन कमाई में कोई खास परिवर्तन नहीं आता। उन्होंने बताया कि ईंधन और ऐप कंपनियों के कमीशन का खर्च निकालने के बाद बहुत कम पैसा बचता है। उन्होंने कहा, “कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि घर चलाना भी मुश्किल हो जाता है। पूरे दिन सड़क पर मेहनत करने के बाद भी बचत नहीं हो पा रही।”

वहीं डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि उनका ज्यादातर वक़्त सड़कों पर गुजरता है और ऐसे में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे उनकी आय को प्रभावित करती है। उनका मानना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है लेकिन भुगतान दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।

वैश्विक कारणों से बढ़ा कच्चे तेल का दबाव

जानकारों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की लागत में भारी वृद्धि हुई है। फरवरी में जहां औसत कीमत 69 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं मई में यह 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।

तेल कंपनियों पर भी बढ़ा दबाव

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का कहना है कि हालिया बढ़ोतरी के बावजूद वे अभी भी पूरी लागत वसूल नहीं कर पा रही हैं। क्रिसिल के अनुमान के मुताबिक सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 13 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

तेल कंपनियों के अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से संकेत दिए हैं कि आगामी वक़्त में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि यह फैसला सरकार की मंजूरी और वैश्विक बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी

गिग वर्कर्स का कहना है कि यह फिलहाल एक प्रतीकात्मक और अस्थायी हड़ताल है, लेकिन यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आगामी दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।

यूनियन का कहना है कि सरकार और ऐप कंपनियों को मिलकर ऐसा समाधान निकालना होगा जिससे लाखों गिग वर्कर्स की आजीविका सुरक्षित रह सके। उनका मानना है कि बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों के बीच कम भुगतान दरों पर काम करना अब बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

इसे लेकर पूरे देश में हो रही इस हड़ताल का बड़ा प्रभाव ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं और ऑनलाइन डिलीवरी पर भी देखने को मिल सकता है। कई शहरों में यात्रियों और ग्राहकों को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

Priya Singh Bisen

Priya Singh Bisen

Mail ID - Priyasinghbisen96@gmail.com

Content Writer

Next Story