Gold Import India: क्या भारतीय सच में सोना खरीदना कम करेंगे? मोदी की अपील पर बड़ा सवाल

Sona Chandi Kyo Na Khareeden: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक गैर जरूरी सोना न खरीदने की अपील की है। जानिए कैसे बढ़ता गोल्ड इम्पोर्ट भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, रुपये और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा रहा है।

Neel Mani Lal
Published on: 11 May 2026 6:25 PM IST
Sona Chandi Kyo Na Khareeden
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Sona Chandi Kyo Na Khareeden

Gold Import India: भारत में सोना यानी गोल्ड सिर्फ एक बेशकीमती धातु नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा का भी हिस्सा है। लेकिन अब यही सोना देश की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ता दिख रहा है। बढ़ते इम्पोर्ट बिल, गिरते विदेशी मुद्रा भंडार और कमजोर होते रुपये के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक गैर ज़रूरी सोना न खरीदने की अपील की है।

प्रधानमंत्री ने 10 मई को कहा कि सोने की खरीद में भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है और राष्ट्रीय हित में नागरिकों को एक साल तक सोना खरीदने से बचना चाहिए, चाहे घर में शादी ब्याह जैसे बड़े कार्यक्रम ही क्यों न हों।

भारत का ‘गोल्ड बिल’


भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, लेकिन अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से ज्यादा सोना विदेशों से मंगाता है। 2022 में भारत का गोल्ड इम्पोर्ट बिल रहा 36.5 अरब डॉलर का जो 2025 में बढ़कर 58.9 अरब डॉलर का हो गया। वित्त वर्ष 26 में अनुमानित बिल 72 अरब डॉलर का है। यानी सिर्फ़ चार साल में सोने पर होने वाला विदेशी खर्च लगभग दोगुना हो गया है। भारत मे सोने की सालाना माँग 700 से 800 टन के बीच रहती है, जबकि घरेलू उत्पादन न के बराबर है। साल में सिर्फ़ एक दो टन सोने का उत्पादन होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर भारत एक साल तक सोने की खरीद में 25 से 30 फीसदी की भी कमी लाने में सफल हो जाए, तो देश करीब 15 से 20 अरब डॉलर तक विदेशी मुद्रा बचा सकता है। यह रकम कई राज्यों के सालाना बजट से भी ज्यादा है। दरअसल, भारत जब विदेशों से सोना खरीदता है, तो भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार घटता है, डॉलर की मांग बढ़ती है, रुपया कमजोर होता है और व्यापार घाटा बढ़ता है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से फरवरी 2025-26 के दौरान भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 310.6 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 261.8 अरब डॉलर था।

रुपये पर भी भारी असर


हाल के महीनों में रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।11 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ा और रुपया शुरुआती कारोबार में गिरकर डॉलर के मुकाबले 94.9 तक पहुंच गया। कमजोर रुपये का मतलब है कि डॉलर में होने वाली खरीद का और महंगा होते जाना। सोने की भी खरीद डॉलर में होती है सो सोने की बढ़ती खरीद का असर आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है।

सरकार की चिंता क्यों बढ़ी?

भारत पहले से ही कच्चे तेल के भारी आयात पर निर्भर है। ऐसे में सोने का बढ़ता आयात देश के चालू खाते और विदेशी मुद्रा भंडार पर दोहरा दबाव बना रहा है। रिज़र्व बैंक के मुताबिक 1 मई को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.69 अरब डॉलर रह गया। 24 अप्रैल को समाप्त हुए हफ़्ते में कुल भंडार 4.82 अरब डॉलर घटकर 698.487 अरब डॉलर रह गया था।

क्या लोग सच में सोना खरीदना बंद करेंगे?


यह सबसे बड़ा सवाल है। विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय समाज में सोने की सांस्कृतिक अहमियत इतनी गहरी है कि पूरी तरह खरीद रोकना मुश्किल होगा। बल्कि आशंका है कि लोग भविष्य के प्रति और डर के और ज्यादा सोना खरीदने लग जाएं। हालांकि, अगर लोग हल्के गहनों की तरफ जाएं, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड बॉन्ड चुनें और शादी में दिखावे पर खर्च घटाएं तो आयात का दबाव काफी कम हो सकता है।

सरकार के पास क्या विकल्प हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि जनता को सलाह देने के अलावा सरकार को घरेलू गोल्ड रीसाइक्लिंग बढ़ानी होगी, गोल्ड बॉन्ड स्कीम को फिर लोकप्रिय बनाना होगा, लोगों को वित्तीय निवेश के दूसरे विकल्प देने होंगे तथा सोने के आयात पर निर्भरता घटानी होगी। अगर देश एक साल तक सोने की खरीद में बड़ी कटौती कर पाए, तो इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बच सकती है, रुपये को सहारा मिल सकता है और अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव कुछ हद तक कम हो सकता है।

अतिरिक्त जानकारी यहाँ से ले सकते हैं

https://commerce.gov.in/

https://www.rbi.org.in/

https://www.gold.org/

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