देश में जल्द में 'वन नेशन, वन टैक्स', GST को लेकर वित्त मंत्री का बड़ा ऐलान, जानिए क्या-क्या बदल जाएगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने GST व्यवस्था के भविष्य को लेकर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया है।

Sachin Singh
Published on: 8 Oct 2026 8:47 PM IST (Updated on: 8 Oct 2026 8:47 PM IST)
देश में जल्द में वन नेशन, वन टैक्स, GST को लेकर वित्त मंत्री का बड़ा ऐलान, जानिए क्या-क्या बदल जाएगा
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GST 2.0: GST काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की टैक्स व्यवस्था को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में आगे चलकर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की दिशा में बढ़ा जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में पूरे देश में सिर्फ एक GST दर लागू हो सकती है, तो वित्त मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे व्यवस्था आगे बढ़ेगी और सरकार स्टेकहोल्डर्स और आम लोगों से बातचीत करेगी, उस दिशा में भी कदम बढ़ाया जाएगा।

सीतारमण के मुताबिक, अब तक GST की दरों और प्रक्रियाओं से जुड़े करीब 99 फीसदी नेक्स्ट जेनरेशन GST सुधार लागू किए जा चुके हैं। यानी GST व्यवस्था को आसान और ज्यादा पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

GST 2.0 में बदलेगी टैक्स व्यवस्था

वित्त मंत्री ने कहा कि 1 जुलाई 2017 को लागू हुई GST व्यवस्था अब अपने अगले चरण यानी GST 2.0 में प्रवेश कर रही है। इसका मकसद टैक्स सिस्टम को ज्यादा तर्कसंगत और पारदर्शी बनाना है, ताकि कारोबार और टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाएं पहले के मुकाबले आसान हो सकें।

GST से पहले देश में थे कई तरह के टैक्स

GST लागू होने से पहले देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था काफी जटिल थी। केंद्र और राज्यों में अलग-अलग तरह के टैक्स लगाए जाते थे। इनमें केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, राज्यों का VAT, चुंगी यानी Octroi और विलासिता कर जैसे कुल 17 बड़े अप्रत्यक्ष कर शामिल थे। इसके अलावा 23 तरह के सेस भी वसूले जाते थे।

GST लागू होने के बाद इन अलग-अलग टैक्स को हटाकर पूरे देश के लिए एक साझा टैक्स व्यवस्था और एकल बाजार बनाने की कोशिश की गई।

2017 में चार प्रमुख GST स्लैब से हुई थी शुरुआत

जब 2017 में GST लागू किया गया था, तब मुख्य रूप से 5%, 12%, 18% और 28% के चार टैक्स स्लैब बनाए गए थे। इनके अलावा जरूरी सामान को 0% यानी टैक्स फ्री रखा गया था, जबकि सोने के लिए 3% की विशेष दर तय की गई थी।

अब GST 2.0 के तहत टैक्स व्यवस्था को और सरल बनाने की दिशा में बदलाव किए गए हैं। पुराने 12% और 28% के स्लैब को खत्म कर दिया गया है।

अब इन GST दरों के हिसाब से काम कर रही व्यवस्था

मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग सामान और सेवाओं के लिए मुख्य रूप से चार श्रेणियां रखी गई हैं।

  • 0% GST में जरूरी सामान, अनाज और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को रखा गया है।
  • 5% GST रोजमर्रा की जरूरत के सामान और जीवन रक्षक दवाओं पर लागू है।
  • 18% GST इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंसेज और व्यावसायिक सेवाओं के लिए सामान्य दर के तौर पर है।
  • 40% GST सबसे ऊंची दर है, जो तंबाकू उत्पादों, एयरेटेड ड्रिंक्स और लग्जरी कारों पर लगाई जाती है।

कारोबारियों को भी मिलेगी राहत

GST काउंसिल की बैठक के बाद कारोबारियों के लिए भी कुछ राहत की बात सामने आई है। वित्त मंत्री ने बताया कि पूरे देश में टैक्स नोटिस जारी करने को लेकर समान मानक बनाए जाएंगे। 10,000 रुपये से कम के छोटे टैक्स मामलों में नया नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।

इसके अलावा माल जब्त करने की प्रक्रिया को भी सीमित अधिकारियों तक रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कारोबारियों को अनावश्यक दखल से राहत देना और टैक्स व्यवस्था में इंस्पेक्टर राज की गुंजाइश कम करना है।

वन नेशन वन टैक्स की ओर बढ़ने का संकेत

कुल मिलाकर सरकार GST को लगातार आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वित्त मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में टैक्स स्लैब को लेकर और बदलाव हो सकते हैं। हालांकि भविष्य में एक ही GST दर लागू होगी या नहीं, इस पर फैसला आगे स्टेकहोल्डर्स और लोगों के साथ बातचीत के बाद ही होगा।

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Sachin Singh is a media professional with 4 years of experience in the field of journalism and digital media. After completing his education at Jamia Millia Islamia Central University, he has worked with reputed media organizations such as Editor ji, ABP News and Doordarshan. Currently, Sachin Singh is working as a Content Writer with News Track, where he contributes to fast-paced digital news coverage and content creation. His areas of interest include politics, national and international affairs, and food. With experience across different formats of journalism, he focuses on producing informative, accurate, and engaging content for digital audiences.

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