ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर क्यों ठंडी पड़ी CJP? कभी ज्ञानू को जाना होगा का नारा, अब साध ली चुप्पी!

CJP CEC Resignation Row: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन चला रही CJP अब इस मुद्दे पर शांत नजर आ रही है। ‘ज्ञानू को जाना होगा’ के नारे के बाद दीपके, रांका और दास की सक्रियता क्यों घटी?

Aditya Kumar Verma
Published on: 26 Oct 2026 12:56 PM IST
CJP Gyanesh Kumar Resignation Row
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Image Source- Social Media

CJP CEC Resignation Row: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार आंदोलन का ऐलान करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अब इस मुद्दे पर शांत नजर आ रही है। कभी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक पीछे नहीं हटने की बात कहने वाले सीजेपी के बड़े नेताओं ने पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर ज्यादा कुछ नहीं कहा है।

सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke), सह संयोजक आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) और सौरभ दास (Saurabh Das) पहले सोशल मीडिया और सड़क पर ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर लगातार सक्रिय थे। लेकिन अब उनकी गतिविधियों में इस मुद्दे को लेकर कमी दिखाई दे रही है। दीपके ने तो पिछले पांच दिनों से सोशल मीडिया पर ज्ञानेश कुमार का नाम तक नहीं लिया है।

पहले इस्तीफा था सबसे बड़ा लक्ष्य

एक अंग्रेजी अखबार में चुनाव आयोग (Election Commission) में कथित असहमति की खबर सामने आने के बाद सीजेपी ने अपने दूसरे अभियानों को रोककर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य घोषित कर दिया था।

उस समय सीजेपी ने ‘स्कूल ठीक करो, आदिवासी स्कूल ठीक करो’ जैसे अभियानों को रोककर पूरा फोकस ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन पर कर दिया था। इससे पहले नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) के खिलाफ आंदोलन चलाकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भी सीजेपी सक्रिय रही थी।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को लेकर शुरुआत में सीजेपी के नेताओं का तेवर काफी आक्रामक नजर आया। लेकिन दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की घेराबंदी, हिरासत, गिरफ्तारी और पीस बॉन्ड (Peace Bond) की कार्रवाई के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने की स्थिति बदल गई।

दीपके ने घोषित किया त्योहार वाला ब्रेक

सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद भी आंदोलन को लेकर सीजेपी की ओर से बयान आते रहे। लेकिन इससे पहले कि दोनों नेता जेल से बाहर आकर आंदोलन की अगली रणनीति को लेकर सक्रिय होते, अभिजीत दीपके ने आंदोलन में त्योहार वाला ब्रेक घोषित कर दिया।

दीपके ने समर्थकों से दिवाली (Diwali) तक परिवार के साथ वक्त बिताने की अपील की। इसके बाद से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को लेकर सार्वजनिक गतिविधियां पहले के मुकाबले कम दिखाई दे रही हैं।

ज्ञानेश कुमार पर पूरी तरह चुप्पी

सौरभ दास और आशुतोष रांका जेल से बाहर आने के बाद सोशल मीडिया पोस्ट और पत्रकारों से बातचीत में यह जरूर कह चुके हैं कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि, दोनों ने आंदोलन की अगली रणनीति को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।

अभिजीत दीपके ने हाल में एक इंटरव्यू में कहा था कि फिलहाल रांका और दास अपने परिवार के साथ वक्त बिता रहे हैं और इसके बाद तीनों मिलकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे।

लेकिन फिलहाल तीनों नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियों में ज्ञानेश कुमार का मुद्दा पहले जैसी प्रमुखता से दिखाई नहीं दे रहा है। दीपके ने अपने एक्स (X) हैंडल पर 21 अक्टूबर के बाद से ज्ञानेश कुमार को लेकर कोई पोस्ट नहीं की है। 21 अक्टूबर को उन्होंने सौरभ दास और आशुतोष रांका का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा था, ‘लड़कों का एक संदेश है- ज्ञानू को जाना होगा।’

दूसरे मुद्दों पर लगातार सक्रिय हैं दीपके

ऐसा भी नहीं है कि अभिजीत दीपके सोशल मीडिया से पूरी तरह गायब हैं। वह लगातार दूसरे मुद्दों पर पोस्ट कर रहे हैं और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) पर निशाना साध रहे हैं।

उन्होंने दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) के कार्यक्रम को मंजूरी से इनकार, चीन सीमा (China Border) को लेकर आईटीबीपी (ITBP) के महानिदेशक के बयान, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को चार महीने के लिए घर लौटने की अदालत से मिली अनुमति, दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) में विवादित पोस्टरों को लेकर कार्रवाई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के भारत-पाकिस्तान युद्ध को लेकर दिए बयान जैसे मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी है।

यानी दीपके सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार या विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर पिछले कई दिनों से उनकी ओर से कोई नई बात सामने नहीं आई है।

रांका ने एक पुराना बयान साझा किया

सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका भी अब पहले के मुकाबले इस मुद्दे पर कम सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने 24 अक्टूबर को एक दिन पुराना अपना और सौरभ दास का बयान एक्स पर साझा किया था। इसमें दोनों ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को लेकर विचार-विमर्श की बात कर रहे थे।

हालांकि, इसके बाद रांका की ओर से इस मुद्दे पर कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे पहले वह एक दिन में कई पोस्ट करते थे, लेकिन अब उनकी सक्रियता कम दिखाई दे रही है।

सौरभ दास ने भी लगाई थी पोस्ट पिन

सौरभ दास ने 22 अक्टूबर को अपने एक्स अकाउंट पर ‘ज्ञानू हैज टू गो’ (Gyanesh Has to Go) लिखकर पोस्ट को पिन किया था। इससे यह संदेश दिया गया था कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा उनकी प्राथमिकता में है।

लेकिन इसके बाद सौरभ दास भी दूसरे मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते नजर आए हैं। ज्ञानेश कुमार और एसआईआर को लेकर उनकी तरफ से पहले जैसी लगातार सक्रियता दिखाई नहीं दी है।

फिलहाल सीजेपी के तीनों प्रमुख नेताओं ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन की अगली रणनीति क्या होगी। नेताओं की ओर से पहले आंदोलन जारी रखने की बात कही जा चुकी है, लेकिन पिछले कुछ दिनों की गतिविधियों में इस मुद्दे पर खामोशी जरूर दिखाई दे रही है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि दिवाली के बाद सीजेपी अपने घोषित आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाती है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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