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राज्यसभा पहुंचे हरदीप सिंह पुरी, बिना मुकाबले जीत गए चुनाव, जानें कैसे हुआ पूरा खेल
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए हैं। उपचुनाव में उनके मुकाबले उतरे राजकुमार लोहानी और कांते सयन्ना के नामांकन पत्र खारिज हो गए।
Hardeep Singh Puri: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी गुरुवार को मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए। उपचुनाव में उनके मुकाबले उतरे दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन पत्र जांच के दौरान खारिज कर दिए गए। इसके बाद पुरी ही चुनाव मैदान में अकेले उम्मीदवार रह गए और उनका निर्विरोध चुना जाना तय हो गया।
बीजेपी नेताओं ने निर्वाचन प्रमाणपत्र प्राप्त किया
मध्य प्रदेश विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने हरदीप सिंह पुरी का निर्वाचन प्रमाणपत्र जारी किया। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनकी ओर से यह प्रमाणपत्र प्राप्त किया। इस दौरान मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा तथा भगवानदास सबनानी भी मौजूद रहे।
3 नवंबर को स्वीकार हुआ था पुरी का नामांकन
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पत्र को रिटर्निंग ऑफिसर ने 3 नवंबर को जांच के बाद स्वीकार कर लिया था। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर से उनके नामांकन पर आपत्तियां उठाई गई थीं। हालांकि, जांच के दौरान इन आपत्तियों को खारिज कर दिया गया और पुरी का नामांकन वैध माना गया।
दो उम्मीदवारों के नामांकन क्यों हुए खारिज?
चुनाव मैदान में पुरी के अलावा राजकुमार लोहानी और कांते सयन्ना ने भी नामांकन दाखिल किया था। लेकिन जांच के दौरान दोनों के पर्चे खारिज कर दिए गए। इसके बाद पुरी अकेले उम्मीदवार रह गए।
एएनआई की ओर से उद्धृत आदेश के मुताबिक, कांते सयन्ना का नामांकन इसलिए खारिज किया गया, क्योंकि उनके पर्चे में जरूरी प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं थे। नियम के अनुसार, उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर राज्य विधानसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों के 10 प्रतिशत या 10 निर्वाचित सदस्यों के हस्ताक्षर होने जरूरी थे। इनमें से जो संख्या कम हो, उतने प्रस्तावकों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं।
इस तरह दो उम्मीदवारों के नामांकन खारिज होने के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए।


