हरदीप सिंह पुरी की एपस्टीन के साथ तस्वीरें सामने आईं, महुआ मोइत्रा ने पूछा- बाकी लोग कहां थे?

जेफ्री एपस्टीन के साथ हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरों पर सियासी विवाद तेज। महुआ मोइत्रा, सुप्रिया श्रीनेत और संजय राउत ने मुलाकातों पर सवाल उठाए। जानिए पूरा मामला।

Alakha Singh
Published on: 21 Oct 2026 5:54 PM IST
हरदीप सिंह पुरी की एपस्टीन के साथ तस्वीरें सामने आईं, महुआ मोइत्रा ने पूछा- बाकी लोग कहां थे?
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नई दिल्ली: अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की तस्वीरें सामने आने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (UBT) ने पुरी के पुराने बयानों को कटघरे में खड़ा करते हुए मुलाकातों का हिसाब मांगा है। विपक्ष का सीधा सवाल है कि अगर एपस्टीन से मुलाकातें पेशेवर थीं और प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई थीं, तो तस्वीरों में दूसरे सदस्य कहां हैं और इन मुलाकातों का असली मकसद क्या था?

21 अक्टूबर 2026 को सामने आई तस्वीरों ने फरवरी में शुरू हुए एपस्टीन फाइल्स विवाद को फिर हवा दे दी है। विपक्षी नेताओं ने इन तस्वीरों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, तस्वीरों में साथ दिखाई देना अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता का सबूत नहीं है। पुरी पहले ही एपस्टीन से अपने संपर्कों को पेशेवर बताते हुए उसके अपराधों में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार कर चुके हैं।

महुआ मोइत्रा का सवाल- प्रतिनिधिमंडल के बाकी लोग कहां हैं?

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पुरी के पुराने बयान और सामने आई तस्वीरों को लेकर निशाना साधा। पुरी ने फरवरी में कहा था कि एपस्टीन से उनकी तीन या अधिकतम चार मुलाकातें हुई थीं और वे इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के सिलसिले में थीं।

मोइत्रा ने इसी दावे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि बैठकें प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई थीं, तो तस्वीरों में बाकी प्रतिनिधि क्यों नजर नहीं आ रहे हैं? उनके सवाल का केंद्र पुरी के दावे और तस्वीरों में दिखाई देने वाले दृश्य के बीच का अंतर है।

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी पुरी के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके करीबी लोगों को लेकर राजनीतिक हमला बोला। विपक्ष इस पूरे मामले को केवल पुरानी मुलाकातों तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उनके उद्देश्य और पारदर्शिता पर जवाब मांग रहा है।


NCP (SP) ने मांगा मुलाकातों का पूरा ब्योरा

NCP (SP) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने तस्वीरों के सामने आने के बाद पुरी से मुलाकातों की परिस्थितियां स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि इन बैठकों का उद्देश्य क्या था और उनमें किन मुद्दों पर चर्चा हुई?

गावंडे ने कहा कि सरकार को केवल राजनयिक या पेशेवर संपर्क का हवाला देने के बजाय मुलाकातों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि पुरी को एपस्टीन के गंभीर अपराधों की जानकारी नहीं रही होगी।

इस विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि पुरी के एपस्टीन से संपर्क किस संदर्भ में हुए, किन लोगों की मौजूदगी में हुए और उनके बीच किस तरह की बातचीत हुई। इन सवालों का जवाब सामने आए दस्तावेजों, तस्वीरों और पुरी के स्पष्टीकरण को साथ रखकर ही तलाशा जा सकता है।

संजय राउत ने PM मोदी को भी घेरा

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भी पुरी और एपस्टीन की तस्वीरों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए पूछा कि पुरी एपस्टीन से किसका संदेश लेकर मिले थे।

राउत ने कहा कि एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक होने के बाद पुरी के पुराने बयान और उनके संपर्क चर्चा के केंद्र में हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि तस्वीरों और दस्तावेजों को लेकर उठे सवालों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने भी कथित तस्वीर साझा कर पुरी के पुराने दावे पर सवाल उठाए। इस तरह मामला कांग्रेस और TMC के हमलों से आगे बढ़कर दूसरे विपक्षी दलों के राजनीतिक अभियान का हिस्सा बन गया है।

हरदीप सिंह पुरी ने फरवरी में क्या सफाई दी थी?

एपस्टीन फाइल्स में अपना नाम और संपर्कों का जिक्र सामने आने के बाद पुरी ने फरवरी 2026 में प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया इंटरव्यू के जरिए अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि एपस्टीन से उनकी तीन या अधिकतम चार मुलाकातें हुई थीं। उनके मुताबिक, ये मुलाकातें 2014 से 2017 के बीच इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट और इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म से जुड़े काम के दौरान हुई थीं।

पुरी ने अपने संपर्कों को पेशेवर बताते हुए कहा था कि एपस्टीन से उनका कोई निजी रिश्ता नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह एपस्टीन के निजी द्वीप लिटिल सेंट जेम्स पर कभी नहीं गए और उन्हें मुलाकातों के समय उसके अपराधों की पूरी जानकारी नहीं थी।

हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों में पुरी और एपस्टीन के बीच ईमेल संवाद का भी उल्लेख हुआ था। इन संवादों में भारत में इंटरनेट आधारित उद्यमों और कारोबारी अवसरों से जुड़े विषयों पर चर्चा शामिल थी। कुछ ईमेल में इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर भी सवाल उठे थे, जिन पर पुरी ने अलग से स्पष्टीकरण दिया था।

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Alakha Singh is a Senior journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. At Livehindustan Alakha has worked on National, States and Utility beats (Career Beat in last 4 years mainly), Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma in Journalism from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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