HDFC Bank: ₹45 करोड़ की डील की जांच से हिला HDFC Bank का शेयर, सबसे बड़े प्राइवेट बैंक पर उठे सवाल

HDFC Bank Share News 2026: ₹45 करोड़ के कथित डिफरेंशियल इंटरेस्ट भुगतान की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद HDFC Bank के शेयर पर दबाव बढ़ा और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर सवाल उठने लगे

Jyotsana Singh
Published on: 30 May 2026 3:20 PM IST
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HDFC Bank Share News 2026

HDFC Bank Share News 2026: अभी तक बैंक जहां लोगों के लिए नकदी को सुरक्षित रखने का सबसे भरोसेमंद विकल्प माने जाते थे वहीं अब इनकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगने लगा है। इसी कड़ी में देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक पर महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को किए गए ₹45 करोड़ के कथित डिफरेंशियल इंटरेस्ट भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में बैंक के भीतर हुई सतर्कता जांच का खुलासा होने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई और बैंक का शेयर एक ही दिन में 2 प्रतिशत से अधिक टूट गया। हालांकि बैंक ने साफ किया है कि सभी मामलों को उसकी स्थापित प्रक्रियाओं और नियमों के तहत निपटाया गया है। लेकिन रिपोर्ट में सामने आए दावों ने बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

रिपोर्ट सामने आते ही निवेशकों में बढ़ी बेचैनी

बीते बुधवार को एचडीएफसी बैंक का शेयर बीएसई पर 2.27 प्रतिशत तक गिरकर ₹761.25 के स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सुबह 10:15 बजे शेयर करीब 1.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹764.20 पर ट्रेड कर रहा था। शेयर में यह दबाव उस रिपोर्ट के बाद देखने को मिला जिसमें दावा किया गया कि बैंक के भीतर महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को किए गए ₹45 करोड़ के भुगतान की आंतरिक जांच की गई थी। बैंकिंग सेक्टर में कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े मामलों को निवेशक बेहद गंभीरता से लेते हैं, इसलिए इस खबर का असर सीधे शेयर पर दिखाई देना शुरू हो गया।

ये है पूरा मामला?

रिपोर्ट के अनुसार, एचडीएफसी बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को कुछ जमा राशियों पर अतिरिक्त ब्याज या डिफरेंशियल इंटरेस्ट देने की व्यवस्था की थी। आरोप है कि यह भुगतान सीधे ब्याज के रूप में नहीं किया गया, बल्कि इसे अलग तरीके से प्रोसेस किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि इस राशि को बैंक के मार्केटिंग विभाग के माध्यम से भेजा गया और इसे सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान से जुड़े खर्च के रूप में दिखाया गया। इसके लिए कथित तौर पर चार स्थानीय विक्रेताओं का इस्तेमाल किया गया। यही पहलू बाद में बैंक के आंतरिक ऑडिट और सतर्कता जांच का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।

ऑडिट में उठे सवाल, फिर शुरू हुई जांच

जानकारी के मुताबिक, बैंक के मार्केटिंग विभाग की आंतरिक ऑडिट समीक्षा में कुछ लेन-देन पर सवाल उठाए गए थे। ऑडिट रिपोर्ट में विभाग के कामकाज को असंतोषजनक बताया गया। इसके बाद 12 मार्च को बैंक के बोर्ड की ऑडिट कमेटी ने मामले की जांच के निर्देश दिए। रिपोर्ट के अनुसार, यह जांच उस समय शुरू हुई जब बैंक के तत्कालीन चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती अपना कार्यकाल समाप्त करने वाले थे।

जांच का उद्देश्य यह समझना था कि भुगतान की संरचना किस तरह की गई और क्या बैंक की प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन हुआ था।

सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा के घेरे में

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शशिधर जगदीशन उन बैठकों में मौजूद थे, जहां एमएसआरडीसी को अतिरिक्त भुगतान देने पर चर्चा हुई थी। जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि वे उस बैठक का हिस्सा थे जिसमें यह विचार किया गया था कि अंतर ब्याज राशि की भरपाई किस प्रकार की जाए। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि भुगतान को मार्केटिंग बजट के जरिए एकमुश्त व्यवस्था के रूप में देने का निर्णय लिया गया था। हालांकि रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर बैंक की ओर से किसी व्यक्तिगत अधिकारी के खिलाफ कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई है।

मार्केटिंग विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक के मुख्य विपणन अधिकारी (CMO) रवि संथनम ने जांच के दौरान यह स्वीकार किया कि मार्केटिंग विभाग ने इस प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी। जांच में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाए गए भुगतान वास्तव में विपणन गतिविधियों (Marketing Activities) से जुड़े थे या फिर उनका उद्देश्य किसी अन्य वित्तीय दायित्व को पूरा करना था। यही कारण है कि मामले को सामान्य अकाउंटिंग एंट्री से आगे बढ़कर गवर्नेंस और अनुपालन (Compliance) के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

बोर्ड की समितियों तक पहुंची रिपोर्ट

बताया गया है कि सतर्कता जांच के निष्कर्ष 10 अप्रैल को बैंक की ऑडिट कमेटी के सामने पेश किए गए थे। इसके करीब एक सप्ताह बाद इन्हें नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) के समक्ष भी रखा गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि बैंक के शीर्ष स्तर पर मामले की समीक्षा की गई और विभिन्न समितियों ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्थिति का आकलन किया।

एचडीएफसी बैंक ने क्या कहा?

इस विवाद के बढ़ने के बाद एचडीएफसी बैंक ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि, उसके पास मजबूत आंतरिक निगरानी, ऑडिट और नियंत्रण प्रणालियां मौजूद हैं।

बैंक ने कहा कि सभी मामलों को उसकी स्थापित नीतियों और प्रक्रियाओं के अनुसार निपटाया जाता है तथा किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। बैंक ने यह भी संकेत दिया कि आंतरिक समीक्षा और नियंत्रण तंत्र उसके नियमित संचालन का हिस्सा हैं और इन्हें संस्थागत व्यवस्था के तहत संचालित किया जाता है। इस घटना के बाद एचडीएफसी बैंक के शेयर प्रदर्शन पर एक नजर

डालें तो हालिया गिरावट के बावजूद एचडीएफसी बैंक का दीर्घकालिक प्रदर्शन मजबूत रहा है। पिछले तीन महीनों में शेयर करीब 3 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं 2026 में अब तक इसमें लगभग 11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। दो वर्षों में शेयर ने करीब 20 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, जबकि पांच वर्षों के दौरान इसमें लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। बाजार विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को फिलहाल प्रतिष्ठा और गवर्नेंस से जुड़े जोखिम के रूप में देख रहे हैं, न कि बैंक के मूल कारोबार पर तत्काल प्रभाव डालने वाली वजह के रूप में।

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Content Writer Mail ID - jyotsana.b.singh@gmail.com

Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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