इस्लाम में रोजा क्यों है हर मुसलमान पर फर्ज? जानें क्या है इसका इतिहास और 'दूसरी हिजरी' से जुड़ा दिलचस्प सच!

Ramadan History In Islam: इस्लाम में रोजा क्यों और कब फर्ज हुआ? जानें रमजान का इतिहास, 'दूसरी हिजरी' का सच और सहरी-इफ्तार के जरूरी नियम। भारत में कब है पहला रोजा और किन लोगों को मिली है रोजा रखने से छूट? पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Harsh Sharma
Published on: 17 Feb 2026 6:49 PM IST (Updated on: 17 Feb 2026 6:49 PM IST)
इस्लाम में रोजा क्यों है हर मुसलमान पर फर्ज? जानें क्या है इसका इतिहास और दूसरी हिजरी से जुड़ा दिलचस्प सच!
X

Ramadan History In Islam: रमजान का मुकद्दस महीना शुरू होने वाला है और दुनिया भर के मुसलमानों के लिए यह महीना खुशियों, बरकतों और रहमतों की सौगात लेकर आता है। भारत में इस साल रमजान के महीने की शुरुआत को लेकर उलेमाओं ने बड़ी घोषणा कर दी है। मौलाना खालिद रशीदी फिरंगी महली समेत तमाम मुस्लिम संगठनों ने साफ किया है कि सोमवार को भारत में चांद नजर नहीं आया है, जिसका मतलब है कि मंगलवार शाम को चांद देखे जाने की पूरी संभावना है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो बुधवार 14 अप्रैल को भारत में पहला रोजा रखा जाएगा। इस्लाम का यह नौवां महीना न केवल भूख-प्यास पर काबू पाने का नाम है, बल्कि यह रूह को पवित्र करने और इंसानियत की सेवा करने का सबसे बड़ा जरिया है।

इस्लाम के पांच स्तंभों में क्यों खास है रोजा?

इस्लाम धर्म की नींव पांच मूलभूत सिद्धांतों (फाइव पिलर्स) पर टिकी है और रोजा उनमें से एक अहम स्तंभ है। पहला तौहीद यानी अल्लाह को एक मानना, दूसरा नमाज, तीसरा जकात (दान), चौथा रोजा और पांचवां हज। रोजे को अरबी में 'सौम' कहा जाता है, जिसका अर्थ है रुकना या खुद पर नियंत्रण करना। यह केवल खाने-पीने से रुकना नहीं है, बल्कि बुरी आदतों, झूठ और गलत कामों से खुद को बचाने की एक ट्रेनिंग है। जानकारों के मुताबिक, रोजा रखने की यह परंपरा दूसरी हिजरी में शुरू हुई थी, जब पैगंबर मोहम्मद साहब मक्का से मदीना पहुंचे थे। कुरान की सूरह अल बकरा में भी इसका जिक्र है कि रोजा तुम पर उसी तरह फर्ज किया गया है जैसे तुमसे पहले की उम्मतों पर था।

सहरी से इफ्तार तक

रमजान के महीने में रोजेदार सूर्योदय से पहले 'सहरी' करते हैं और उसके बाद पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हैं। सूर्यास्त के समय 'इफ्तार' के साथ रोजा खोला जाता है। लेकिन मौलानाओं का कहना है कि रोजा सिर्फ पेट का नहीं होता, बल्कि आंखों, जुबान और हाथों का भी होता है। रोजे की हालत में किसी को जुबान से तकलीफ देना या किसी का नुकसान करना रोजे की रूह के खिलाफ है। यह महीना इंसान को 'परहेजगार' बनाने के लिए आता है, ताकि वह साल के बाकी 11 महीनों में भी नेक रास्ते पर चल सके।

किसे मिली है छूट और क्या हैं जरूरी नियम?

इस्लाम एक व्यावहारिक धर्म है, इसलिए इसमें हर किसी पर सख्ती नहीं की गई है। बीमार लोगों, यात्रियों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को रोजा रखने से छूट दी गई है। महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भी रोजा न रखने की इजाजत है, हालांकि उन छूटे हुए रोजों को बाद में पूरा करना जरूरी होता है। अगर कोई रोजे की हालत में बीमार पड़ता है, तो उसे इंजेक्शन लगवाने या ब्लड टेस्ट करवाने की अनुमति है, लेकिन दवा केवल सहरी या इफ्तार के समय ही ली जा सकती है। रमजान के अंतिम दस दिनों में 'लैलातुल कद्र' की रात आती है, जिसे हजारों महीनों से बेहतर माना गया है, जिसमें की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।

जकात और चैरिटी का खास महत्व

रमजान का महीना केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि गरीबों की मदद करने का भी महीना है। इस महीने में जकात का खास महत्व है। अगर किसी के पास अपनी जरूरत से ज्यादा साढ़े 52 तोला चांदी या उसके बराबर की नकदी है, तो उसे अपनी संपत्ति का ढाई फीसदी हिस्सा गरीबों में दान करना अनिवार्य है। इसके अलावा ईद से पहले 'फितरा' देना भी हर मुसलमान पर फर्ज है, ताकि गरीब लोग भी खुशी-खुशी ईद मना सकें। यह महीना सिखाता है कि अपनी खुशियों में दूसरों को शामिल करना ही सच्ची इबादत है।

Harsh Sharma

Harsh Sharma

Mail ID - harsha4avan@gmail.com

I began my journalism career as a Content Writer with India News (InKhabar), where I gained hands-on experience in writing fast-paced, digital-first news stories. Over the years, my professional journey has grown alongside News Track, where I currently work as a Content Writer, covering sports, politics, and viral news stories with clarity, impact, and audience appeal. I completed my Bachelor of Mass Media (BMM) from Vande Mataram Degree College, Dombivli, followed by a Post Graduate Diploma in TV Journalism from AAFT, Delhi, which strengthened my understanding of broadcast journalism, news production, and storytelling. In addition to digital journalism, I have also worked on short films and creative media projects, gaining practical exposure to scripting, storytelling, and visual communication. This creative background helps me present news in a compelling and engaging manner. At News Track, I specialize in writing sharp political analysis, sports updates, and trending viral content, ensuring accuracy, speed, and strong reader engagement. My writing style focuses on simplifying complex stories while keeping them impactful and reader-friendly. With a growing experience in the media industry, I aim to continue delivering credible, engaging, and high-quality journalism across digital platforms.

Next Story