दुर्गा शक्ति नागपाल ने जज को धमकाया? HC की सख्ती के बीच पहली बार IAS ने तोड़ी चुप्पी, बताया पूरा सच

IAS Durga Shakti Nagpal Row: जज को फोन कर दबाव बनाने के आरोपों के बीच IAS दुर्गा शक्ति नागपाल ने पहली बार सफाई दी है। उन्होंने कहा कि फोन केवल जज के छुट्टी से लौटने की जानकारी के लिए किया गया था और केस के मेरिट पर कोई चर्चा नहीं हुई। हाईकोर्ट ने मामले में सख्ती दिखाई है।

Harsh Srivastava
Published on: 25 Aug 2026 7:50 AM IST
दुर्गा शक्ति नागपाल ने जज को धमकाया? HC की सख्ती के बीच पहली बार IAS ने तोड़ी चुप्पी, बताया पूरा सच
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IAS Durga Shakti Nagpal Row: न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर दबाव बनाने के गंभीर आरोपों और आपराधिक अवमानना की कार्यवाही में घिरीं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए अपनी सफाई दी गई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका एकमात्र उद्देश्य 30 वर्षों से अधिक समय से उलझे सरकारी जमीन के मुकदमे में राज्य सरकार के पक्ष की मजबूत और पारदर्शी पैरवी सुनिश्चित कराना था।

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने सिविल जज के शिकायती पत्र में दर्ज कई आरोपों का पूरी तरह खंडन किया है। उन्होंने कहा कि फोन पर बातचीत के दौरान न तो मामले के गुण-दोष (मैरिट) पर कोई चर्चा हुई, न ही किसी आदेश या फैसले को लेकर बात की गई और न ही मुकदमे का नाम या संख्या का जिक्र किया गया।

क्या बोली दुर्गा शक्ति नागपाल

प्रशासनिक दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए मंडलायुक्त ने बताया कि बेशकीमती नजूल भूमि का यह मामला 1997 से यानी लगभग 30 वर्षों से लगातार अदालत में लंबित चला आ रहा है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस बेशकीमती जमीन का पट्टा वर्ष 1985 में ही निरस्त करके इसे आधिकारिक रूप से सरकार के नाम दर्ज कर दिया गया था। इसके बावजूद 2008 से बिना किसी वैध कानूनी कागजात के केवल एक साधारण कागज के आधार पर इस पर कथित पट्टा होने का दावा किया जा रहा है। इसी सरकारी जमीन पर एक निजी विद्यालय का निर्माण कर उसे संचालित भी किया जा रहा है।

'अवकाश से लौटने की अवधि जानने के लिए किया था फोन'

दुर्गा शक्ति नागपाल के अनुसार, नया पदभार ग्रहण करने के बाद जब उन्हें इस लंबी कानूनी जंग की जानकारी मिली, तो उनका प्राथमिक मकसद सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और अदालत में ढिलाई दूर करना था। जब यह पता नहीं चल पा रहा था कि संबंधित पीठासीन अधिकारी छुट्टी से वापस कब लौटेंगी या उनकी छुट्टी की अवधि आगे बढ़ेगी, तब उन्होंने केवल यह जानने के उद्देश्य से फोन किया था कि वे अदालत में कब कार्यभार संभाल रही हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जज के पत्र में उनकी 27 वर्षों की सेवा का जिक्र है, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि उनकी सेवा अवधि केवल 16 वर्ष (2010 बैच) की ही है। उन्होंने दोहराया कि वे न्याय प्रणाली की निष्पक्षता का पूरा सम्मान करती हैं।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच सख्त

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा निचली अदालत की पीठासीन अधिकारी को फोन किए जाने की घटना पर बेहद कड़ा और सख्त रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट ने दोटूक टिप्पणी करते हुए कहा कि जज पर दबाव बनाने का कोई भी प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और यह इंसाफ की प्रक्रिया में बाधा खड़ी करता है। न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की एकल पीठ ने ज्योति विद्या मंदिर स्कूल की ओर से गोण्डा सिविल कोर्ट से मुकदमा ट्रांसफर करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सख्त आदेश जारी किया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुरानी नजीरों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जजों पर दबाव या अनुचित प्रभाव डालने के मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ जज के दिशा-निर्देश प्राप्त कर इस मामले को आपराधिक अवमानना बेंच के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।

सिविल जज ने लगाया था धमकाने और भला-बुरा कहने का आरोप

पूरा मामला तब उजागर हुआ जब गोण्डा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान ने 4 अगस्त को जिला जज को एक शिकायती पत्र भेजा। पत्र में आरोप लगाया गया था कि 15 जुलाई को छुट्टी के दौरान मंडलायुक्त ने उन्हें फोन किया और केस पर बात करने की कोशिश की। जज ने जब फोन पर केस की चर्चा करने से मना किया तो आईएएस अफसर ने अपने पद और सीनियरिटी का धौंस दिखाते हुए उन्हें भला-बुरा कहा और हाईकोर्ट में शिकायत करने की चेतावनी दी। हाईकोर्ट ने माना कि बातचीत के लहजे से स्पष्ट होता है कि पीठासीन अधिकारी को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

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Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

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