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'IAS मत बनना', अपने बच्चों को ऐसी सलाह क्यों दे रहे तुकाराम मुंढे? दे दिया ये 2 ऑप्शन
महाराष्ट्र के वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने कहा कि वह अपने बच्चों को IAS बनने के बजाय जननेता या उद्यमी बनने की सलाह देंगे।
Tukaram Mundhe: देश में लाखों युवा IAS अधिकारी बनने का सपना देखते हैं। इसके लिए वे सालों तक पढ़ाई करते हैं और UPSC की कठिन परीक्षा पास करने की तैयारी में जुटे रहते हैं। लेकिन महाराष्ट्र के एक सीनियर IAS अधिकारी ने अपने ही बच्चों को इस करियर से दूर रहने की सलाह देने की बात कही है। उनका कहना है कि अगर भविष्य में उनके बच्चे उनसे पूछेंगे कि क्या उन्हें IAS बनना चाहिए, तो उनका जवाब साफ होगा—नहीं।
यह बात महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर और वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने एक इंटरव्यू के दौरान कही। पिंपरी-चिंचवड़ में हुई बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वह अपने बच्चों को IAS बनने के बजाय समाज के विकास में सीधे योगदान देने वाला जननेता या उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करना चाहेंगे। उनके इस बयान के पीछे प्रशासनिक सेवा में काम करने के दौरान खुद और अपने परिवार के साथ हुए अनुभवों को एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
बच्चों से IAS बनने के बारे में पूछा गया तो क्या कहेंगे मुंढे?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुकाराम मुंढे से पूछा गया कि अगर उनके बच्चे भविष्य में सिविल सेवा में जाना चाहें या सफल उद्यमी बनना चाहें, तो वह उन्हें क्या सलाह देंगे। इस पर मुंढे ने कहा कि अगर उनके बच्चे उनसे सीधे IAS बनने के बारे में पूछेंगे, तो वह उन्हें ऐसा करने से मना करेंगे।
उनका कहना था कि वह अपने बच्चों को इस करियर के बजाय ऐसा रास्ता चुनने के लिए प्रेरित करेंगे, जहां वे अपनी सोच और क्षमता के अनुसार काम कर सकें। मुंढे के मुताबिक, जननेता बनकर भी समाज के विकास में योगदान दिया जा सकता है। इसी तरह, उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़कर भी लोग अपने विचारों को जमीन पर उतार सकते हैं।
IAS की नौकरी में परिवार को भी उठानी पड़ती है बड़ी कीमत
तुकाराम मुंढे ने अपने बयान में प्रशासनिक सेवा के उस पहलू की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसका असर केवल अधिकारी पर नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार पर पड़ता है। उनके मुताबिक, एक अधिकारी के तौर पर उन्होंने जनसेवा का रास्ता अपनी इच्छा से चुना और इस दौरान आने वाली मुश्किलों को अपनी जिम्मेदारी समझकर स्वीकार किया। लेकिन उनके परिवार को भी लगातार तबादलों और जगह बदलने की वजह से कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मुंढे का कहना है कि सरकारी सेवा में बार-बार होने वाले तबादलों का असर बच्चों की पढ़ाई, उनके दोस्तों और परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। जब परिवार को बार-बार एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़े, तो बच्चों के लिए एक जगह टिककर पढ़ाई करना और लंबे समय तक दोस्ती बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने अपने परिवार के अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उनके बेटे को पांचवीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही छह बार स्कूल बदलना पड़ा। लगातार स्कूल बदलने के कारण बच्चों को नए माहौल में खुद को ढालना पड़ता है। पुराने दोस्तों से दूर होने और नए स्कूल में फिर से शुरुआत करने जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं।
पत्नी और बच्चों की योजनाओं पर भी पड़ता रहा असर
मुंढे ने बताया कि बार-बार और अचानक होने वाले तबादलों का असर उनकी पत्नी की जिंदगी पर भी पड़ा। परिवार को जब कभी नई जगह जाना पड़ता था, तो उनकी पत्नी को अपनी निजी और घरेलू योजनाएं बीच में ही बदलनी पड़ती थीं।
ऐसे हालात में परिवार के लिए लंबे समय की योजनाएं बनाना आसान नहीं होता। एक जगह घर बसाने के बाद दूसरी जगह जाने की तैयारी करनी पड़ती है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की दिनचर्या तक, हर चीज को नए सिरे से व्यवस्थित करना पड़ सकता है।
मुंढे के अनुसार, उन्होंने अपनी नौकरी में आने वाली चुनौतियों को जनसेवा का हिस्सा मानकर स्वीकार किया। लेकिन उनके परिवार ने भी ऐसी कई कुर्बानियां दीं, जिनका जिक्र अक्सर प्रशासनिक सेवा की चर्चा में नहीं होता। यही वजह है कि वह अपने बच्चों के लिए एक ऐसा रास्ता चाहते हैं, जहां उन्हें अपने फैसले लेने की अधिक स्वतंत्रता मिल सके।
Gen-Z युवाओं को लेकर क्या बोले तुकाराम मुंढे?
अपने बयान में मुंढे ने आज की युवा पीढ़ी, खासकर Gen-Z की क्षमताओं का भी जिक्र किया। उनका मानना है कि आज के युवाओं में ऊर्जा, जानकारी और तेजी से काम करने की क्षमता है। ऐसे में उन्हें करियर चुनते समय अपनी रुचि, विचारों और संभावनाओं को ध्यान में रखना चाहिए।
मुंढे ने कहा कि युवाओं को ऐसे रास्ते चुनने चाहिए, जहां वे अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सकें और समाज के लिए कुछ नया कर सकें। उनके विचार में जननेतृत्व और उद्यमिता ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं, जिनके जरिए युवा समाज के विकास में योगदान दे सकते हैं।
कौन हैं तुकाराम मुंढे?
तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं। उन्हें सख्त प्रशासनिक कार्यशैली, नियमों के पालन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए जाना जाता है। अपने करियर के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र में कई अहम पदों पर काम किया है।
वह नवी मुंबई, नासिक और नागपुर जैसे शहरों में नगर आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने नागपुर और वाशिम जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर भी काम किया है। वह पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML) के प्रबंध निदेशक और दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव जैसे पदों पर भी रह चुके हैं।
21 साल के करियर में 25 से ज्यादा तबादलों का दावा
तुकाराम मुंढे के करियर की चर्चा में उनके बार-बार हुए तबादलों का जिक्र भी आता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 21 साल की सेवा के दौरान उनका 25 से ज्यादा बार तबादला हुआ है। उनके तबादलों को लेकर अक्सर यह बहस होती रही है कि सख्त नियमों के मुताबिक काम करने वाले अधिकारियों को प्रशासनिक व्यवस्था में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
मुंढे के ताजा बयान को उनके इसी लंबे अनुभव और परिवार पर पड़े असर के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने जनसेवा का रास्ता खुद चुना था और नौकरी के दौरान आने वाली कठिनाइयों को स्वीकार किया। लेकिन अपने बच्चों के लिए वह ऐसा करियर चाहते हैं, जिसमें उन्हें अपनी दिशा चुनने की अधिक आजादी मिले।


