TRENDING TAGS :
40 विला, 6.16 करोड़ की खरीद और 1.80 करोड़ की सालाना कमाई! IAS शिखर अग्रवाल पर सरकार का बड़ा एक्शन
IAS Shikhar Agarwal News: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आईएएस शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर सहित परिवार के सदस्यों ने एक ही कंपनी से बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदी थीं। इन संपत्तियों की खरीद और लीज से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद अधिकारियों की संपत्ति घोषणा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
IAS Shikhar Agarwal News: राजस्थान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को लेकर बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य सरकार ने उन्हें पदस्थापन की प्रतीक्षा यानी एपीओ (Awaiting Posting Orders) में रख दिया है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, यह कार्रवाई प्रशासनिक कारणों से की गई है। यह घटनाक्रम उनके परिवार के नाम पर 40 विला और कॉटेज की खरीद तथा बाद में इन्हें लीज पर देने से जुड़े मामले की चर्चा के बीच सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आईएएस शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर सहित परिवार के सदस्यों ने एक ही कंपनी से बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदी थीं। इन संपत्तियों की खरीद और लीज से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद अधिकारियों की संपत्ति घोषणा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
एक ही कंपनी से खरीदे गए 40 विला और कॉटेज
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और सास-ससुर के नाम पर गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से कुल 40 संपत्तियां खरीदी गईं। इनमें अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा क्षेत्र में 20 कॉटेज शामिल बताए गए हैं।
इन सभी संपत्तियों की खरीद पर कुल 6 करोड़ 16.5 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनमें से 28 विला और कॉटेज शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज हैं, जबकि बाकी संपत्तियां परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर हैं।
खरीद के बाद उसी कंपनी को लीज पर दी संपत्तियां
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा संपत्तियों को खरीदने के बाद उसी कंपनी को लीज पर देने को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, परिवार ने खरीदे गए सभी 40 विला और कॉटेज गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को ही किराये यानी लीज पर दे दिए।
बताया गया है कि उदयपुर के बुझड़ा स्थित 20 कॉटेज के लिए प्रति कॉटेज सालाना 4 लाख रुपये और अलवर के अजबगढ़ स्थित 20 विला के लिए प्रति विला सालाना 5 लाख रुपये की लीज राशि तय की गई थी। इस हिसाब से परिवार को हर साल कुल 1.80 करोड़ रुपये मिलने की बात सामने आई है।
हालांकि, इन लेन-देन की परिस्थितियों, संबंधित दस्तावेजों और किसी संभावित नियम उल्लंघन को लेकर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच या सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि के बाद ही निकाला जा सकता है।
संपत्ति घोषणा को लेकर भी उठे सवाल
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि शिखर अग्रवाल ने 7 जनवरी 2026 को दाखिल अपनी अचल संपत्ति की जानकारी यानी आईएपीआर (IPR) में 14 संपत्तियों का उल्लेख किया था। वहीं, प्रशाखा माथुर की ओर से 8 जनवरी 2026 को दाखिल विवरण में संपत्ति संबंधी जानकारी शून्य बताई गई थी।
अब परिवार के नाम पर 40 संपत्तियों की खरीद और उनसे होने वाली कथित लीज आय की जानकारी सामने आने के बाद संपत्ति विवरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन घोषणाओं और संपत्तियों के रिकॉर्ड के बीच अंतर का कारण क्या है, यह संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कई बड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे शिखर अग्रवाल
शिखर अग्रवाल राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में शामिल हैं। वे अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके अलावा वे रीको (RIICO), निवेश संवर्धन ब्यूरो (BIP) और औद्योगिक विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्यरत थे।
फिलहाल सरकार ने उन्हें एपीओ कर दिया है। इस मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और संपत्ति से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पर नजर रहेगी।


