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PoK में इफ्तिखार अली गिलानी बने नए प्रधानमंत्री, हिंसक विरोध और धांधली के आरोपों के बीच हुआ चुनाव
PML-N के बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के प्रधानमंत्री चुने गए हैं।
PoK: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में शुक्रवार को बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को प्रधानमंत्री चुना गया। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के नेता गिलानी ने विधानसभा में 44 में से 30 वोट हासिल किए। उनके सामने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के उम्मीदवार मुख्तार अहमद थे, जिन्हें 14 वोट मिले।
PoK में यह चुनाव ऐसे समय हुआ है, जब हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए गए थे। ऐसे में गिलानी के चुनाव के बाद क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ने की संभावना है।
गिलानी को मिले 30 वोट
मुजफ्फराबाद में विधानसभा के सत्र के दौरान प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए मतदान हुआ। कुल 44 सदस्यों ने वोट डाला। PML-N के इफ्तिखार अली गिलानी को 30 वोट मिले, जबकि PPP के मुख्तार अहमद को 14 वोट मिले।
53 सदस्यीय विधानसभा की मौजूदा संख्या 46 है। पुंछ और सुधनौती जिलों की सात सीटों पर कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अभी चुनाव नहीं हो पाए हैं। शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। वहीं PML-N के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर पार्टी से मतभेद के चलते विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हुए। इस वजह से कुल 44 विधायकों ने मतदान किया।
नवाज शरीफ ने गिलानी के नाम पर लगाई थी मुहर
PML-N प्रमुख नवाज शरीफ ने गुरुवार को इफ्तिखार अली गिलानी को प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया था। इसके अगले ही दिन उन्होंने विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया।
गिलानी इससे पहले सीधे चुनाव में एक सीट से हार गए थे। इसके बाद उन्हें टेक्नोक्रेट के लिए आरक्षित सीट के जरिए विधानसभा में जगह मिली। अब उसी विधानसभा में उन्होंने प्रधानमंत्री पद हासिल कर लिया है।
विधानसभा में PML-N का दबदबा
PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जबकि आठ सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट और धार्मिक प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित हैं। सीधे चुनाव वाली 38 सीटों के नतीजों में PML-N को 25 सीटें मिली हैं। PPP ने 12 सीटें जीतीं, जबकि Awami Dast-o-Bazu पार्टी को एक सीट मिली। इस एक सीट के विजेता ने PML-N का समर्थन किया।
आरक्षित आठ सीटों में भी PML-N ने छह सीटों पर जीत हासिल की, जबकि PPP को दो सीटें मिलीं। इस तरह विधानसभा में PML-N की स्थिति काफी मजबूत है।
चुनाव से पहले हुए हिंसक प्रदर्शन
PoK में हालिया चुनाव विवादों से पूरी तरह दूर नहीं रहे। 27 जुलाई, 2 अगस्त और 3 अगस्त को तीन चरणों में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। चुनाव में धांधली के आरोप भी लगाए गए। इस दौरान क्षेत्र में कई जगह तनाव की स्थिति बनी रही।
पिछले कुछ समय से Joint Awami Action Committee यानी JAAC के बैनर तले भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चल रहे हैं। यह संगठन जून की शुरुआत से क्षेत्र में कई मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहा है। प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की मौत की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद क्षेत्रीय सरकार ने जून में JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था।
आरक्षित सीटों को लेकर JAAC का विरोध
JAAC की प्रमुख मांगों में विधानसभा की 12 आरक्षित शरणार्थी सीटों का मुद्दा भी शामिल है। संगठन इन सीटों को लेकर लंबे समय से विरोध कर रहा है। ऐसे में गिलानी का प्रधानमंत्री बनना इस विरोध को और हवा दे सकता है, क्योंकि वह खुद सीधे चुनाव में हारने के बाद आरक्षित टेक्नोक्रेट सीट से विधानसभा पहुंचे हैं। यही वजह है कि गिलानी के चुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
भारत का PoK पर स्पष्ट रुख
भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे क्षेत्र भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नई दिल्ली का कहना है कि पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।
भारत PoK को लेकर पाकिस्तान के दावों को स्वीकार नहीं करता और जम्मू-कश्मीर के संबंध में अपनी संप्रभुता की स्थिति को लगातार दोहराता रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में PoK में नई सरकार का गठन हुआ है। अब इफ्तिखार अली गिलानी के सामने क्षेत्र में राजनीतिक असंतोष, विरोध प्रदर्शनों और शासन से जुड़े मुद्दों को संभालने की बड़ी चुनौती होगी।


