PM मोदी के जन्मदिन पर दीये न जलाना पड़ा भारी? IIM जम्मू ने थमाया नोटिस, 500 रुपये जुर्माने का दावा

PM Modi Birthday Controversy: पीएम मोदी के जन्मदिन पर IIM जम्मू में छात्रों को नोटिस और 500 रुपये जुर्माने की चेतावनी के दावे से विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस नेता ने कार्यक्रम और अनिवार्य उपस्थिति पर सवाल उठाए।

Aditya Kumar Verma
Published on: 20 Sept 2026 10:08 AM IST
IIM Jammu PM Modi Birthday Controversy
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PM Modi Birthday Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 सितंबर को 76वां जन्मदिन मनाया गया। देशभर में उनके जन्मदिन को लेकर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं दीये जलाए गए तो कहीं सेवा संकल्प अभियान (Seva Sankalp Campaign) के तहत स्वच्छता और दूसरे सेवा कार्य किए गए। लेकिन इसी बीच जम्मू के भारतीय प्रबंध संस्थान यानी आईआईएम जम्मू (IIM Jammu) में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

कांग्रेस नेता सैयद नासिर हुसैन (Syed Naseer Hussain) ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम (Lamp Lighting Ceremony) में शामिल नहीं होने वाले छात्रों को नोटिस दिया गया। उनका दावा है कि छात्रों से गैरहाजिरी का कारण पूछा गया और जवाब नहीं देने पर 500 रुपये जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई।

हालांकि, बाद में आईआईएम जम्मू की ओर से कहा गया कि किसी छात्र पर 500 रुपये का जुर्माना नहीं लगाया गया है। संस्थान की ओर से यह भी कहा गया कि मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता ने साझा किया ईमेल

सैयद नासिर हुसैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक कथित ईमेल और नोटिस का स्क्रीनशॉट साझा किया। उनका कहना था कि आईआईएम जम्मू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को दीप जलाने का कार्यक्रम रखा गया था और छात्रों को इसमें शामिल होने के लिए कहा गया था।

हुसैन के मुताबिक, साझा किए गए ईमेल में कार्यक्रम में छात्रों की मौजूदगी को अनिवार्य बताया गया था। उन्होंने इसी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी प्रधानमंत्री के जन्मदिन के कार्यक्रम में छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य क्यों होनी चाहिए।

रिपोर्टों के मुताबिक, कथित नोटिस में गैरहाजिर छात्रों से लिखित में कारण बताने को कहा गया था और जवाब नहीं देने पर 500 रुपये के जुर्माने की चेतावनी का भी जिक्र था।

'शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक प्रचार की जगह नहीं'

कांग्रेस नेता सैयद नासिर हुसैन ने इस मामले को लेकर आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रों को स्वतंत्र सोच रखने वाला बनाया जाना चाहिए और उन्हें किसी राजनीतिक नेता के समारोह में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

हुसैन ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में छात्रों की मौजूदगी अनिवार्य करना आखिर किस तरह की शैक्षणिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या किसी राजनीतिक नेता का प्रचार किसी शैक्षणिक परिसर में अनिवार्य गतिविधि के रूप में लाया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का काम स्वतंत्र सोच रखने वाले लोगों को तैयार करना है, न कि छात्रों को नेताओं के समारोहों में शामिल होने के लिए मजबूर करना या उन्हें दंड की चेतावनी देना।


IIM जम्मू ने क्या कहा?

इस पूरे विवाद के बीच आईआईएम जम्मू की ओर से जुर्माना लगाए जाने के दावे को खारिज किया गया। संस्थान के मुताबिक, किसी भी छात्र पर 500 रुपये का जुर्माना नहीं लगाया गया है। संस्थान की ओर से यह भी कहा गया कि मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

बाद की रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि जिस ईमेल को लेकर विवाद हुआ, वह आईआईएम जम्मू के प्रशासन की बजाय स्टूडेंट्स काउंसिल (Students Council) की ओर से जारी किया गया था। हालांकि, इस मामले को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में नोटिस और उसकी भाषा का जिक्र किया गया है, जिसके कारण विवाद और बढ़ गया।

17 सितंबर को हुआ था कार्यक्रम

आईआईएम जम्मू में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। संस्थान की ओर से बताया गया कि यह कार्यक्रम अकादमिक ब्लॉक के मुख्य रिसेप्शन पर आयोजित हुआ।

आईआईएम जम्मू ने इस आयोजन को विकसित भारत 2047 (Viksit Bharat 2047) की दिशा में भारत की विकास यात्रा से जोड़कर भी पेश किया था। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय मौजूद थे। बीजेपी विधायक युद्धवीर सेठी भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। यही कार्यक्रम अब छात्रों की कथित अनिवार्य उपस्थिति और 500 रुपये के जुर्माने की चेतावनी को लेकर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।

अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिन के मौके पर आयोजित कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों का मुद्दा उठाया।

अखिलेश यादव ने सवाल किया कि जिन लोगों के घर बाढ़ में तबाह हो गए हैं और जो राहत सामग्री की कमी से जूझ रहे हैं, क्या बीजेपी को उनकी जरा भी चिंता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रमों और बाढ़ प्रभावित लोगों की स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए।

वाराणसी से वडनगर तक बाइक यात्रा पर भी तंज

अखिलेश यादव ने वाराणसी से वडनगर तक शुरू की गई बाइक यात्रा का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर सेवा संकल्प बाइक यात्रा आयोजित की गई थी। वाराणसी और वडनगर से जुड़ी इस यात्रा को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के कार्यक्रमों से भी जोड़ा गया।

अखिलेश यादव ने इस बाइक यात्रा पर तंज करते हुए सवाल किया कि क्या इन बाइकों से विदेशी मुद्रा से खरीदा गया तेल बर्बाद नहीं होगा। इस तरह उन्होंने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर हो रहे कार्यक्रमों को बाढ़ पीड़ितों की स्थिति से जोड़ते हुए बीजेपी पर सवाल उठाए।

अब विवाद के दो पहलू

आईआईएम जम्मू के मामले में एक तरफ कांग्रेस नेता सैयद नासिर हुसैन का आरोप है कि छात्रों को प्रधानमंत्री के जन्मदिन के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने पर नोटिस दिया गया और जवाब नहीं देने पर 500 रुपये जुर्माने की चेतावनी दी गई। दूसरी तरफ संस्थान का कहना है कि किसी छात्र पर जुर्माना लगाया ही नहीं गया और मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रमों को लेकर विपक्ष के सवाल भी सामने आए हैं। आईआईएम जम्मू का मामला अब शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे आयोजनों की प्रकृति और छात्रों की भागीदारी को लेकर बहस का नया मुद्दा बन गया है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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