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पाकिस्तान में सताए अल्पसंख्यकों को बड़ी राहत! इमिग्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव, समझें पूरा मामला
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए पात्र लोगों को पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों से जुड़ी कुछ शर्तों में छूट मिलेगी।
CAA Rule: केंद्र सरकार ने इमिग्रेशन और विदेशी नागरिकों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 4 नवंबर को जारी नए संशोधन के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को कुछ जरूरी दस्तावेजों की शर्तों से छूट दी गई है। यह राहत उन लोगों को मिलेगी, जो 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत आए थे।
इस फैसले की खास बात यह है कि अब ऐसे लोगों को वैध पासपोर्ट, यात्रा दस्तावेज या वीजा नहीं होने अथवा उनके दस्तावेजों की अवधि समाप्त हो जाने के आधार पर कुछ इमिग्रेशन नियमों से छूट मिल सकेगी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वे बिना किसी प्रक्रिया के हमेशा भारत में रह सकते हैं। आदेश में साफ किया गया है कि भारत में आगे रहने के लिए उन्हें उचित श्रेणी का वीजा लेना होगा।
CAA की समयसीमा और नए नियम की तारीख अलग-अलग
सरकार के इस फैसले को समझने के लिए नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA और नए इमिग्रेशन आदेश के बीच का अंतर जानना जरूरी है। CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए छह समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता पाने का विशेष रास्ता दिया गया है। इसके लिए शर्त है कि वे 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत आए हों और कानून में तय अन्य शर्तें भी पूरी करते हों।
अब नए इमिग्रेशन संशोधन में यह समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2024 कर दी गई है। लेकिन यह बदलाव सिर्फ इमिग्रेशन से जुड़ी राहत के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि CAA के तहत नागरिकता पाने की समयसीमा भी 10 साल आगे बढ़ गई है।
2015 से 2024 के बीच भारत आए लोगों को क्या फायदा होगा?
नए आदेश का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2024 के बीच भारत आए हैं। इनमें तय छह समुदायों के वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने धार्मिक उत्पीड़न या उसके डर से अपना देश छोड़ा और भारत पहुंचे।
ऐसे लोगों को अब केवल वैध पासपोर्ट, यात्रा दस्तावेज या वीजा नहीं होने के कारण अवैध विदेशी मानने की स्थिति से राहत मिल सकती है। जिनके दस्तावेजों की अवधि खत्म हो चुकी है, उन्हें भी इस छूट का फायदा मिल सकता है। हालांकि, भारत में आगे रहने के लिए उचित श्रेणी का वीजा लेना जरूरी होगा।
नागरिकता और भारत में रहने का अधिकार अलग-अलग
सरकार के नए फैसले में सबसे अहम बात यही है कि भारतीय नागरिकता और देश में कानूनी रूप से रहने के अधिकार को अलग-अलग रखा गया है।
जो लोग 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ चुके थे और CAA की बाकी शर्तें पूरी करते हैं, वे इस कानून के तहत नागरिकता के विशेष प्रावधानों के लिए पात्र हो सकते हैं। वहीं, 2015 से 31 दिसंबर 2024 के बीच आए लोगों को नए इमिग्रेशन नियमों के तहत राहत मिलेगी। उनके भारत में रहने की स्थिति को उचित वीजा प्रक्रिया के जरिए नियमित किया जा सकेगा।
सरकार के फैसले का राजनीतिक असर
इस संशोधन का राजनीतिक महत्व भी है। सरकार ने CAA के तहत नागरिकता पाने की 31 दिसंबर 2014 वाली समयसीमा में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन इमिग्रेशन नियमों के तहत तय समुदायों को मिलने वाली राहत की अवधि 10 साल बढ़ा दी है।
यानी अब 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए पात्र समुदायों के लोगों को पासपोर्ट और वीजा से जुड़ी कुछ शर्तों में छूट मिल सकती है। लेकिन CAA के तहत नागरिकता पाने का विशेष रास्ता अब भी 31 दिसंबर 2014 की समयसीमा से ही जुड़ा रहेगा।
कुल मिलाकर, यह संशोधन CAA में बदलाव नहीं करता, बल्कि इमिग्रेशन कानूनों के तहत कुछ समुदायों के लोगों को भारत में कानूनी रूप से रहने के लिए राहत देने का अलग रास्ता तैयार करता है।


