India Scientific Superpower: भारत 2047—वैज्ञानिक महाशक्ति बनने का राष्ट्रीय रोडमैप

India Scientific Superpower: भारत 2047 का रोडमैप! कैसे बनेगा दुनिया की अगली वैज्ञानिक महाशक्ति?

Yogesh Mishra
Published on: 23 July 2026 7:20 PM IST
India Scientific Superpower 2027
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India Scientific Superpower 2027

India Scientific Superpower: भारत ने स्वतंत्रता के बाद अनेक ऐसे कार्य किए जिन्हें असंभव माना जाता था। खाद्यान्न संकट से आत्मनिर्भरता तक की यात्रा, परमाणु कार्यक्रम का निर्माण, अंतरिक्ष विज्ञान में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का विकास, विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान तंत्र, कम लागत पर टीका निर्माण और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल अभियान—ये सभी इस बात के प्रमाण हैं कि भारत में क्षमता की कमी नहीं है। समस्या क्षमता की नहीं बल्कि उसे राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने की है। यदि भारत 2047 तक वास्तव में विकसित और वैज्ञानिक दृष्टि से अग्रणी राष्ट्र बनना चाहता है, तो उसे अगले दो दशकों में कुछ ऐसे निर्णय लेने होंगे जिनका प्रभाव आने वाली कई पीढ़ियों तक दिखाई देगा।

सबसे पहले भारत को विज्ञान को व्यय नहीं बल्कि राष्ट्रीय पूँजी मानना होगा। सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे और बिजली संयंत्र जितने आवश्यक हैं, उतनी ही आवश्यक आधुनिक प्रयोगशालाएँ, सुपरकंप्यूटिंग केंद्र, सेमीकंडक्टर शोध संस्थान, जैव-प्रौद्योगिकी परिसर और राष्ट्रीय डेटा अवसंरचना भी हैं। किसी देश की आर्थिक उत्पादकता अब केवल मशीनों से नहीं बल्कि ज्ञान से निर्धारित होती है। इसलिए विज्ञान पर किया गया निवेश भविष्य की आय, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा—तीनों में निवेश है।

दूसरा कदम शिक्षा व्यवस्था का व्यापक पुनर्गठन होना चाहिए। विद्यालय स्तर पर विज्ञान को केवल परीक्षा का विषय नहीं। बल्कि प्रयोग, जिज्ञासा और समस्या-समाधान की प्रक्रिया के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा में प्रत्येक विद्यार्थी को प्रयोगशाला आधारित शिक्षा उपलब्ध हो। उच्च शिक्षा में स्नातक स्तर से ही शोध परियोजनाएँ अनिवार्य बनाई जाएँ। विश्वविद्यालयों को स्थानीय उद्योगों, कृषि संस्थानों, अस्पतालों और नगर निकायों के साथ जोड़कर वास्तविक समस्याओं पर अनुसंधान कराया जाए। विज्ञान तभी जीवंत बनेगा जब वह पाठ्यपुस्तक से निकलकर समाज में दिखाई देगा।


तीसरा और सबसे महत्त्वपूर्ण सुधार अनुसंधान वित्तपोषण का है। भारत को चरणबद्ध ढंग से अनुसंधान एवं विकास पर कुल व्यय को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 2040 के आसपास GDP के लगभग दो प्रतिशत तक ले जाने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। लेकिन धन बढ़ाने के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि अनुदान समय पर मिले, मूल्यांकन पारदर्शी हो, युवा वैज्ञानिकों को स्वतंत्र परियोजनाएँ मिलें और उत्कृष्टता को राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाए।

चौथा सुधार उद्योग नीति से जुड़ा है। भारत को सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर ज्ञान-आधारित विनिर्माण अर्थव्यवस्था बनना होगा। इसके लिए सेमीकंडक्टर, उच्च क्षमता वाली बैटरियाँ, औद्योगिक रोबोट, चिकित्सा उपकरण, वैज्ञानिक यंत्र, क्वांटम हार्डवेयर, उन्नत सामग्री, एयरोस्पेस और रक्षा तकनीक को राष्ट्रीय प्राथमिकता देनी होगी। इन क्षेत्रों में निजी उद्योग अकेले जोखिम नहीं उठाएगा; सरकार को सह-वित्तपोषण, प्रारंभिक खरीद और दीर्घकालिक नीति स्थिरता प्रदान करनी होगी।

पाँचवाँ सुधार प्रतिभा नीति का है। भारत को दुनिया भर में कार्यरत भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए एक स्थायी ‘ग्लोबल इंडियन साइंस नेटवर्क’ स्थापित करना चाहिए। इसका उद्देश्य केवल उन्हें वापस बुलाना नहीं। बल्कि उन्हें भारतीय विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और उद्योगों से नियमित रूप से जोड़ना होना चाहिए। संयुक्त प्रयोगशालाएँ, सह-नियुक्तियाँ, ऑनलाइन शोध समूह, साझा पीएचडी कार्यक्रम और स्टार्टअप निवेश—इनके माध्यम से भारत वैश्विक भारतीय प्रतिभा को राष्ट्रीय विकास का सक्रिय भागीदार बना सकता है।

छठा सुधार वैज्ञानिक प्रशासन का है। किसी वैज्ञानिक को उपकरण खरीदने, परियोजना स्वीकृत कराने या नियुक्ति करने में महीनों अथवा वर्षों का समय नहीं लगना चाहिए। वैज्ञानिक संस्थानों को वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता दी जाए। लेकिन उसके साथ कठोर और पारदर्शी उत्तरदायित्व भी सुनिश्चित किया जाए। विज्ञान में गति उतनी ही महत्त्वपूर्ण है जितनी गुणवत्ता।

सातवाँ सुधार राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का स्पष्ट निर्धारण है। भारत को हर क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन कुछ क्षेत्रों में उसे अवश्य अग्रणी बनना चाहिए—जैसे कृषि प्रौद्योगिकी, कम लागत वाली स्वास्थ्य तकनीक, स्थानीय भाषाओं की कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष अनुप्रयोग, जैव-प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, साइबर सुरक्षा, चिप डिजाइन, क्वांटम संचार और उन्नत रक्षा प्रणालियाँ। सीमित संसाधनों का प्रभावी उपयोग तभी होगा जब राष्ट्रीय लक्ष्य स्पष्ट होंगे।

आठवाँ सुधार सामाजिक दृष्टिकोण का है। भारत में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को केवल सरकारी कर्मचारी नहीं। बल्कि राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। जिस प्रकार खिलाड़ी, कलाकार और उद्यमी समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं, उसी प्रकार वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी राष्ट्रीय गौरव का विषय बनाया जाना चाहिए। विज्ञान तभी फलता-फूलता है जब समाज उसे प्रतिष्ठा देता है।


2047 तक भारत वैज्ञानिक महाशक्ति बनेगा या नहीं—इसका उत्तर आज किसी के पास नहीं है। लेकिन एक बात निश्चित है कि यदि अगले बीस वर्षों में शिक्षा, अनुसंधान, उद्योग और शासन के बीच एक सशक्त वैज्ञानिक गठबंधन बन गया, तो भारत केवल विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश नहीं रहेगा। वह विश्व के ज्ञान-उत्पादन का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है।

इतिहास अवसर बार-बार नहीं देता। औद्योगिक क्रांति में भारत पीछे रह गया। डिजिटल क्रांति में उसने देर से प्रवेश किया। लेकिन उल्लेखनीय प्रगति की। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की वर्तमान क्रांति भारत के सामने तीसरा ऐतिहासिक अवसर लेकर आई है। यदि इस अवसर का उपयोग दूरदर्शिता, वैज्ञानिक दृष्टि और राष्ट्रीय संकल्प के साथ किया गया, तो 2047 केवल स्वतंत्रता का शताब्दी वर्ष नहीं होगा, वह भारत के वैज्ञानिक पुनर्जागरण का भी प्रतीक बन सकता है।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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