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INDIA Alliance: 'इंडिया' गठबंधन में पड़ी दरार! दिल्ली में महाबैठक से ठीक पहले दोस्तों ने किया किनारा, कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती
INDIA Alliance Meeting Delhi: दिल्ली में INDIA गठबंधन की महाबैठक से पहले बढ़ी मुश्किलें! DMK और अन्य सहयोगियों की नाराजगी ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। क्या विपक्षी एकता बिखर रही है या इस बैठक से निकलेगा कोई नया सियासी फॉर्मूला?
INDIA Alliance Meeting Delhi: कलह और चुनौतियों के थपेड़ों के बीच आज देश की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है। दो साल के लंबे इंतजार के बाद देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को 'इंडिया' गठबंधन के दिग्गजों का जमावड़ा होने जा रहा है। विपक्षी दल एक बार फिर से अपनी ताकत दिखाने के लिए मंच सजा चुके हैं, लेकिन इस बार का नजारा पुराना जैसा नहीं है। सत्ता के गलियारों में हो रही इस हलचल को देखकर हर किसी की नजरें दिल्ली की इस सियासी जंग पर टिकी हैं। दो बड़े सहयोगियों के दूर जाने और आपसी रिश्तों में आई कड़वाहट के बीच यह महाबैठक बुलाई गई है, जिसमें देश की कुल तेईस राजनीतिक पार्टियों के बड़े चेहरों के शामिल होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली में दिग्गजों का जमावड़ा
इस बड़ी बैठक के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पहले ही दिल्ली के मैदान में उतर चुके हैं। दिल्ली कदम रखते ही उन्होंने आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करके नई खिचड़ी पकानी शुरू कर दी है। आज होने वाली इस चर्चा में कांग्रेस के मुखिया मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। इनके अलावा उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, बिहार से राष्ट्रीय जनता दल के युवा नेता तेजस्वी यादव और महाराष्ट्र से शिवसेना के उद्धव ठाकरे भी विपक्षी एकता को नई धार देने के लिए मंच पर मौजूद रहेंगे। कई छोटे दल भी इस कोशिश में कांग्रेस का साथ देने पहुंच रहे हैं।
अपनों की बगावत और रूठने का सिलसिला
भले ही मंच सज चुका है, लेकिन इस महाबैठक की चमक अंदरूनी झगड़ों की वजह से थोड़ी फीकी पड़ती दिख रही है। सबसे बड़ा झटका दक्षिण भारत से लगा है, जहां डीएमके ने कांग्रेस पर सीधे तौर पर धोखेबाजी का बड़ा आरोप लगाते हुए इस बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली है। डीएमके का मानना है कि कांग्रेस देश की सत्ताधारी पार्टी को टक्कर देने में बुरी तरह नाकाम साबित हुई है। उधर केरल की राजनीति में मचे घमासान के कारण वामपंथी दल सीपीएम भी इस गठबंधन से किनारा कर रहा है। कांग्रेस ने केरल में वामपंथियों पर सत्ताधारी दल के साथ गुप्त समझौता करने का संगीन आरोप लगाया था, जिसके बाद से दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं।
बिखरते कुनबे को संभालने की चुनौती
विपक्ष की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आने वाले चुनावों के लिए एक मजबूत और नई योजना तैयार करना है। इसके साथ ही हाल के दिनों में बंगाल और असम जैसे राज्यों में मिली करारी हार के कारणों पर भी गहराई से मंथन किया जाएगा। गठबंधन के भीतर मची इस खींचतान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने साफ कहा है कि चुनौतियां बड़ी हैं और बैठक से पहले ही आपसी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली के चुनावों के बाद से ही इस गठबंधन से अपने कदम पीछे खींच लिए थे। उनके नेताओं का सीधा आरोप है कि कांग्रेस केवल दो पार्टियों का राज चाहती है और क्षेत्रीय दलों को खत्म करने की चाल चल रही है।
नए साथी और बदलती सियासी बिसात
इस महाबैठक में जहां पुराने दोस्त हाथ छुड़ा रहे हैं, वहीं कुछ नए समीकरण भी बनते दिख रहे हैं। तमिलनाडु में डीएमके की नाराजगी के बाद अब अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके इस गठबंधन में शामिल होकर नया मोर्चा संभाल सकती है। दूसरी तरफ, बंगाल में बड़ा राजनीतिक झटका खाने के बाद ममता बनर्जी भले ही दिल्ली आ गई हैं, लेकिन खुद उनकी पार्टी के भीतर बड़ी बगावत खड़ी हो गई है। उनके कई विधायकों के बागी रुख अपनाने की वजह से आंतरिक कलह खुलकर सड़क पर आ चुकी है। दो साल बाद हो रही इस बैठक में अब देखना यह होगा कि बिखरते हुए इस कुनबे को कांग्रेस कैसे एक धागे में पिरो पाती है।


