BRICS में भारत का 14 साल का सफर: 2012 में ‘Weak Link’, 2026 में बना Growth Engine

BRICS Summit 2026 में भारत की भूमिका 2012 के मुकाबले पूरी तरह बदल गई है। जानिए कैसे ‘Weak Link’ कहे जाने वाला भारत आज BRICS का Growth Engine और अहम strategic power बन गया।

Alakha Singh
Published on: 12 Sept 2026 8:05 AM IST
BRICS में भारत का 14 साल का सफर: 2012 में ‘Weak Link’, 2026 में बना Growth Engine
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BRICS Summit 2026: 14 साल पहले जब भारत ने नई दिल्ली में BRICS की मेजबानी की थी, तब देश की आर्थिक कहानी आज से बिल्कुल अलग थी। BRIC समूह में भारत की मौजूदगी पर ही सवाल उठ रहे थे। चर्चा इस बात तक पहुंच गई थी कि क्या Indonesia को भारत की जगह ‘I’ मिलना चाहिए? क्या भारत BRIC की सबसे कमजोर कड़ी बन चुका है? 2026 में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

आज भारत सिर्फ BRICS का सदस्य नहीं है, बल्कि इस विस्तारित समूह के प्रमुख growth engines में गिना जा रहा है। जिस अर्थव्यवस्था को 2012 में investment-grade rating गंवाने का खतरा बताया जा रहा था, वही भारत अब जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी यानी JCR की A-/Stable sovereign rating हासिल कर चुका है। यही 14 साल भारत के आर्थिक और रणनीतिक बदलाव की कहानी बताते हैं।

2012 में भारत पर क्यों उठ रहे थे सवाल?

2012 में भारत के सामने आर्थिक मोर्चे पर कई चुनौतियां थीं। विकास दर कमजोर पड़ रही थी, महंगाई ऊंची थी, रुपया दबाव में था और आर्थिक सुधारों को लेकर सरकार की क्षमता पर सवाल उठ रहे थे।

सबसे बड़ा झटका जून 2012 में आया, जब Standard & Poor’s ने चेतावनी दी कि भारत पहला BRIC देश हो सकता है जो investment-grade sovereign rating खो दे। उस समय भारत की long-term sovereign rating BBB- थी और outlook को stable से negative किया गया था।

यानी जिस समूह को दुनिया की उभरती आर्थिक ताकतों का प्रतीक माना जा रहा था, उसी समूह में भारत की आर्थिक कमजोरी चर्चा का विषय बन गई थी। 2012 के दौर में सवाल सिर्फ GDP growth का नहीं था। सवाल यह था कि क्या भारत चीन, रूस और ब्राजील जैसी दूसरी बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ कदम मिला पाएगा?

यहां तक कि BRIC के शुरुआती विचार के जनक Jim O’Neill भी उस समय valuation के लिहाज से भारत को चारों अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम आकर्षक मान रहे थे।

2026 में कहानी पूरी तरह पलट गई

अब 2026 पर आइए। भारत की अर्थव्यवस्था ने FY2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8% real GDP growth दर्ज की। यह आंकड़ा ऐसे समय आया जब दुनिया geopolitical tensions, energy shocks और supply-chain uncertainties से जूझ रही है।

यानी 2012 के sub-5% growth वाले दौर से 2026 के 7.8% quarterly growth तक का सफर सिर्फ आंकड़ों का बदलाव नहीं है। यह भारत की आर्थिक resilience में आए बड़े बदलाव का संकेत है। लेकिन इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ GDP नहीं है।

‘Investment Grade खोने’ के डर से A- Rating तक

भारत की sovereign rating इस बदलाव का सबसे स्पष्ट उदाहरण है। 2012 में S&P ने चेताया था कि भारत investment-grade status गंवाने वाला पहला BRIC देश बन सकता है।

सितंबर 2026 में JCR ने भारत की foreign-currency और local-currency long-term issuer rating को BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया और outlook Stable रखा। JCR की sovereign rating सूची में भारत अब A-/Stable पर है।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2012 में चर्चा यह थी कि भारत अपनी investment-grade स्थिति बचा पाएगा या नहीं। 2026 में चर्चा भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता और उसके global economic footprint की है।

JCR ने भारत की resilient economic growth, मजबूत financial system और external position जैसे पहलुओं को rating upgrade के संदर्भ में महत्व दिया है। भारत के digital public infrastructure, GST, private consumption और public investment जैसे क्षेत्रों को भी उसकी आर्थिक क्षमता के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा गया है।

BRIC से Expanded BRICS तक बदल गया पूरा मंच

इन 14 वर्षों में सिर्फ भारत नहीं बदला। BRICS भी बदल गया। शुरुआत में BRIC में Brazil, Russia, India और China थे। South Africa के जुड़ने के बाद यह BRICS बना। इसके बाद हुए विस्तार ने समूह को कहीं ज्यादा बड़ा और विविध बना दिया।

आज इसमें China और India के साथ Brazil, Russia, South Africa, Egypt, Ethiopia, Indonesia, Iran, Saudi Arabia और UAE जैसे देश शामिल हैं।

इस विस्तार ने BRICS को केवल चार-पांच बड़ी emerging economies का आर्थिक क्लब नहीं रहने दिया। यह अब Global South की आवाज, व्यापार, finance, development और international governance से जुड़े बड़े सवालों पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।

और इसी वजह से BRICS के भीतर भारत की भूमिका भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

चीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, लेकिन भारत की भूमिका अलग

यह कहना गलत होगा कि भारत BRICS की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन चुका है। चीन अभी भी समूह की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन भारत की ताकत सिर्फ GDP size में नहीं है।

भारत के पास विशाल घरेलू बाजार, तेज आर्थिक वृद्धि, बड़ी working-age population, technology capabilities और अलग-अलग geopolitical camps के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता है। यही combination भारत को BRICS के भीतर एक अलग भूमिका देता है।

भारत चीन का strategic competitor है, लेकिन BRICS में उसके साथ बैठता है। रूस भारत का पुराना defence और energy partner है। ईरान West Asia और connectivity के लिहाज से महत्वपूर्ण है। UAE और Saudi Arabia के साथ भारत के economic और strategic संबंध लगातार गहरे हुए हैं।

इसलिए भारत की ताकत केवल आर्थिक नहीं, बल्कि diplomatic convening power भी है।

Strategic Autonomy बनी भारत की बड़ी ताकत

2026 का BRICS ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका-चीन rivalry, रूस-यूक्रेन युद्ध, West Asia crisis और global trade tensions ने दुनिया को ज्यादा fragmented बना दिया है।

ऐसे माहौल में भारत की पुरानी strategic autonomy नीति को नई अहमियत मिली है।

भारत किसी एक geopolitical camp में पूरी तरह शामिल हुए बिना अलग-अलग शक्तियों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध बनाए रखने की कोशिश करता है। BRICS भारत के लिए इसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण मंच है।

नई दिल्ली के लिए यह सिर्फ पश्चिम के खिलाफ किसी bloc का हिस्सा बनने का सवाल नहीं है। बल्कि BRICS ऐसा platform है जहां भारत Global South, economic governance, development finance और international institutions में reform जैसे मुद्दों पर अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है।

IT से आगे बढ़ी भारत की Economic Story

2012 की भारत की global economic image काफी हद तक IT services, outsourcing, consumer market और demographic dividend के इर्द-गिर्द घूमती थी। 2026 में pitch कहीं ज्यादा व्यापक है।

अब कहानी में manufacturing, infrastructure, digital public infrastructure, electronics, startups, fintech और emerging technologies भी शामिल हैं।

UPI और Aadhaar जैसे digital platforms ने भारत के digital public infrastructure model को दुनिया के सामने एक अलग पहचान दी है। वहीं manufacturing और infrastructure पर बढ़ता जोर भारत को global supply chains में एक वैकल्पिक destination के रूप में पेश करने की कोशिश का हिस्सा है।

यही बदलाव भारत की economic narrative को केवल “potential” से “execution” की तरफ ले जाता है।

14 साल में सवाल ही बदल गया

2012 में भारत को लेकर सवाल था कि क्या भारत BRIC की बाकी अर्थव्यवस्थाओं के साथ कदम मिला पाएगा?

2026 में सवाल है कि भारत BRICS के भविष्य को कितना shape कर सकता है?

यही इस 14 साल के सफर का सबसे बड़ा बदलाव है। 2012 में भारत BRICS में अपनी जगह को लेकर defensive स्थिति में था। 2026 में भारत एक ऐसे BRICS की मेजबानी कर रहा है जिसका आर्थिक और geopolitical footprint पहले से कहीं बड़ा है।

GDP growth, बेहतर sovereign rating, digital infrastructure, manufacturing push और strategic autonomy—इन सभी ने भारत की bargaining power बढ़ाई है।

फिर भी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत की आर्थिक यात्रा पूरी तरह सफल हो चुकी है। रोजगार, productivity, inequality, human capital और per-capita income जैसी चुनौतियां अब भी बड़ी हैं। तेज GDP growth को लंबे समय तक टिकाऊ और व्यापक विकास में बदलना अगली बड़ी परीक्षा होगी।

लेकिन BRICS के संदर्भ में 14 साल का बदलाव साफ दिखाई देता है।

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alakhsingh2025@hotmail.com

Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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