India Economic Growth: अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की तैयारी, विदेशी निवेशकों को बड़ी सौगात, मोदी सरकार का बड़ा फैसला

India Economic Growth: विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकारी बॉण्ड्स पर टैक्स राहत से एफपीआई निवेश और पूंजी प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।

Akriti Pandey
Published on: 4 Jun 2026 11:33 AM IST (Updated on: 4 Jun 2026 11:33 AM IST)
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India Economic Growth: देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयकर कानून में संशोधन से जुड़े एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी का प्रवाह तेज होगा। यह अध्यादेश राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू हो जाएगा। इसके जरिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर महत्वपूर्ण कर राहत दी जाएगी।

सरकारी बॉण्ड्स पर खत्म होगा कैपिटल गेन्स टैक्स

सरकार के नए फैसले के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs Investment) में किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। अभी तक विदेशी निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए बॉण्ड और सूचीबद्ध शेयरों पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG Tax) टैक्स देना पड़ता था। इसके अलावा सरकारी बॉण्ड्स से मिलने वाले ब्याज पर 20 प्रतिशत विदहोल्डिंग टैक्स भी लागू था। इससे पहले सरकार ने 5 प्रतिशत की रियायती कर दर की व्यवस्था समाप्त कर दी थी। निवेशकों का कहना था कि ऊंची कर दरों के कारण भारतीय बाजार की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।

भारी बिकवाली के बाद बढ़ी राहत की मांग

पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली देखने को मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष विदेशी निवेशकों ने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी की है। इसके बाद से ही निवेशक कर व्यवस्था में राहत की मांग कर रहे थे। सरकार का मानना है कि टैक्स में यह राहत विदेशी निवेशकों को दोबारा भारतीय बाजार की ओर आकर्षित करने में मदद करेगी। इससे सरकारी बॉण्ड बाजार में भी निवेश बढ़ने की संभावना है।

आगे भी हो सकते हैं बड़े फैसले

सूत्रों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार आने वाले समय में और भी अहम कदम उठा सकती है। हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी संकेत दिए थे कि सरकार लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को लेकर निवेशकों की राय सुनने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में सरकार ने अधिकांश परिसंपत्तियों पर एलटीसीजी टैक्स की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दी थी। हालांकि, सूचीबद्ध इक्विटी और इक्विटी आधारित निवेश साधनों के लिए कर छूट की सीमा बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी गई थी।

विशेषज्ञों ने बताए चिंता के संकेत

एटम फाइनेंशियल सर्विसेज के ग्रुप सीईओ हर्षा वर्धना वीएम के अनुसार, विदेशी निवेशकों के बाहर जाने के आंकड़े काफी बड़े हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के 12 महीनों में से आठ महीनों के दौरान एफपीआई भारतीय बाजार में नेट सेलर रहे और कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी हुई। वहीं जनवरी 2026 में अकेले 33,598 करोड़ रुपये का आउटफ्लो दर्ज किया गया, जो अगस्त 2025 के बाद सबसे बड़ा मासिक आउटफ्लो माना जा रहा है।

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Akriti Pandey is a Education & job Desk Content Writer at Newstrack.com.

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