AI Jobs in India: नौकरी बाजार में AI की मांग 20% बढ़ी, अनुभवी पेशेवरों पर कंपनियों का ज्यादा जोर

AI Jobs in India: भारत के व्हाइट-कॉलर नौकरी बाजार में सितंबर 2026 में कुल भर्ती 2 प्रतिशत बढ़ी, जबकि AI और मशीन लर्निंग से जुड़ी नौकरियों में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। अनुभवी पेशेवरों की मांग भी बढ़ी।

Newstrack Network
Published on: 3 Oct 2026 5:12 PM IST
AI Jobs in India
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AI Jobs in India (Image Credit-Social Media)

नई दिल्ली। देश के व्हाइट-कॉलर नौकरी बाजार में सितंबर के दौरान बड़ी उछाल तो नहीं आई, लेकिन भर्ती का स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। कंपनियां बड़ी संख्या में सामान्य भर्ती करने के बजाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और दूसरे विशेष कौशल वाले अनुभवी पेशेवरों को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं। Naukri JobSpeak की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक कुल भर्ती सूचकांक सालाना आधार पर करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 3,053 पर पहुंचा, जो सितंबर 2025 में 3,002 था। इसके मुकाबले AI और मशीन लर्निंग से जुड़ी नौकरियों में सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यानी कुल नौकरी बाजार लगभग स्थिर रहने के बावजूद तकनीक से जुड़े कुछ विशेष क्षेत्रों में मांग कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है।

सितंबर के आंकड़ों का सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह है कि कंपनियों की भर्ती रणनीति में अब कौशल के साथ अनुभव का महत्व बढ़ रहा है। AI और मशीन लर्निंग से संबंधित नौकरियों में केवल नए इंजीनियरों की मांग नहीं बढ़ी, बल्कि कई वर्षों का कार्य अनुभव रखने वाले पेशेवरों के लिए भी अवसर तेजी से बढ़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक AI से जुड़े क्षेत्र में 3 से 16 वर्ष के अनुभव वाली विभिन्न श्रेणियों में भर्ती में मजबूत वृद्धि दिखाई दी। खास तौर पर 8 से 12 वर्ष के अनुभव वाले पेशेवरों की मांग करीब 28 प्रतिशत बढ़ी। यह संकेत देता है कि कंपनियों को केवल AI मॉडल या तकनीक समझने वाले लोग नहीं, बल्कि ऐसे कर्मचारी भी चाहिए जो अपने पुराने कारोबारी या तकनीकी अनुभव को नई AI क्षमताओं के साथ जोड़ सकें।

यह बदलाव केवल AI तक सीमित नहीं है। समूचे व्हाइट-कॉलर नौकरी बाजार में भी अनुभवी कर्मचारियों की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दी। 8 से 12 वर्ष के अनुभव वाले पेशेवरों की भर्ती करीब 5 प्रतिशत और 13 से 16 वर्ष के अनुभव वाले लोगों की भर्ती करीब 7 प्रतिशत बढ़ी। इसका अर्थ यह नहीं कि नए स्नातकों के लिए अवसर खत्म हो रहे हैं, बल्कि कंपनियां फिलहाल भर्ती में अधिक चयनात्मक हो रही हैं। विशेष तकनीकी ज्ञान, किसी उद्योग का व्यावहारिक अनुभव और नई तकनीक के साथ काम करने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवारों को सामान्य कौशल वाले उम्मीदवारों की तुलना में अधिक अवसर मिल रहे हैं।

Naukri की मूल कंपनी Info Edge के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हितेश ओबेरॉय के मुताबिक सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि भर्ती बाजार स्थिर है, लेकिन कंपनियां विशेष कौशल और अनुभवी पेशेवरों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। कुल भर्ती में केवल 2 प्रतिशत की वृद्धि और AI से जुड़ी भर्ती में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बीच का अंतर भी इसी बदलाव को सामने लाता है। इसका सीधा संकेत यह है कि तकनीकी बदलाव के इस दौर में केवल डिग्री के बजाय किसी खास काम में दक्षता और उसे AI के साथ जोड़ पाने की क्षमता नौकरी बाजार में अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।

रिपोर्ट में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) भी रोजगार के उभरते स्रोत के रूप में दिखाई देते हैं। भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने तकनीकी विकास, वित्त, डेटा विश्लेषण, अनुसंधान, साइबर सुरक्षा और कारोबारी प्रक्रियाओं के लिए बड़े GCC चला रही हैं। सितंबर में GCC से जुड़ी भर्तियां सालाना आधार पर करीब 4 प्रतिशत बढ़ीं। राष्ट्रीय औसत भले सीमित रहा हो, लेकिन कुछ बड़े तकनीकी शहरों में वृद्धि काफी तेज रही। हैदराबाद में GCC भर्तियां 23 प्रतिशत, चेन्नई में 13 प्रतिशत और पुणे में 11 प्रतिशत बढ़ीं। इससे संकेत मिलता है कि इन केंद्रों का विस्तार आने वाले समय में तकनीकी और उच्च कौशल वाली नौकरियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालांकि नौकरी बाजार की तस्वीर सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है। AI, मशीन लर्निंग और GCC में बढ़ती मांग के विपरीत कुछ पारंपरिक क्षेत्रों में भर्ती कमजोर हुई है। होटल और आतिथ्य तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सितंबर के दौरान नौकरियों में गिरावट दर्ज की गई। इसलिए कुल सूचकांक में 2 प्रतिशत की वृद्धि को सभी उद्योगों में रोजगार बढ़ने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों, शहरों और अनुभव स्तरों में भर्ती का रुख काफी अलग है।

इन आंकड़ों को पढ़ते समय एक और सावधानी जरूरी है। Naukri JobSpeak सरकारी रोजगार सर्वेक्षण नहीं, बल्कि Naukri.com पर कंपनियों की ओर से की जाने वाली भर्ती गतिविधियों पर आधारित सूचकांक है। यह खास तौर पर संगठित व्हाइट-कॉलर नौकरी बाजार की दिशा बताता है। इससे देश में कुल रोजगार, बेरोजगारी या असंगठित क्षेत्र की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन निजी क्षेत्र की पेशेवर नौकरियों में मांग किस दिशा में बढ़ रही है, इसे समझने के लिए यह महत्वपूर्ण संकेत देता है।

सितंबर की रिपोर्ट का बड़ा संदेश यही है कि भारतीय नौकरी बाजार में फिलहाल संख्या से अधिक कौशल की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती जा रही है। AI से संबंधित नौकरियों की 20 प्रतिशत वृद्धि और अनुभवी पेशेवरों की बढ़ती मांग बताती है कि कंपनियां तकनीक अपनाने के अगले चरण में पहुंच रही हैं। वे केवल AI उपकरण खरीदने या प्रयोग करने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि ऐसे लोगों की तलाश कर रही हैं जो तकनीक को वास्तविक कारोबार, उत्पादन और सेवाओं में उतार सकें। इसी कारण कई वर्षों का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों के लिए भी AI सीखना अब केवल अतिरिक्त योग्यता नहीं, बल्कि नौकरी बाजार में अपनी उपयोगिता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है।

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