TRENDING TAGS :
Ministry of Textiles: भारत टेक्सटाइल कचरे का डंपिंग ग्राउंड नहीं: सरकार
Ministry of Textiles: केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत को टेक्सटाइल कचरे का डंपिंग ग्राउंड बताना गलत और भ्रामक है। वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, देश में प्री-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट का 97 प्रतिशत हिस्सा रिसाइकल किया जाता है।
Textile Industry
Ministry of Textiles: केंद्र सरकार ने भारत के टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग सिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि देश को कपड़ा कचरे का 'डंपिंग ग्राउंड' बताना भ्रामक और गलत है। वस्त्र मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल रिकवरी और रीसाइक्लिंग नेटवर्क में से एक है, जो लंबे समय से चल रही दोबारा उपयोग और पुनःप्रयोग की व्यवस्था पर आधारित है।
सरकार ने कहा कि हाल में विदेशी मीडिया में आई कुछ रिपोर्ट्स, खासकर पानीपत जैसे क्लस्टर्स को लेकर, केवल पर्यावरण और श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं पर फोकस कर रही हैं, जबकि इस सेक्टर में स्थिरता, नियमों के पालन और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में हुई प्रगति को नजरअंदाज किया गया है। मंत्रालय ने कहा, "भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को पर्यावरण के प्रति लापरवाह या संरचनात्मक रूप से शोषणकारी बताना सही नहीं है। यह मौजूदा सुधारों और स्थिरता को बढ़ावा देने वाले प्रयासों की अनदेखी करता है।"
सरकार के अनुसार, भारत हर साल लगभग 7,073 किलो टन टेक्सटाइल कचरा पैदा करता है। सरकार ने 'मैपिंग ऑफ टेक्सटाइल वेस्ट वैल्यू चेन इन इंडिया 2026' स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग के दौरान पैदा होने वाले करीब 97 प्रतिशत प्री-कंज्यूमर टेक्सटाइल कचरे को रीसाइकिल कर लिया जाता है।
इसके अलावा, सरकार ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि भारत मुख्य रूप से पश्चिमी देशों के फास्ट-फैशन कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गया है। सरकार ने कहा कि हर साल मैनेज किए जाने वाले लगभग 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे में से 90 प्रतिशत से ज्यादा घरेलू स्तर पर पैदा होता है, जबकि आयातित कचरे की हिस्सेदारी केवल करीब 7 प्रतिशत है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल वेस्ट इकोसिस्टम हर साल लगभग 22,000 करोड़ रुपए की आर्थिक गतिविधि पैदा करता है।
इसके साथ ही सरकार ने आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं की एक स्टडी का भी जिक्र किया। पानीपत क्लस्टर के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में पाया गया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन की खपत जैसे पर्यावरणीय प्रभावों में 40 प्रतिशत तक कमी आती है, जब इसकी तुलना नए फाइबर उत्पादन से की जाती है।
हालांकि सरकार ने पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट मैनेजमेंट, अनौपचारिक इकाइयों और श्रमिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को स्वीकार किया, लेकिन उसने कहा कि उद्योग धीरे-धीरे अधिक औपचारिक व्यवस्था, स्वच्छ तकनीकों और मजबूत पर्यावरणीय नियमों की ओर बढ़ रहा है। सरकार ने दोहराया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग यूनिट्स तय पर्यावरण और श्रम कानूनों के तहत काम करती हैं। साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल जैसी नियामक एजेंसियां नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई भी जारी रखे हुए हैं।


