TRENDING TAGS :
कश्मीर का राग फिर अलापा पाकिस्तान! खुद की औकात नहीं तो संगठन को किया आगे, भारत ने एक झटके में उतारा बुखार
भारत ने जम्मू-कश्मीर पर OIC के प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे पक्षपातपूर्ण और पाकिस्तान के इशारे पर तैयार किया गया बताया।
India-Pakistan Tension: जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार विवाद इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC के उस प्रस्ताव को लेकर है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की स्थिति का जिक्र किया गया है। भारत ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण और झूठा बताया है। विदेश मंत्रालय का आरोप है कि पाकिस्तान ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए OIC का इस्तेमाल किया है। भारत ने साफ कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न हिस्से हैं और इस पर किसी बाहरी संगठन को टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
यह विवाद OIC के विदेश मंत्रियों की परिषद की 17 और 18 अक्टूबर 2026 को बगदाद में हुई बैठक के बाद सामने आया। भारत ने बैठक में जम्मू-कश्मीर को लेकर अपनाए गए रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है। साथ ही पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के आरोप भी लगाए हैं।
OIC के प्रस्ताव पर भारत का कड़ा जवाब
भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार, 19 अक्टूबर को जारी बयान में OIC के प्रस्ताव में भारत से जुड़े रिफ्रेंस को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि ये टिप्पणियां दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण और झूठी हैं और इनके पीछे पाकिस्तान की भूमिका है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, OIC ने एक बार फिर पाकिस्तान को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए संगठन का इस्तेमाल करने दिया है। भारत ने इस पर निराशा जताते हुए संगठन की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे देश के आंतरिक मामले हैं। ऐसे में किसी बाहरी संगठन की ओर से इस विषय पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और राजनीतिक प्रचार से इस वास्तविकता को नहीं बदला जा सकता।
कश्मीर पर पाकिस्तान को क्यों घेर रहा है भारत?
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। मंत्रालय के मुताबिक, पिछले वर्षों में क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, पर्यटन और कनेक्टिविटी के विकास पर काम हुआ है और इसका लाभ वहां के लोगों तक पहुंचा है।
भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दे जमीनी स्थिति को नहीं बदल सकते। सरकार का रुख है कि क्षेत्र के विकास और वहां के लोगों के हितों से जुड़े काम जारी हैं।
OIC के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए भारत ने यह भी कहा कि राजनीतिक मकसद से किए जाने वाले दावे जम्मू-कश्मीर की स्थिति को नहीं बदल सकते। विदेश मंत्रालय ने संगठन से भारत के खिलाफ ऐसे संदर्भों पर दोबारा विचार करने की अपील भी की।
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में हिंसा का आरोप
भारत ने अपने बयान में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी PoJK की स्थिति का भी जिक्र किया। विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि वहां नागरिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा, दमन और बर्बरता की गई है। मंत्रालय के मुताबिक, इन घटनाओं में महिलाओं और बच्चों समेत कई लोगों की मौत हुई है।
भारत ने यह भी कहा कि मीडिया पर पाबंदियों या सूचनाओं को सीमित करने की कोशिशों से मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोपों को छिपाया नहीं जा सकता।
ये आरोप भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान का हिस्सा हैं। पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
आतंकवाद को लेकर भारत ने पाकिस्तान से क्या कहा?
भारत ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान को उन इलाकों से हटना चाहिए, जिन पर उसने भारत के मुताबिक अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद करना चाहिए।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। इस बयान में भी विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े जिन मुद्दों का समाधान होना बाकी है, उनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करना और सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को रोकना शामिल है।
इस तरह भारत ने OIC के प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के साथ आतंकवाद का मुद्दा भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर किसी भी चर्चा में सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भी पाकिस्तान पर निशाना
विदेश मंत्रालय ने OIC के प्रस्ताव में इस्लामोफोबिया से जुड़े संदर्भों पर भी आपत्ति जताई। मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ ऐसे मुद्दे उठाकर अपने यहां अल्पसंख्यकों के साथ कथित दुर्व्यवहार, सांप्रदायिक हिंसा, शासन की विफलताओं और राजनीतिक अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।
भारत ने OIC के बार-बार ऐसे प्रस्तावों का समर्थन करने पर सवाल उठाए, जिनमें उसके मुताबिक पाकिस्तान के पक्ष में दुर्भावनापूर्ण दावों को जगह दी जाती है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि संगठन के सदस्य देशों को उसकी विश्वसनीयता और कामकाज पर विचार करना चाहिए तथा उसमें सुधार की जरूरत है।
भारत-OIC विवाद में आगे क्या?
बगदाद में हुई बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर पर OIC के रुख को लेकर भारत ने अपनी आपत्ति स्पष्ट कर दी है। भारत ने प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के अभिन्न हिस्से हैं और पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद करना चाहिए।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद का केंद्र OIC के प्रस्ताव और उस पर भारत की प्रतिक्रिया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में OIC या पाकिस्तान की ओर से भारतीय विदेश मंत्रालय के इस बयान पर कोई जवाब शामिल नहीं है। ऐसे में आगे की स्थिति दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाओं और कूटनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगी।


