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"दुनिया को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम..." रुसी तेल खरीद पर ट्रंप को भारत का करारा जवाब, पेट्रोलियम मंत्री ने दी चेतावनी
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रूस से तेल खरीद पर अमेरिका के दबाव को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा नीति पर समझौता नहीं करेगा और आपूर्ति बाधित करने वालों को गंभीर वैश्विक परिणाम भुगतने होंगे।
Harshdeep Puri on India-Russia oil purchase: अमेरिकी टैरिफ और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारतीय तेल खरीद नीति को लेकर जारी वैश्विक दबाव पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस से कच्चे तेल की खरीद पर कोई प्रतिबंध नहीं है, और यदि दुनिया ने इस आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश की, तो वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। पुरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, भारत पर रूस से कच्चा तेल और हथियार खरीदने के एवज में 25 प्रतिशत के मौजूदा शुल्क के अलावा 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाने के संदर्भ में बात कर रहा है।
रूसी तेल आपूर्ति बाधित हुई तो क्या होगा?
हरदीप सिंह पुरी ने जोर देकर कहा कि रूस हर दिन करीब एक करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करता है और वह विश्व स्तर पर कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। उन्होंने आगाह किया कि यदि इस विशाल आपूर्ति में बाधा आती है, तो विश्व को भयानक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।मंत्री ने कहा, "ऊर्जा एक ऐसी चीज है जिसके बिना आप नहीं रह सकते... अगर आप दूसरे सबसे बड़े उत्पादक को हटा देंगे तो आपको खपत में कटौती करनी होगी। इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे।"
राजनयिक से राजनेता बने पुरी ने तर्क दिया कि यही कारण है कि दुनिया रूसी तेल पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगा रही है। उन्होंने कहा कि तुर्किये, जापान और यूरोपीय संघ सहित कई देश रूस से तेल खरीदते हैं, यह दर्शाते हुए कि भारत अकेला नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस समय रूस द्वारा दी जा रही छूट बहुत अधिक नहीं है।
पाबंदियों के अनुपालन पर भारत का स्पष्टीकरण
अमेरिका द्वारा भारत पर दबाव बनाने की कोशिशों के बीच, पुरी ने ईरान और वेनेजुएला का उदाहरण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने हमेशा एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जिम्मेदार सदस्य के रूप में पाबंदियों का अनुपालन किया है। पुरी ने कहा कि रूस से तेल खरीद की मूल्य सीमाएं तय की गई हैं और जब भी ऐसी कोई बात होती है, वह भारतीय कंपनियों से कम कीमतों पर तेल खरीदने का अनुरोध करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां स्वतंत्र रूप से यह निर्णय लेती हैं कि वे रिफाइनिंग के लिए किस स्रोत से कच्चा तेल खरीदेंगी, और इन कंपनियों के पास पेशेवर प्रबंधन और निदेशक मंडल भी हैं।
अमेरिका भी नहीं चाहता तेल की कीमतों में गिरावट
हरदीप पुरी ने कच्चे तेल की कीमतों के संतुलन पर भी बात की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी कच्चे तेल का मूल्य 65-68 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के बीच बना रहेगा। पुरी ने कहा कि यह शेल गैस पर जोर देने वाले प्रमुख तेल उत्पादक देश अमेरिका के हित में भी है कि वह सुनिश्चित करे कि जीवाश्म ईंधन की कीमतों में बहुत अधिक गिरावट न आए। उन्होंने तर्क दिया कि मुद्रास्फीति को बढ़ावा देने के प्रति संवेदनशील अस्थिर घरेलू राजनीतिक माहौल और शेल गैस पर निर्भरता के कारण अमेरिका के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कीमतें कम न हों। इस तरह, उन्होंने साफ किया कि तेल की कीमतों को संतुलित रखना वैश्विक बाजार के हित में है।


