भारत से थर-थर कांपेगे दुश्मन! इस खूंखार लड़ाकू विमान के लिए नौसेना ने बनाया ‘मास्टर प्लान’, दुनिया हैरान

MiG-29K Fitghter Jet: नौसेना ने अपने रूसी मूल के MiG-29K लड़ाकू विमानों के लिए जरूरी उपकरणों और अत्याधुनिक टेस्टिंग सिस्टम को देश में ही विकसित और निर्मित करने के लिए भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया है।

Shishumanjali kharwar
Published on: 11 April 2026 8:12 AM IST (Updated on: 11 April 2026 8:27 AM IST)
MiG-29K Fitghter Jet
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MiG-29K Fitghter Jet

MiG-29K Fitghter Jet: भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। नौसेना ने अपने रूसी मूल के MiG-29K लड़ाकू विमानों के लिए जरूरी उपकरणों और अत्याधुनिक टेस्टिंग सिस्टम को देश में ही विकसित और निर्मित करने के लिए भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना, विमानों की ऑपरेशनल उपलब्धता बढ़ाना और रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।

MiG-29K एक अत्याधुनिक, हर मौसम में उड़ान भरने वाला सुपरसोनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो भारतीय नौसेना की ताकत का अहम हिस्सा है। यह विमान मुख्य रूप से विमानवाहक पोतों से संचालित होता है और भारत के दो प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर्स INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत पर तैनात है। इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें हवाई वर्चस्व स्थापित करना, समुद्री हमले करना, दुश्मन की घुसपैठ रोकना और पूरे कैरियर बैटल ग्रुप की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। हालांकि, लंबे समय से इन विमानों के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और सर्विसिंग को लेकर भारतीय नौसेना को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। इसका मुख्य कारण रूसी कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता थी, जिससे समय पर मरम्मत और संचालन में बाधाएं आती थीं।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नौसेना ने ‘रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन’ (RFI) जारी किया है। इसके तहत देश की तकनीकी रूप से सक्षम और प्रतिष्ठित कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। नौसेना चाहती है कि भारतीय कंपनियां MiG-29K के लिए दो महत्वपूर्ण ऑटोमेटेड टेस्ट सिस्टम NASK 1-29K (ग्राउंड बेस्ड टेस्ट सिस्टम) और KSAK 1-29K (कैरियर बेस्ड टेस्ट सिस्टम) का स्वदेशी डिजाइन और विकास करें। ये दोनों टेस्टिंग सिस्टम विमान के नियमित रखरखाव और जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनके जरिए इंजन और पावर सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, फ्यूल सिस्टम, एवियोनिक्स, ‘फ्लाई बाय वायर’ कंट्रोल सिस्टम, रडार और हथियार प्रणाली की गहन जांच की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर विमान पूरी तरह से सुरक्षित और युद्ध के लिए तैयार रहे।

इस पहल से भारत को कई बड़े फायदे होंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि विमानवाहक पोतों पर तैनात MiG-29K की उपलब्धता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही, रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों, सरकारी उपक्रमों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता मजबूत होगी। जब स्पेयर पार्ट्स और टेस्टिंग सिस्टम की सप्लाई चेन पूरी तरह भारत के नियंत्रण में होगी, तब किसी भी आपात स्थिति में विदेशी निर्भरता समाप्त हो जाएगी। इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और मजबूत कदम आगे बढ़ाएगा।

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Shishumanjali kharwar

Former Content Writer Mail ID -Shishulko@gmail.comShishulko@gmail.com

मीडिया क्षेत्र में 12 साल से ज्यादा कार्य करने का अनुभव। इस दौरान विभिन्न अखबारों में उप संपादक और एक न्यूज पोर्टल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्य किया। वर्तमान में प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल ‘न्यूजट्रैक’ में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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