Indian Politician Pilots: आसमान में उड़ते नेता, भारतीय राजनीति में पायलट-राजनेताओं की गाथा

Indian Politician Pilots: भारतीय राजनीति में नेतागीरी व जहाज़ उड़ाने के शौक़ का काफ़ी करीबी रिश्ता है...

Yogesh Mishra
Published on: 28 May 2026 4:15 PM IST
Indian Politicians Who Are Trained Pilots History
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Indian Politicians Who Are Trained Pilots History

Indian Politician Pilots: भारतीय राजनीति में नेतागीरी व जहाज़ उड़ाने के शौक़ का काफ़ी करीबी रिश्ता है। इन रिश्तों की निकटता का ही तक़ाज़ा है कि यहाँ तक कहा जाता है कि विमान उड़ाने का शौक रखने वाले नेता की सफलता दूसरे शौक़ रखने वाले नेताओं की तुलना में ज़्यादा ही नहीं, शत प्रतिशत होती है। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बन जाने के बाद तो इस किंवदंती को ख़ासा बल मिल गया। वैसे जहाज़ उड़ाने का शौक रखने वालों का राजनीति की ओर रुख़ करने की शुरुआत उड़ीसा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक से होती है। पर जहाज़ उड़ाने वालों के राजनीति के शिखर पर पहुँचने का कीर्तिमान तो राजीव गांधी के साथ ही जुड़ता है। इसे संयोग कहें या फिर कोई रणनीतिक सूत्र, कि जहाज़ उड़ाने का शौक रखने वालों की सफलता बहुत 'धात्विक' रही है।

सबसे चर्चित रहे राजीव गांधी

हालाँकि भारत में ऐसे नेताओं की संख्या बहुत अधिक नहीं है, जिन्होंने बाकायदा विमान उड़ाने का प्रशिक्षण लिया हो या वैमानिक रहे हों। लेकिन कुछ प्रमुख राजनीतिक नेता और सार्वजनिक जीवन के लोग ऐसे रहे हैं, जिनके पास उड़ान प्रशिक्षण या वैमानिक अनुज्ञप्ति रही है। इनमें सबसे चर्चित नाम राजीव गांधी का है। राजीव पेशेवर विमानन वैमानिक थे।

राजीव गांधी

उन्होंने इंडियन एयरलाइन्स में व्यावसायिक वैमानिक के रूप में काम किया था। राजनीति में आने से पहले उनका मुख्य पेशा विमान उड़ाना ही था। उनके पास निजी वैमानिक अनुज्ञप्ति व व्यावसायिक वैमानिक अनुज्ञप्ति, दोनों तरह के प्रमाणपत्र थे। राजीव गांधी मुख्यतः इंडियन एयरलाइन्स के यात्री विमान उड़ाते थे। उन्होंने बोइंग 737 तथा एवरो एचएस-748 जहाज़ काफ़ी उड़ाये थे। उनके उड़ान प्रशिक्षक कैप्टन टीए कुंजुपालु थे।

संजय गांधी :असमय टूटा पंख

राजीव गांधी से पहले उनके छोटे भाई संजय गांधी राजनीति में अपनी माँ इंदिरा गांधी का हाथ बँटाते थे। उनके पास निजी वैमानिक अनुज्ञप्ति भी थी। संजय हल्के विमान उड़ाते थे। उनके पास लगभग पाँच सौ घंटे की उड़ान का अनुभव था। वे दिल्ली उड्डयन क्लब से जुड़े हुए थे।


23 जून, 1980 को जब दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे पर संजय गांधी का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, उस समय वह उच्च प्रदर्शन वाला दो सीटर करतबी विमान उड़ा रहे थे। उनकी मृत्यु इसी दुर्घटना में हुई थी। यह विमान दिल्ली उड्डयन क्लब का पिट्स एस-२एस था, जिसका पंजीयन संख्या वीटी-ईजीएन था।

ज्योतिरादित्य सिंधिया: विरासत में मिली उड़ान की चाहत

कभी काँग्रेस के नेता रहे, आज मोदी मंत्रिमंडल के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी विमान उड़ाने का प्रशिक्षण प्राप्त है। वे विमानन में रुचि रखते हैं। इनके पिता माधवराव सिंधिया का निधन भी एक विमान दुर्घटना में ही हुआ था। वे दिल्ली से कानपुर एक राजनीतिक सभा को संबोधित करने जा रहे थे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया

उसी दौरान उनका छोटा दो-इंजन निजी टर्बोप्रॉप विमान बीचक्राफ्ट किंग एयर सी-90 उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के भैंसरौली गाँव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार सभी आठ लोगों की मृत्यु हो गई। इनमें माधवराव सिंधिया, उनके निजी सचिव, वैमानिक और सह-वैमानिक, आज तक, इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार शामिल थे।

सचिन पायलट: नाम में ही समाई विरासत

काँग्रेस नेता सचिन पायलट का नाम भी इस सूची में आता है। हालाँकि सचिन पायलट का 'पायलट' उपनाम वास्तव में उनके पिता राजेश पायलट की वायुसेना पृष्ठभूमि से जुड़ा है। राजेश पायलट भारतीय वायुसेना में लड़ाकू व परिवहन वैमानिक रहे थे। राजेश पायलट ने १९७१ के युद्ध में भी उड़ान भरी थी।

सचिन पायलट

सचिन के बारे में उल्लेख मिलता है कि उन्होंने विमान उड़ाने का प्रशिक्षण लिया है। वह भी अपने पिता राजेश पायलट की तरह वायुसेना में जाना चाहते थे। उनके पास व्यावसायिक वैमानिक अनुज्ञप्ति है। हालाँकि वे पेशेवर विमानन वैमानिक के रूप में सक्रिय नहीं रहे।

राजीव प्रताप रूढ़ी: सांसद भी, आसमान के वासी भी

आज भाजपा नेता व पूर्व मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी भारत के सबसे चर्चित वैमानिक-राजनेताओं में गिने जाते हैं। इनके पास व्यावसायिक वैमानिक अनुज्ञप्ति है। वे एयरबस ए-320 उड़ाने के लिए प्रशिक्षित हैं। मंत्री रहते हुए भी अनुज्ञप्ति वैध रखने के लिए उड़ान भरते थे। इंडिगो जैसी विमानसेवा के साथ उन्होंने मानद सह-वैमानिक के रूप में उड़ान भी की।

राजीव प्रताप रूढ़ी

2026 में दिल्ली-पटना उड़ान को ख़राब मौसम के कारण लखनऊ की ओर मोड़ने वाली इंडिगो उड़ान के विमानचालक कक्ष में भी वे मौजूद थे। भारतीय राजनीति में यह बेहद दुर्लभ उदाहरण है कि कोई सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री नियमित रूप से एयरबस जैसे बड़े जेट विमान उड़ाने की योग्यता बनाए रखे।

नवीन जिंदल: उद्योगपति, सांसद और आसमान के शौकीन

कभी काँग्रेस में रहे पर अब भाजपा के सांसद नवीन जिंदल प्रशिक्षित वैमानिक माने जाते हैं। वह निजी विमान उड़ाने से जुड़े रहे हैं। वे भारत के उन चुनिंदा उद्योगपति-राजनेताओं में माने जाते हैं जिन्हें विमान उड़ाने का वास्तविक प्रशिक्षण प्राप्त है।

वायु प्रदर्शनी जैसे आयोजनों में उन्होंने लड़ाकू विमानों में सह-वैमानिक के रूप में उड़ान भरी। 2011 की एयरो इंडिया प्रदर्शनी में उन्होंने फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल में सह-वैमानिक के रूप में यात्रा की थी। उस समय उन्होंने कहा था,"उड़ना एक अद्भुत अनुभव है।" यह विमान लगभग पचास हज़ार फ़ीट तक गया था। 2009 में उन्होंने अमेरिकी एफ/ए-18 सुपर हार्नेट लड़ाकू जेट में भी उड़ान भरी थी। उस समय उन्होंने कहा था कि वे पहले भी कई विमान उड़ा चुके हैं, लेकिन लड़ाकू विमान उड़ाना बिल्कुल अलग अनुभव था।


उनकी कंपनी जिंदल इस्पात एवं ऊर्जा लिमिटेड के पास कई कॉर्पोरेट विमान होने की जानकारी सार्वजनिक साक्षात्कारों में सामने आई थी। इनमें बॉम्बार्डियर ग्लोबल एक्सप्रेस बीडी-700, सेसना सिटेशन 560 एक्सएल तथा सेसना ग्रैंड कारावान सी-208 बी शामिल बताये जाते हैं। जिंदल समूह ने कुछ निजी हवाई पट्टियाँ और हेलीपैड भी विकसित किए थे।

इसके अलावा एपीजे अब्दुल कलाम और द्रौपदी मुर्मू लड़ाकू विमानों में 'उड़ान अभियान' कर चुके हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वे प्रशिक्षित वैमानिक थे।

जय पांडा: राजनीति और नभ, दोनों में समान पकड़

उड़ीसा के राजनेता विजयंत पांडा, जिन्हें 'जय पांडा' के नाम से भी जाना जाता है, अनुज्ञप्ति प्राप्त वैमानिक हैं। कई दशकों से विमान उड़ाने से जुड़े रहे हैं। वह प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत अभियानों में भी हेलीकॉप्टर उड़ाते रहे हैं। जय पांडा राजनीति और विमानन, दोनों क्षेत्रों में गंभीर रुचि रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं।


उनके पास वायुयान और हेलीकॉप्टर, दोनों उड़ाने का निजी वैमानिक अनुज्ञप्ति है। वह कई बार खुद हेलीकॉप्टर उड़ाते हुए सार्वजनिक रूप से देखे गए हैं। 2025 में उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के हल्के बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर की परीक्षण उड़ान भी की। 2018 में उनका हेलीकॉप्टर चिल्का झील क्षेत्र में उड़ान विवाद को लेकर चर्चा में आया था। जय पांडा प्रौद्योगिकी, रक्षा और विमानन नीति में विशेष रुचि रखने वाले नेताओं में माने जाते हैं।

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