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Regime Change के बयान से क्यों बढ़ी RSS की चिंता? इंद्रेश कुमार ने SIR आंदोलन पर दी चेतावनी
RSS नेता इंद्रेश कुमार ने SIR विरोध और ‘Regime Change’ की चर्चा पर चिंता जताई। जानिए राहुल गांधी, अभिजीत दीपके और विपक्ष के आंदोलन पर क्या है पूरा राजनीतिक विवाद।
Regime Change Controversy: SIR के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब चुनाव आयोग से लेकर केंद्र की सत्ता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है। ‘Regime Change’ यानी सत्ता परिवर्तन की बहस ने इस आंदोलन को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाली विचारधाराओं के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि शिक्षा के मुद्दे से शुरू हुआ आंदोलन अब अराजकता की ओर बढ़ रहा है, जो देश के भविष्य और विकास के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
Regime Change की चर्चा से क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
दरअसल, दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच ‘Regime Change’ का मुद्दा गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की सक्रियता के बीच इस आंदोलन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
विवाद को हवा तब मिली, जब वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण की टिप्पणियों को आंदोलन के पीछे सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से जोड़कर देखा गया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों का आरोप लगाया। हालांकि, आंदोलन से जुड़े पक्षों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को दूर करने और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही तय करने से जुड़ी हैं।
इंद्रेश कुमार ने क्या कहा?
लखनऊ में RSS से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के एक कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने देश की एकता, अखंडता और संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली विचारधाराओं के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
टाइम्स ऑफ इंडिया और IANS के अनुसार, उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध के नाम पर देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाले प्रयास स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने नागरिकों से ऐसे आंदोलनों और विचारधाराओं के प्रति सावधान रहने का आग्रह किया, जिन्हें वह राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा मानते हैं।
19 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों में भी उन्होंने ‘Regime Change’ की बहस के बीच आंदोलन को शिक्षा से अराजकता की ओर बढ़ने वाला घटनाक्रम बताया और देश के विकास पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
बांग्लादेश मॉडल की चर्चा ने बढ़ाई सियासी गर्मी
इस विवाद का एक अहम पहलू बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन से जुड़ी टिप्पणियां भी हैं। छात्र आंदोलन और बांग्लादेश के घटनाक्रम को लेकर दिए गए बयानों के बाद BJP ने विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर निशाना साधा है। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शनों के जरिए देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हो रही है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी विरोध प्रदर्शनों के पीछे बांग्लादेश जैसी सत्ता परिवर्तन की कोशिश होने का आरोप लगा चुके हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की मांग को वैध राजनीतिक अधिकार बताते हुए हिंसा या अराजकता के आरोपों को खारिज किया है।
RSS की चिंता का राजनीतिक संदेश क्या है?
इंद्रेश कुमार के बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब SIR को लेकर विपक्ष, छात्र संगठनों और CJP के आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति में जगह बना ली है। एक तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, वहीं BJP और उससे जुड़े संगठन इन प्रदर्शनों को राष्ट्रीय स्थिरता के नजरिये से देख रहे हैं।
हालांकि, इंद्रेश कुमार की चेतावनी को उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया और विचारधारा के संदर्भ में समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में उनके बयान से यह स्पष्ट नहीं होता कि उन्हें स्वयं किसी व्यक्तिगत खतरे की आशंका है या RSS ने औपचारिक रूप से किसी खतरे का आकलन जारी किया है।
फिलहाल, ‘Regime Change’ का मुद्दा SIR विरोध को लेकर जारी राजनीतिक संघर्ष का नया केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है कि आंदोलन चुनावी सुधारों तक सीमित है या इसके राजनीतिक उद्देश्य इससे आगे भी जाते हैं।


