International Tea Day 2026: 9 करोड़ किलो वाली चाय! इस कीमत में आ जाएंगी कई लग्जरी कारें और बंगले

International Tea Day 2026: चीन की यह दुर्लभ चाय करोड़ों में बिकती है, जानिए क्यों कहा जाता है दुनिया की सबसे महंगी चाय

Jyotsana Singh
Published on: 21 May 2026 3:23 PM IST
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International Tea Day 2026

International Tea Day 2026: भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। राजनीति के गलियारे से लेकर कोर्ट कचहरी, सरकारी दफ्तरों की व्यस्ततम दिनचर्या में चाय एनर्जी बूस्टर की तरह इस्तेमाल होती है, वहीं घर पर सुबह की शुरुआत हो या ऑफिस की थकान मिटानी हो या दोस्तों के साथ गपशप करनी हो, हर मौके पर चाय की मौजूदगी सबसे अहम होती है। आज 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर जब दुनिया चाय के महत्व और उससे जुड़े करोड़ों लोगों की आजीविका को याद कर रही है, तब चीन की एक ऐसी खास चाय फिर चर्चा में है जिसकी कीमत सुनकर कोई भी हैरान रह जाए। ‘डा हांग पाओ’ नाम की यह दुर्लभ चाय करीब 9 करोड़ रुपये प्रति किलो तक बिक चुकी है। इसकी कीमत में भारत में कई लग्जरी कारें और आलीशान बंगले खरीदे जा सकते हैं। आखिर इस चाय में ऐसा क्या खास है कि इसे दुनिया की सबसे महंगी चाय कहा जाता है, आइए जानते हैं-

अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य

हर साल 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा शुरू किए गए इस दिवस का मकसद चाय उद्योग से जुड़े किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों को समर्थन देना है। इस साल की थीम है, 'चाय की उपयोगिता को बनाए रखना, समुदायों का समर्थन करना।'

दुनियाभर में करोड़ों लोग चाय उत्पादन और इससे जुड़े प्रसंस्करण के जरिए अपनी आजीविका चलाते हैं। भारत, चीन, श्रीलंका और केन्या जैसे देशों की अर्थव्यवस्था में भी चाय उद्योग की अहम भूमिका है। चाय की परंपरा करीब पांच हजार साल पुरानी मानी जाती है और आज भी यह दुनिया के सबसे लोकप्रिय पेय पदार्थों में शामिल है।

चीन की पहाड़ियों में उगती है यह खास चाय

‘डा हांग पाओ’ चाय चीन के फुजियान प्रांत के वुई पर्वतीय इलाके में पैदा होती है। यह इलाका अपनी चट्टानी संरचना और प्राकृतिक खनिजों के लिए प्रसिद्ध है। चाय के पौधे पहाड़ों की दरारों और चट्टानों के बीच उगते हैं, इसलिए इसे “रॉक टी” भी कहा जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यहां की मिट्टी और मौसम इस चाय को अनोखा स्वाद और सुगंध देते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर के चाय प्रेमी इसे बेहद खास मानते हैं। इसकी खुशबू मिट्टी जैसी सोंधी होती है और स्वाद में हल्की मिठास महसूस होती है, जो चाय पीने के बाद काफी देर तक गले में बनी रहती है।

20 ग्राम चाय की कीमत लाखों में पहुंची

इस चाय की कीमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2002 में एक अंतरराष्ट्रीय नीलामी के दौरान सिर्फ 20 ग्राम डा हांग पाओ चाय करीब 26 लाख रुपये में बिकी थी। यानी एक किलो चाय की कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच गई।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह इसकी बेहद सीमित उपलब्धता है। दुनिया में ऐसी चीजें जिनकी मांग ज्यादा और सप्लाई बेहद कम होती है, उनकी कीमतें आसमान छूने लगती हैं। डा हांग पाओ इसी सिद्धांत का सबसे बड़ा उदाहरण है।

महारानी की बीमारी से जुड़ी है दिलचस्प कहानी

इस चाय के पीछे एक बेहद रोचक ऐतिहासिक कहानी भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि चीन के मिंग राजवंश के समय एक महारानी गंभीर रूप से बीमार पड़ गई थीं। तब उन्हें पारंपरिक उपचार के रूप में यही चाय पिलाई गई। कहानी के अनुसार, चाय पीने के बाद महारानी की तबीयत में तेजी से सुधार हुआ। इससे खुश होकर सम्राट ने उन खास चाय के पौधों को लाल रंग के शाही वस्त्रों से ढक दिया। तभी से इस चाय को डा हांग पाओ यानी बिग रेड रोब कहा जाने लगा।

आज भी चीन में इसे राष्ट्रीय धरोहर की तरह देखा जाता है और इसका सांस्कृतिक महत्व काफी बड़ा माना जाता है।

सिर्फ छह मूल पौधे बचे हैं दुनिया में

इस चाय की सबसे बड़ी खासियत इसकी दुर्लभता है। बताया जाता है कि इसके असली और सैकड़ों साल पुराने सिर्फ छह मदर बुश यानी मूल पौधे ही बचे हैं। इन्हीं पौधों से कभी दुनिया की सबसे महंगी चाय तैयार होती थी।

इन पौधों की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि इनके आसपास हमेशा सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं। चीन सरकार ने साल 2006 में इन मूल पौधों से पत्तियां तोड़ने और व्यावसायिक इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।

आज बाजार में मिलने वाली डा हांग पाओ चाय मुख्य रूप से उन मूल पौधों की टहनियों से तैयार किए गए नए पौधों से बनाई जाती है। हालांकि उनकी कीमत भी सामान्य चाय के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है।

सोने से भी ज्यादा कीमती क्यों मानी जाती है यह चाय

कमोडिटी मार्केट में किसी भी चीज की कीमत उसकी उपलब्धता और मांग तय करती है। डा हांग पाओ चाय की मांग दुनिया भर में काफी ज्यादा है, लेकिन इसकी असली पैदावार बेहद सीमित है। यही कारण है कि इसे सोने से भी महंगी चाय कहा जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि चीन की सांस्कृतिक विरासत और लग्जरी लाइफस्टाइल का प्रतीक बन चुकी है। कई अमीर लोग इसे स्टेटस सिंबल की तरह खरीदते हैं।

भारत में भी बढ़ रहा प्रीमियम चाय का बाजार

भारत में भी अब लोग सिर्फ सामान्य चाय तक सीमित नहीं रह गए हैं। दार्जिलिंग टी, असम टी, व्हाइट टी और ऑर्गेनिक टी जैसी प्रीमियम चायों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बड़े शहरों में लोग स्वाद और स्वास्थ्य दोनों को ध्यान में रखते हुए महंगी और खास चाय खरीदना पसंद कर रहे हैं। हालांकि डा हांग पाओ जैसी चाय आम लोगों की पहुंच से बहुत दूर है, लेकिन इस चाय की बाज़ार में मौजूदगी यह जरूर दिखाती है कि दुनिया में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और लग्जरी का भी हिस्सा बन चुकी है।

Jyotsana Singh

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