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हर आधे घंटे में तस्वीर, सीमा पर 24x7 नजर… ISRO का EOS-05 क्यों है भारत की नई ‘तीसरी आंख’?
ISRO Launches EOS-05: इसरो ने जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट से ईओएस-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। यह सैटेलाइट रियल टाइम निगरानी, आपदा प्रबंधन, कृषि और सीमा सुरक्षा में मदद करेगा।
Image Source- Social Media
ISRO Launches EOS-05: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) ने एक बार फिर अंतरिक्ष में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसरो ने शुक्रवार, 4 सितंबर को तड़के जीएसएलवी-एफ17 (GSLV-F17) रॉकेट के जरिए अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट यानी ईओएस-05 (EOS-05) को अंतरिक्ष में भेजा और उसे सफलतापूर्वक उसकी तय कक्षा में स्थापित कर दिया। 2,300 किलोग्राम से ज्यादा वजनी इस सैटेलाइट की सफलता को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
खास बात यह है कि ईओएस-05 भारत का पहला ऐसा सैटेलाइट है, जो जियो इमेजिंग (Geo Imaging) के जरिए अंतरिक्ष से भारतीय उपमहाद्वीप पर लगातार नजर रखने में मदद करेगा। हर आधे घंटे में तस्वीरें भेजने की क्षमता रखने वाले इस सैटेलाइट को भारत की नई ‘तीसरी आंख’ भी कहा जा रहा है।
भारी बारिश के बीच रात में हुआ लॉन्च
इसरो ने शुक्रवार तड़के 2 बजकर 55 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्चिंग रेंज से जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के जरिए ईओएस-05 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा। लॉन्च से पहले करीब 27.5 घंटे तक सुचारू उल्टी गिनती यानी काउंटडाउन (Countdown) चला।
भारी बारिश के बीच रॉकेट ने दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी। सुबह के अंधेरे आसमान में रॉकेट की तेज रोशनी दिखाई दी और नारंगी धुएं के साथ हुई गड़गड़ाहट ने पूरे माहौल को रोमांचक बना दिया।
इस दौरान इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन (V. Narayanan) और मिशन कंट्रोल सेंटर में मौजूद वैज्ञानिक लगातार रॉकेट की उड़ान पर नजर बनाए हुए थे। कुछ समय बाद 2,367 किलोग्राम वजनी ईओएस-05 को सफलतापूर्वक उसकी सटीक कक्षा में स्थापित कर दिया गया और मिशन पूरा हो गया।
भारत के लिए क्यों है इतना बड़ा मिशन?
ईओएस-05 की मिशन अवधि 10 साल बताई गई है। इसे सब-जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (Sub-GEO Orbit) में भेजा गया है। इसकी पेरिगी यानी पृथ्वी से सबसे नजदीकी दूरी 170 किलोमीटर और एपोजी यानी पृथ्वी से सबसे दूर की दूरी 28,934 किलोमीटर है। यह भूमध्य रेखा से करीब 19.28 डिग्री के झुकाव पर काम करेगा।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब-जियोसिंक्रोनस कक्षा से काम करने वाला भारत का पहला उपग्रह है। ईओएस-05 को भारत का पहला जियो इमेजिंग सैटेलाइट भी बताया गया है, जो अंतरिक्ष में भारत की तीसरी आंख की तरह काम करेगा।
भूस्थैतिक कक्षा के करीब से यह भारतीय उपमहाद्वीप की तस्वीरें भेजने में मदद करेगा। सामान्य स्थिति में यह हर आधे घंटे में पूरे क्षेत्र की तस्वीर उपलब्ध करा सकेगा और जरूरत पड़ने पर एक ही इलाके की तस्वीर हर पांच मिनट में भी ली जा सकेगी।
रियल टाइम में मिलेगी जमीन की तस्वीर
ईओएस-05 की सबसे बड़ी खासियत रियल टाइम मॉनिटरिंग (Real Time Monitoring) है। एक ही क्षेत्र की बार-बार तस्वीरें लेने की क्षमता से जमीन पर होने वाले बदलावों पर तेजी से नजर रखी जा सकेगी।
इसका फायदा सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को ही नहीं बल्कि किसानों को भी मिल सकता है। फसलों, कृषि और मौसम से जुड़ी जानकारी रियल टाइम डेटा के आधार पर मिलने में मदद होगी।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी यह सैटेलाइट काफी अहम साबित हो सकता है। चक्रवात, भूकंप, बाढ़, एवलांच यानी हिमस्खलन, बादल फटने और आग जैसी घटनाओं की निगरानी करने में इससे मदद मिल सकती है। ऐसे मामलों में तेजी से जानकारी मिलने पर राहत और बचाव कार्यों को बेहतर तरीके से अंजाम देना आसान हो सकता है।
सीमा पर भी 24 घंटे नजर रखने में मदद
ईओएस-05 का इस्तेमाल सुरक्षा और सर्विलांस (Surveillance) के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। यह सैटेलाइट भारत की सीमाओं पर होने वाली गतिविधियों और किसी भी संदिग्ध हलचल पर नजर रखने में मदद कर सकता है।
चीन और पाकिस्तान की तरफ से सीमा पर होने वाली गतिविधियों, अवैध घुसपैठ की कोशिशों और दूसरी हलचलों पर अंतरिक्ष से नजर रखने की क्षमता भारत की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर सकती है।
इससे अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ ही एलएसी (LAC) और एलओसी (LoC) पर सैनिक गतिविधियों, सैन्य ढांचे और मूवमेंट की निगरानी पहले से ज्यादा तेज और सटीक तरीके से करने में मदद मिल सकती है। रियल टाइम तस्वीरें मिलने से सुरक्षा बलों को स्थिति को समझने और कम जोखिम के साथ ऑपरेशन की योजना बनाने में भी सुविधा हो सकती है।
ईओएस-05 हिंद महासागर क्षेत्र में जहाजों, समुद्री गतिविधियों और रणनीतिक मूवमेंट पर नजर रखने में भी मददगार साबित हो सकता है। यही वजह है कि इस मिशन को भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने क्या कहा?
मिशन की सफलता के बाद इसरो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ईओएस-05 को पृथ्वी की निगरानी करने वाला एक अत्याधुनिक सैटेलाइट बताया, जो भू-तुल्यकालिक कक्षा से काम करने वाला भारत का पहला उपग्रह है।
इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि जीएसएलवी-एफ17 और ईओएस-05 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उन्होंने बताया कि उड़ान के सभी पैरामीटर सही रहे और अत्याधुनिक ईओएस-05 सैटेलाइट को उसकी सटीक कक्षा में स्थापित कर दिया गया। उन्होंने इसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
अब अमेरिका, रूस और चीन वाले क्लब में भारत
ईओएस-05 की सफलता के बाद भारत अब उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास जियो इमेजिंग सैटेलाइट की सुविधा है। भारत से पहले अमेरिका, चीन, रूस, जापान, यूरोप और दक्षिण कोरिया के पास इस तरह की क्षमता मौजूद थी।
इसरो की इस सफलता के साथ भारत की अंतरिक्ष ताकत को एक नई दिशा मिली है। एक तरफ यह सैटेलाइट किसानों को फसलों और मौसम से जुड़ी अहम जानकारी देने में मदद कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रबंधन और सीमाओं की निगरानी में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
हर आधे घंटे में तस्वीर और जरूरत पड़ने पर हर पांच मिनट में किसी खास इलाके पर नजर रखने की क्षमता के साथ ईओएस-05 आने वाले सालों में भारत की अंतरिक्ष आधारित निगरानी व्यवस्था की अहम कड़ी बन सकता है। यही वजह है कि इस सैटेलाइट को भारत की नई ‘तीसरी आंख’ कहा जा रहा है।


