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PK की बिहार में हार के बाद बड़ी तैयारी! जन सुराज को पंचायत स्तर तक खड़ा करेंगे प्रशांत किशोर
Prashant Kishore News: पटना के शेखपुरा हाउस में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रशांत किशोर और प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने स्पष्ट किया कि संगठन का पुराना स्वरूप अब इतिहास हो चुका है। पार्टी ने बिहार के सभी 12 संगठनात्मक डिवीजनों की कमान वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है।
Prashant Kishore News: बिहार विधानसभा के हालिया उपचुनावों के परिणामों ने चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर (PK) को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। चुनावी हार को 'तौबा' नहीं बल्कि 'नया सबक' मानते हुए प्रशांत किशोर ने जन सुराज मिशन 2.0 का आगाज कर दिया है। संगठन की पुरानी इकाइयों को भंग करने के बाद पंचायत स्तर से एक नई और अभेद्य सांगठनिक संरचना खड़ी करने की नींव रख दी गई है।
पर्यवेक्षकों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
पटना के शेखपुरा हाउस में आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रशांत किशोर और प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने स्पष्ट किया कि संगठन का पुराना स्वरूप अब इतिहास हो चुका है। पार्टी ने बिहार के सभी 12 संगठनात्मक डिवीजनों की कमान वरिष्ठ नेताओं (पर्यवेक्षकों) को सौंपी है। ये पर्यवेक्षक अपने आवंटित जिलों में प्रवास करेंगे और नई, प्रभावी व सक्रिय इकाइयों के गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। जन सुराज के नए मॉडल में सबसे निचली इकाई पंचायत को महत्व दिया गया है।
पंचायत से प्रदेश तक शक्ति का केंद्र
पर्यवेक्षक अब हर पंचायत में ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान करेंगे जो केवल चुनाव लड़ने के इच्छुक न हों, बल्कि पार्टी की विचारधारा और 'जन सुराज' की अवधारणा में गहरी आस्था रखते होंगे। पंचायतों में सक्रिय कार्यकर्ताओं की टीम तैयार होने के बाद प्रखंड (ब्लॉक) स्तर पर जोड़ा जाएगा। इसके बाद जिला इकाइयों का गठन होगा। जब राज्य के सभी जिलों में समर्पित कैडर तैयार हो जाएगा, तब प्रदेश स्तर की मुख्य इकाई को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पुरानी गलतियों से लिया सबक
पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले जन सुराज ने जिस संगठन को जल्दबाजी में खड़ा किया था, उसमें एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का था जिनकी दृष्टि केवल चुनाव लड़कर सदन पहुंचने तक सीमित थी। टिकट बंटवारे के दौरान हुए विवादों और भितरघात ने पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया। चुनाव बाद हुए विश्लेषण में यह बात सामने आई कि जिन उम्मीदवारों को टिकट मिला, केवल उनकी व्यक्तिगत ताकत ही जमीन पर दिखी।
आस्था और सक्रियता का संगम
पार्टी का संगठनात्मक कैडर बहुत ज्यादा सक्रिय या भागीदार नहीं रहा। समर्पित कार्यकर्ताओं के इसी अभाव को देखते हुए प्रशांत किशोर ने पूरी व्यवस्था को ही बदलने का निर्णय लिया है। प्रशांत किशोर के अनुसार अब संख्या बल से ज्यादा महत्व कार्यकर्ताओं की गुणवत्ता और निष्ठा को दिया जाएगा। पर्यवेक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे पंचायतवार कार्यकर्ताओं की संख्या निर्धारित करें और यह सुनिश्चित करें कि संगठन में वैसे ही लोग आएं जो लंबी राजनीतिक लड़ाई के लिए तैयार किए जाएं।


