जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से क्यों हटाया? दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में किया खुलासा!

Jantar Mantar Protest Row: जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने पर दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का हवाला दिया। पुलिस ने कहा कि आदेश के आधार पर तीन वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों की पहचान की गई है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 13 Oct 2026 9:00 PM IST
Jantar Mantar Protest Row
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Jantar Mantar Protest Row: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से बाहर करने के फैसले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगहों की सूची से हटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के तहत लिया गया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, सर्वोच्च अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के लिए उचित जगहों की पहचान करने और वहां जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदली व्यवस्था

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन की तय जगह से हटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के आधार पर लिया गया था। दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत के सामने पुलिस का पक्ष रखा।

पुलिस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोगों के लिए ऐसी जगहों की पहचान करने की बात कही गई थी, जहां उनके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसी आदेश के आधार पर प्रदर्शन स्थलों की व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

दरअसल, हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के कारण कई मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द करने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी।

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि अब समय आ गया है कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके लिए प्रदर्शन की ऐसी जगहों की पहचान किए जाने की जरूरत है, जहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने सक्षम अधिकारियों को अपने सुझाव पर विचार करने और इस संबंध में उचित फैसला लेने की बात कही थी। दिल्ली पुलिस ने अब हाई कोर्ट को बताया है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने और वैकल्पिक जगहों की पहचान करने का फैसला इसी आदेश के आधार पर लिया गया है।

SC के आदेश पर तीन वैकल्पिक जगहों की पहचान

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने जस्टिस अमित महाजन के सामने सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद तीन वैकल्पिक जगहों की पहचान करने का फैसला लिया है।

पुलिस की ओर से अदालत में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों के लिए उचित जगहों की पहचान करने और उन्हें तय करने की जरूरत बताई थी। दिल्ली पुलिस ने इसी दिशा में कदम उठाया है।

उदय भानु चिब ने दी थी दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती

गौरतलब है कि इंडियन यूथ कांग्रेस यानी आईवाईसी (Indian Youth Congress) के प्रमुख उदय भानु चिब ने जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के दिल्ली पुलिस के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

उदय भानु चिब की याचिका में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के फैसले पर सवाल उठाए गए थे। इस मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा गया और मंगलवार को पुलिस ने अदालत के सामने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने को लेकर अपना पक्ष रखा।

दिल्ली पुलिस ने कहा- याचिका अब निरर्थक

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर को अब प्रदर्शन स्थल की सूची से डी-नोटिफाई कर दिया गया है। ऐसे में उदय भानु चिब की याचिका अब निरर्थक हो गई है, क्योंकि याचिका का मुख्य मुद्दा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ा था।

हालांकि, उदय भानु चिब की ओर से पेश एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत में कहा कि याचिका में सिर्फ प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ी मांग नहीं है, बल्कि कुछ और मांगें भी हैं, जिन पर अदालत को विचार करना चाहिए।

वकीलों की दलीलें संक्षेप में सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने चिब की तीन मांगों पर नोटिस जारी किया। इस तरह जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बावजूद मामले की अन्य मांगों पर सुनवाई का रास्ता खुला हुआ है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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