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देवरिया के लाल एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के परिवार में कौंन-कौंन? 38 साल की फौजी सेवा से राम मंदिर के CEO तक का सफर
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपााटपुरा गांव से बताया जाता है।
Jeetendra Mishra Family Background: अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के तौर पर नियुक्त किए गए पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा इन दिनों चर्चा में हैं। करीब 38 साल तक भारतीय वायुसेना में सेवा देने वाले जितेंद्र मिश्रा ने फाइटर पायलट से लेकर वायुसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख तक की जिम्मेदारी संभाली। अब उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उनके सैन्य करियर की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन उनकी पारिवारिक और शुरुआती जिंदगी के बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक है। ताजा मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जितेंद्र मिश्रा का संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपााटपुरा गांव से है और वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता लेक्चरर थे।
देवरिया के छोटे से गांव से निकले जितेंद्र मिश्रा
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपााटपुरा गांव से बताए जाते हैं। उनका पारिवारिक background मध्यमवर्गीय रहा है। उनके पिता नथुनी मिश्रा शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े थे और लेक्चरर के तौर पर काम करते थे। यही वजह है कि उनके शुरुआती जीवन में शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान मिला।
हालांकि, उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को लेकर सार्वजनिक रिकॉर्ड बेहद सीमित हैं। रिपोर्टों में उनकी पत्नी, बच्चों, माता या भाई-बहनों के नाम नहीं मिलते हैं। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य वेबसाइटों पर चल रहे दावों को उनके परिवार की पक्की जानकारी मानना उचित नहीं होगा।
पढ़ाई के बाद चुना देश सेवा का रास्ता
जितेंद्र मिश्रा ने आगे चलकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), पुणे से शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर अपना करियर शुरू किया। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। आगे चलकर उन्होंने Air Force Test Pilots School, बेंगलुरु के अलावा अमेरिका के Air Command and Staff College और ब्रिटेन के Royal College of Defence Studies से भी प्रशिक्षण लिया।
38 साल से ज्यादा का शानदार सैन्य करियर
जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में 38 साल से ज्यादा समय तक सेवा की और इस दौरान 3,000 से अधिक घंटे उड़ान भरी। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे।
कारगिल युद्ध में भी निभाई अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा के करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कारगिल युद्ध से भी जुड़ा रहा। उपलब्ध सैन्य रिकॉर्ड के अनुसार, कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने Mirage-2000 विमानों पर लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने वाली टीम में काम किया था।
ऑपरेशन सिंदूर में संभाली पश्चिमी कमान
जितेंद्र मिश्रा के करियर में सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक Western Air Command के Air Officer Commanding-in-Chief का पद रहा। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी वह पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। इस अभियान में उनकी भूमिका के लिए उन्हें प्रतिष्ठित Sarvottam Yudh Seva Medal से सम्मानित किया गया।
परिवार की सादगी से देश की बड़ी जिम्मेदारी तक
जितेंद्र मिश्रा की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि वह उत्तर प्रदेश के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर भारतीय वायुसेना के शीर्ष पदों तक पहुंचे। उनके पिता लेक्चरर थे, लेकिन उनके अपने परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।


