TRENDING TAGS :
Jharkhand Exam Scam: टाइल्स के नीचे तार, ‘कलर कोड’ और करोड़ों की डील, ऐसे चल रहा था नकल माफिया का पूरा खेल
Jharkhand Exam Scam में जांच के दौरान टाइल्स के नीचे छिपे कंप्यूटर वायर, ‘कलर कोड’, सॉल्वर और करोड़ों रुपये की कथित डील का मामला सामने आया है। जानिए पूरा नेटवर्क।
Jharkhand Exam Scam: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन भले ही अब थम गया हो, लेकिन जांच में सामने आ रही जानकारियां परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर यह मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भर्ती आयोग, निजी परीक्षा एजेंसी, कोचिंग संस्थानों, परीक्षा केंद्रों, बिचौलियों और अभ्यर्थियों से जुड़ा एक बड़ा नेटवर्क जांच के दायरे में है।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में करीब 26 दिनों तक छात्रों ने प्रदर्शन किया। बारिश और खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ धरने पर डटे रहे। छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
पूर्व JPSC चेयरमैन से पूछताछ और गिरफ्तारी
जांच में मुख्य आरोपी बताए जा रहे अभय तिवारी और उसके कथित सहयोगियों से पूछताछ के आधार पर एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भी CID ने पूछताछ की थी और बाद में उनकी गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कथित लेन-देन का पैसा किन लोगों तक पहुंचा। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम तस्वीर CID की विस्तृत जांच और चार्जशीट के बाद ही स्पष्ट होगी।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का काम मिलने का आरोप
जांच का एक अहम पहलू TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, झारखंड सरकार ने मई 2025 में 2024 में कराई गई परीक्षाओं से संबंधित शिकायतों के बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया था।
इसके बावजूद कथित तौर पर JPSC की परीक्षाओं से जुड़ा काम कंपनी को मिला। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कंपनी से जुड़े लोगों और परीक्षा केंद्रों, कोचिंग संस्थानों तथा अभ्यर्थियों के बीच किस तरह संपर्क स्थापित हुआ।
5 लाख रुपये तक में प्री परीक्षा पास कराने का दावा
जांच में सामने आए कथित नेटवर्क के अनुसार, कोचिंग संस्थानों के जरिए ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की जाती थी जो परीक्षा में कथित मदद के लिए पैसे देने को तैयार हों।
सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक परीक्षा में मदद के लिए कुछ अभ्यर्थियों से करीब 5 लाख रुपये तक लिए जाने का आरोप है। वहीं, एक भर्ती परीक्षा में जहां करीब 20 पद थे, वहां मुख्य परीक्षा में मदद के लिए कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये तक वसूले जाने की बात जांच में सामने आई है।
अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग परीक्षाओं के लिए रकम अलग हो सकती थी और जांच में कथित रिश्वत की रकम के लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।
परीक्षा केंद्रों पर ‘कलर कोड’ से अभ्यर्थियों की पहचान?
जांच में सामने आई सबसे चौंकाने वाली जानकारी परीक्षा केंद्रों की कथित कार्यप्रणाली से जुड़ी है।
एक अधिकारी के मुताबिक, जिन अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लिए गए थे, उनकी पहचान आसान बनाने के लिए उन्हें खास रंग के कपड़े पहनने के लिए कहा जाता था। इसका उद्देश्य परीक्षा केंद्र पर मौजूद नेटवर्क से जुड़े लोगों को ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान कराने का था।
हालांकि, इस दावे की पुष्टि जांच पूरी होने और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
टाइल्स के नीचे छिपाए गए कंप्यूटर के तार
जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित नकल के लिए तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर 10 से 12 कंप्यूटर ऐसे अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित किए जाते थे जिन्होंने कथित तौर पर पैसे दिए थे।
इन कंप्यूटरों के तार फर्श की टाइल्स के नीचे से दूसरे कमरे तक ले जाने का आरोप है। दूसरे कमरे में मौजूद कथित ‘सॉल्वर’ डिजिटल डिवाइस के जरिए सवाल हल करते थे और अभ्यर्थियों को उत्तर उपलब्ध कराते थे।
अगर जांच में यह आरोप साबित होता है तो यह पारंपरिक पेपर लीक से अलग परीक्षा प्रणाली में तकनीकी स्तर पर की गई सुनियोजित सेंध मानी जाएगी।
उत्तर पुस्तिकाएं बदलने का भी आरोप
जांच में कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं को कथित तौर पर परीक्षा केंद्र से बाहर निकालकर उनकी जगह हल की गई कॉपियां लगाने की आशंका भी सामने आई है।
CID इस पूरे नेटवर्क में परीक्षा केंद्रों की भूमिका, कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत और कथित बिचौलियों के बीच पैसों के लेन-देन की जांच कर रही है।
कोचिंग संस्थानों पर भी जांच का फोकस
CID ने मामले में कई आरोपियों को फरार घोषित किया है। इनमें झारखंड के अलग-अलग इलाकों में कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
रांची के आदित्य पांडे और पवन कुमार सिंह, पलामू के रवि शंकर कुमार उर्फ रवि मास्टर और संतोष केआर सिंह, बोकारो के सनंद प्रकाश तथा गिरिडीह के सौरभ पांडे समेत कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में बताई गई है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ कोचिंग संस्थानों के परीक्षा केंद्र के रूप में इस्तेमाल होने की बात भी सामने आई है।
पेपर लीक से कहीं बड़ा है मामला?
झारखंड परीक्षा घोटाले की जांच में सामने आ रहे आरोप अगर चार्जशीट और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों से पुष्ट होते हैं, तो यह मामला सिर्फ पेपर लीक का नहीं बल्कि पूरी भर्ती परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले कथित संगठित नेटवर्क का हो सकता है।
जांच का दायरा भर्ती आयोग के अधिकारियों से लेकर निजी परीक्षा एजेंसी, कोचिंग संस्थानों, परीक्षा केंद्रों, बिचौलियों और अभ्यर्थियों तक पहुंच रहा है।
फिलहाल, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों की जांच के बाद ही निकलेगा। लेकिन छात्रों के लंबे आंदोलन ने झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए वर्षों तैयारी करने वाले युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन का अधिकार मिलना चाहिए। उनका दबाव अब सरकार और जांच एजेंसियों पर है कि कथित परीक्षा माफिया के पूरे नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई की जाए और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाया जाए।


