सड़क नहीं तो खाट ही सहारा! 4 KM तक गर्भवती को कंधों पर ढोकर पहुंचाया अस्पताल, नहीं पहुंची एम्बुलेंस

Jharkhand Roadless Village: झारखंड के गिरिडीह में सड़क नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने 4 किलोमीटर तक खाट पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग तेज कर दी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 12 July 2026 11:02 AM IST
Jharkhand Roadless Village
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Jharkhand Roadless Village: झारखंड के गिरिडीह (Giridih) जिले के पीरटांड़ (Pirtand) प्रखंड की मधुबन (Madhuban) पंचायत के उत्तरी पारसनाथ टोला (Uttari Parasnath Tola) में बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर सामने आई है। सड़क नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने खाट पर लादकर करीब चार किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद वाहन की व्यवस्था कर उसे अस्पताल भेजा गया, जहां उसने एक बच्चे को जन्म दिया।

गांव तक नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस

जानकारी के अनुसार, कुरुआतांड (Kuruatand) निवासी संतोष मुर्मू (Santosh Murmu) की पत्नी लोगो टुडू (Logo Tudu) को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस सेवा (Ambulance Service) से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने की वजह से एंबुलेंस वहां नहीं पहुंच सकी।

इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने महिला को खाट पर लिटाया और दुर्गम पहाड़ी रास्तों से पिपराडीह (Pipradih) मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से वाहन की व्यवस्था की गई और उसे अस्पताल ले जाया गया। बाद में पीरटांड़ (Pirtand) के एक निजी अस्पताल (Private Hospital) में महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया।

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पहली घटना नहीं है। करीब एक माह पहले भी इसी तरह एक गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा था। उस घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र का सर्वेक्षण (Survey) भी कराया था, लेकिन सड़क निर्माण की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

10 जुलाई को डीसी को सौंपा था ज्ञापन

ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले 10 जुलाई को कुरुआतांड, दालुवाडीह (Daluwadih), डाहिया (Dahiya), ईटाबेड़ा (Itabera), गाड़ापरोम (Garaparom), सहेरबेड़ा (Saherbera), जिरबेड़ा (Jirbera), सतकटिया (Satkatiya) और बोरवाबेड़ा (Borwabera) समेत नौ गांवों के 100 से अधिक महिला-पुरुष समाहरणालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने गिरिडीह के डीसी (DC) रामनिवास यादव (Ramnivas Yadav) को ज्ञापन सौंपकर सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग की थी।

ग्रामीणों ने डीसी को बताया था कि प्रशासन की ओर से पहले सर्वेक्षण किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी विकास कार्य की शुरुआत नहीं हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, डीसी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि आगामी बुधवार को वे स्वयं गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे।

बारिश में और बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीण बुधन सोरेन (Budhan Soren), सुशील मुर्मू (Sushil Murmu), सानो मरांडी (Sano Marandi), गोपाल मुर्मू (Gopal Murmu), सोमरा मुर्मू (Somra Murmu) समेत अन्य लोगों ने पत्रकारों को बताया कि, पिपराडीह तक सड़क बनी है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क नहीं बन सकी। बारिश के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई तो वे समाहरणालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

Aditya Kumar Verma
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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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