हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का निधन, 20 दिन से अस्पताल में वेंटिलेटर पर चल रही थी जिंदगी की जंग!

Hemant Soren’s Mother Death: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का 78 साल की उम्र में निधन हो गया। वह करीब 20 दिनों से रांची के अस्पताल में भर्ती थीं और वेंटिलेटर पर थीं।

Aditya Kumar Verma
Published on: 7 Oct 2026 9:56 PM IST (Updated on: 7 Oct 2026 9:56 PM IST)
Hemant Soren’s Mother Rupi Soren Dies
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Hemant Soren’s Mother Death: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का निधन हो गया है। वह पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं और रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। करीब 20 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद 78 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

रूपी सोरेन की हालत गंभीर होने के बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट (Ventilator Support) पर रखा गया था। हिल व्यू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉ. नितेश प्रिया ने पीटीआई (PTI) को बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन, जो अस्पताल में भर्ती थीं, रात करीब 8.30 बजे गुजर गईं।

डॉ. नितेश प्रिया ने बताया कि रूपी सोरेन को 18 सितंबर को सांस लेने में दिक्कत होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत में कई तरह की जटिलताएं (Complications) थीं और स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई थी।

कई दिनों से अस्पताल में चल रहा था इलाज

रूपी सोरेन को सांस लेने में भारी तकलीफ थी। इसके अलावा दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उन्हें रांची के हिल व्यू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल में करीब 20 दिन इलाज चलने के बाद उनकी हालत और बिगड़ गई। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। डॉक्टर के मुताबिक, कई कॉम्प्लीकेशंस के चलते उनकी हालत बेहद नाजुक थी।

बुधवार को भी उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। इसके बाद रात करीब 8.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

शिबू सोरेन की पत्नी थीं रूपी सोरेन

रूपी सोरेन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज आदिवासी नेता ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन की पत्नी थीं। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां के निधन की खबर के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं और उनके शुभचिंतकों की ओर से भी शोक जताया जाने लगा है। रूपी सोरेन के निधन को परिवार के लिए बड़ी क्षति बताया जा रहा है।

अंबा प्रसाद ने जताया दुख

बरकागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रूपी सोरेन के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माताजी रूपी सोरेन के निधन का समाचार बेहद दुखद है।

अंबा प्रसाद ने अपनी पोस्ट में दिवंगत आत्मा को श्रीचरणों में स्थान मिलने और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत पूरे शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की। उन्होंने रूपी सोरेन को विनम्र श्रद्धांजलि भी दी।

संजय सेठ ने भी जताया शोक

झारखंड के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी रूपी सोरेन के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री की पूज्य माताजी के निधन का समाचार बेहद पीड़ादायक है।

संजय सेठ ने शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने का संबल और शक्ति देने की प्रार्थना की।

78 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

रूपी सोरेन 78 साल की थीं। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब थी और उन्हें सांस लेने में परेशानी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन करीब 20 दिनों के इलाज के बाद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

रूपी सोरेन के निधन के बाद झारखंड में शोक का माहौल है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और शिबू सोरेन की पत्नी के निधन की खबर पर राजनीतिक नेताओं और शुभचिंतकों की ओर से लगातार संवेदनाएं जताई जा रही हैं।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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