रद्द होगी JPSC 2025 परीक्षा? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CBI जांच और दोबारा एग्जाम की मांग

JPSC Exam 2025 Case: JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। 19 अप्रैल की परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने और कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग की गई है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 8 Aug 2026 7:14 PM IST
JPSC Exam 2025 Case | Supreme Court
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JPSC Exam 2025 Case: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 (Combined Civil Services Preliminary Examination 2025) को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है।

मामले में एक जनहित याचिका यानी पीआईएल (PIL) दायर की गई है, जिसमें 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और परीक्षा में कथित अनियमितताओं (Irregularities) की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता हरिश्रन देवगन ने यह याचिका दायर की है। याचिका में कथित गड़बड़ियों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के लिए मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) को सौंपने या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति (Independent Committee) गठित करने की मांग की गई है।

हालांकि, परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े ये आरोप और याचिकाकर्ता की मांगें हैं। इन पर सुप्रीम कोर्ट को अभी फैसला करना बाकी है।

19 अप्रैल की परीक्षा रद्द करने की मांग

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 को रद्द करने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि परीक्षा में कथित तौर पर कई गड़बड़ियां हुई हैं, जिनकी जांच के बाद दोबारा परीक्षा (Re-Examination) कराई जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की है। इसके लिए दो विकल्प सुझाए गए हैं।

पहला, मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपी जाए और दूसरा, किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाई जाए।

याचिका में कथित कमियों की जांच समयबद्ध तरीके से पूरी करने की भी मांग की गई है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल हो सके।

रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का सुझाव

याचिका में प्रस्तावित स्वतंत्र जांच समिति की संरचना को लेकर भी विस्तार से सुझाव दिया गया है।

इसमें कहा गया है कि समिति की अध्यक्षता झारखंड से बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या किसी हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश (Retired Chief Justice) को दी जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि समिति में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

इनमें फोरेंसिक साइंस (Forensic Science), आईटी (IT), परीक्षा सुरक्षा (Exam Security), ओएमआर जांच (OMR Verification), साइबर सुरक्षा (Cyber Security) और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (Public Administration) के विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं।

याचिका के मुताबिक ऐसी विशेषज्ञ समिति बनाए जाने का मकसद परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष और तकनीकी तरीके से जांच करना होगा।

साथ ही यह भी पता लगाया जा सकेगा कि जांच के दौरान किसी तरह की लापरवाही न हो और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की ठीक से पड़ताल की जाए।

परीक्षा से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

याचिका में परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि जांच पूरी होने तक परीक्षा से संबंधित सभी जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाने चाहिए, ताकि जांच के दौरान किसी अहम सबूत के नष्ट होने या उसमें बदलाव किए जाने का खतरा न रहे।

इन रिकॉर्ड में मूल ओएमआर शीट (Original OMR Sheets), प्रश्न पत्र (Question Papers) और आंसर की (Answer Key) शामिल हैं।

इसके अलावा परीक्षा से जुड़े बायोमेट्रिक रिकॉर्ड (Biometric Records) और सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

याचिका में डिस्पैच रजिस्टर (Dispatch Register), परीक्षा केंद्र की रिपोर्ट (Examination Centre Reports), स्कैनिंग से जुड़े रिकॉर्ड (Scanning Records) और मूल्यांकन से संबंधित रिकॉर्ड (Evaluation Records) को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

सबूत सुरक्षित रखने के पीछे क्या है दलील?

याचिकाकर्ता का कहना है कि परीक्षा से जुड़े सभी मूल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत सुरक्षित रहना जरूरी है। अगर ये दस्तावेज या रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं तो जांच के दौरान अधिकारियों और विशेषज्ञों के सामने वास्तविक रिकॉर्ड मौजूद रहेंगे और कथित अनियमितताओं की सही तरीके से जांच की जा सकेगी।

याचिका में आशंका जताई गई है कि जांच के दौरान अगर जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रहे तो अहम सबूतों के नष्ट होने या उनमें बदलाव किए जाने का खतरा हो सकता है। इसी वजह से जांच पूरी होने तक सभी संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार

जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 को लेकर दायर इस जनहित याचिका में परीक्षा रद्द करने, दोबारा परीक्षा कराने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने जांच के लिए सीबीआई या रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति का विकल्प भी रखा है।

याचिका में परीक्षा से जुड़े मूल दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।

हालांकि, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़े आरोप, जांच की मांग और परीक्षा रद्द करने की मांग फिलहाल याचिकाकर्ता के दावे हैं। इन सभी मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट को अभी फैसला करना बाकी है।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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